कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार बरी, 1984 दंगों से जुड़े इस केस में कोर्ट का फैसला

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अहम मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा के मामले में सबूतों के अभाव और सज्जन कुमार की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें बरी करने का आदेश दिया है.

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1984 दिल्ली दंगों से जुड़े जनकपुरी-विकासपुरी मामले में अदालत को पर्याप्त सबूत नहीं मिले. (File Photo: ITG) 1984 दिल्ली दंगों से जुड़े जनकपुरी-विकासपुरी मामले में अदालत को पर्याप्त सबूत नहीं मिले. (File Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा के मामले में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया है. स्पेशल जज दिग्विनय सिंह की अदालत ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी. यह मामला फरवरी 2015 में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर से संबंधित था. 

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सज्जन कुमार के खिलाफ पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और अवतार सिंह की हत्या और दूसरी 2 नवंबर 1984 को गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने की घटना के लिए थी. 

सज्जन कुमार ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं है और वह सपने में भी ऐसी हिंसा में शामिल होने की बात नहीं सोच सकते. उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच न करने का भी आरोप लगाया था. कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

दो अलग-अलग एफआईआर...

एसआईटी ने साल 2015 में इस मामले को दोबारा खोलते हुए दो एफआईआर दर्ज की थी. पहली एफआईआर जनकपुरी इलाके में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से जुड़ी थी. वहीं, दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मार डालने की जघन्य वारदात के लिए दर्ज की गई थी. सज्जन कुमार इन दोनों ही मामलों में मुख्य आरोपी के तौर पर ट्रायल का सामना कर रहे थे.

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सज्जन कुमार ने कोर्ट में क्या कहा?

जुलाई 2025 में कोर्ट में बयान दर्ज कराते वक्त सज्जन कुमार ने कड़ा रुख अपनाया था. उन्होंने कहा था कि वह दंगों में कभी शामिल नहीं थे. उनके बचाव का मुख्य आधार यह था कि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है. उन्होंने कोर्ट से कहा था कि वह निर्दोष हैं और जांच एजेंसी ने उन्हें जानबूझकर इस मामले में घसीटा है.

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