समीर वानखेड़े की बढ़ी मुश्किलें... दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया CAT का पुराना आदेश

यह मामला 2021 के चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़ा है. उस दौरान वानखेड़े के नेतृत्व में हुई छापेमारी के बाद कई गंभीर आरोप लगे थे. इन आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SET) का गठन किया गया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी.

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CBIC ने समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी. (File Photo- PTI) CBIC ने समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी. (File Photo- PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व जोनल डायरेक्टर और आईआरएस (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है.

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यह मामला 2021 के चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़ा है. उस दौरान वानखेड़े के नेतृत्व में हुई छापेमारी के बाद कई गंभीर आरोप लगे थे. इन आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SET) का गठन किया गया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी.

कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामला 2021 में काफी सुर्खियों में रहा था और इस केस के बाद वानखेड़े की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठे थे.

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने वानखेड़े की दलीलों से सहमत होते हुए चार्ज मेमोरेंडम को रद्द कर दिया था. ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है और ऐसा लगता है कि अधिकारी के खिलाफ कदम दुर्भावना से प्रेरित हैं.

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हाईकोर्ट में केंद्र सरकार और CBIC ने दलील दी कि CAT ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है. उनका कहना था कि आरोप पत्र जारी करने के शुरुआती चरण में ही ट्रिब्यूनल को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था. केंद्र ने यह भी कहा कि विभागीय जांच एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे पूरा होने दिया जाना चाहिए, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके.

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब केंद्र सरकार वानखेड़े के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी. इससे यह साफ हो गया है कि मामले की मेरिट पर अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा. इस निर्णय को वानखेड़े के लिए कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा, जो उनके करियर पर असर डाल सकती है.

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