कोविड प्रबंधन: हरीश साल्वे का SC के लिए अमाइकस क्यूरी बनने से इनकार, बताई वजह

हरीश साल्वे के इस फैसले से कोर्ट जरूर हैरान हुआ, लेकिन वकील ने अपने बचाव में कई तरह के तर्क रखे थे. उन्होंने कहा था कि आजकल ये सामान्य सोच है कि वकीलों के दो ग्रुप मान लिए गए हैं. एक उद्योगों के लिए पेश होने वाले और दूसरे उद्योगों के खिलाफ.

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हरीश साल्वे ( फाइल फोटो) हरीश साल्वे ( फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST
  • हरीश साल्वे के फैसले से कोर्ट हुआ हैरान
  • दुष्यंत दवे के बयान पर जाहिर की नाराजगी
  • अगले हफ्ते 27 अप्रैल को मामले की सुनवाई

देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए केंद्र से उनकी रणनीति जाननी चाही थी. केस में कोर्ट की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को अमाइकस क्यूरी यानी कि न्यायमित्र भी नियुक्त किया गया था. लेकिन अब साल्वे की तरफ से कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वे खुद को इस केस से दूर रखना चाहते हैं. वे अमाइकस क्यूरी नहीं बनना चाहते हैं.

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हरीश साल्वे ने रखे कई तर्क

हरीश साल्वे के इस फैसले से कोर्ट जरूर हैरान हुआ, लेकिन वकील ने अपने बचाव में कई तरह के तर्क रखे थे. उन्होंने कहा था कि आजकल ये सामान्य सोच है कि वकीलों के दो ग्रुप मान लिए गए हैं. एक उद्योगों के लिए पेश होने वाले और दूसरे उद्योगों के खिलाफ. लेकिन मैंने सिर्फ अपने क्लाइंट्स के लिए केस लड़े हैं.

उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी ऐसी परंपरा का पालन होता है कि अपने क्लाइंट के लिए पेश होने वाले वकीलों को न्यूट्रल नहीं माना जाता. अपने क्लाइंट्स के प्रति हितों में टकराव को लेकर सवाल उठ सकते हैं. नैतिक रूप से वो नहीं चाहते कि ऐसे सवाल उठेंं.आखिरकार मामला कोर्ट का है.. 

बयान से नाराज सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट की तरफ से साल्वे की इस दलील पर दुख जरूर जाहिर किया गया लेकिन बाद में उन्हें अमाइकस क्यूरी के पद से मुक्त कर दिया गया. बेंच की तरफ से इस बात पर नाराजगी व्यक्त की गई कि कुछ वकीलों ने उनका पूरा फैसला जाने बिना ही आदेश पर तरह-तरह की टिप्पणियां कीं. जस्टिस रविंद्र भट्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह या पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने बिना हमारा आदेश देखे और समझे टिप्पणियां कीं जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

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वहीं सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कोर्ट के आदेश या स्वत संज्ञान को लेकर काफी कुछ लिखा. अच्छे वकीलों को और कोर्ट को अदालत पर दबाव बनाने की ऐसी कोशिशों को नाकाम कर देना चाहिए.

किस मुद्दे पर हुआ विवाद?

मालूम हो कि इस मुद्दे पर कोर्ट में इतनी बहस इसलिए हुई क्योंकि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो आदेश जारी किया गया था उस पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया आईं. कुछ वकीलों का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट का इस इस केस का स्वत संज्ञान लेना हाई कोर्ट द्वारा कोरोना काल में मिलने जारी राहत में देरी कर सकता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का तर्क था कि एक ही मुद्दे पर छह हाईकोर्ट दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद सुनवाई कर रहे थे, जो भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट अब 27 अप्रैल को मामले की सुनवाई करने जा रहा है. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता की तरफ से भी विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी गई थी. ऐसे में कोर्ट ने अगले मगंलवार को सुनवाई तय कर दी.

 

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