पारा 41 तो क्यों लग रहा 51 डिग्री जैसा? अरब सागर की हवाओं ने दिल्ली को बनाया भट्टी, जानिए कब होगी झमाझम बारिश

दिल्ली में 28 जून को हीट इंडेक्स 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जबकि असली तापमान सिर्फ 41.3 डिग्री था. यह फर्क हवा में मौजूद नमी की वजह से है. नमी ज्यादा होने पर पसीना ठीक से नहीं सूखता और शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता. वेट-बल्ब तापमान, जो शरीर की ठंडक झेलने की ताकत मापता है, 29.77 डिग्री तक पहुंच गया, जो खतरनाक सीमा के करीब है.

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बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसूनी सिस्टम अभी पूरी तरह दिल्ली तक नहीं पहुंचा है (Photo: PTI) बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसूनी सिस्टम अभी पूरी तरह दिल्ली तक नहीं पहुंचा है (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

दिल्ली में शनिवार को मौसम विभाग ने बताया कि शहर का हीट इंडेक्स यानी 'फील्स लाइक' तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह इस साल का सबसे ज्यादा आंकड़ा है. लेकिन असली थर्मामीटर सिर्फ 41.3 डिग्री सेल्सियस दिखा रहा था. यानी दोनों नंबर सही हैं, बस दोनों अलग-अलग चीज बताते हैं.

क्या दिल्ली में असल में 51 डिग्री तापमान था? इसका जवाब नहीं है. हवा का असली तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस था, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से करीब 4 डिग्री ज्यादा है. 51.3 का आंकड़ा हीट इंडेक्स है, जो बताता है कि नमी मिलाने के बाद शरीर को मौसम कैसा महसूस होता है. नमी मतलब हवा में मौजूद पानी की भाप. जितनी ज्यादा नमी होगी, शरीर को ठंडा रखना उतना ही मुश्किल होगा. और यहीं से असली खतरा शुरू होता है.

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वेट-बल्ब तापमान क्या है?

शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता है. पसीना त्वचा पर आता है, हवा में उड़ता है और साथ में गर्मी भी ले जाता है. लेकिन यह तभी होता है जब आसपास की हवा सूखी हो. वैज्ञानिक इसी ठंडक देने की ताकत को मापने के लिए वेट-बल्ब तापमान का इस्तेमाल करते हैं. 

इसके लिए एक गीले कपड़े को थर्मामीटर पर लपेटकर उस पर हवा फेंकी जाती है. सूखी हवा में यह तापमान तेजी से गिरता है, लेकिन नम हवा में यह मुश्किल से हिलता है, क्योंकि हवा में पहले से ही इतना पानी होता है कि वह और पानी सोख नहीं पाती.

शनिवार को दिल्ली का वेट-बल्ब तापमान 29.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह सुनने में कम लग सकता है, लेकिन है नहीं. 32 डिग्री के वेट-बल्ब तापमान पर एक फिट और गर्मी का आदी इंसान भी ज्यादा देर बाहर काम नहीं कर सकता. 35 डिग्री पर पसीना काम करना बंद कर देता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता. दिल्ली धीरे-धीरे उस खतरनाक सीमा के करीब पहुंच रही है.

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दिल्ली में इतनी नमी क्यों है?

स्कायमेट वेदर के वाइस प्रेजिडेंट महेश पलावत के मुताबिक, अरब सागर से आ रही हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत में नमी ला रही हैं. मानसून, जो आमतौर पर बंगाल की खाड़ी से ठंडी बारिश लाता है, अभी भी दूर है. दिल्ली की गर्मी आम तौर पर सूखी होती है, लेकिन इस बार यह गीली गर्मी है, और गीली गर्मी ही जान के लिए ज्यादा खतरनाक होती है.

गर्मी से राहत कब मिलेगी?

जल्द ही. मौसम विभाग का कहना है कि सोमवार के बाद तापमान में कमी आएगी. हफ्ते भर बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक रहेगी. मंगलवार और बुधवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है.

शुक्रवार तक रातें ठंडी होकर करीब 22 डिग्री तक पहुंच सकती हैं, और मॉनसून 4 जुलाई के बाद आने की उम्मीद है. तब तक के लिए एक बात याद रखने लायक है, असली परेशानी गर्मी नहीं, बल्कि नमी है.

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