रामलीला मैदान में अन्ना का तीसरा दिन, नहीं आएंगे हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल आज सुबह करीब 11 बजे रामलीला मैदान पहुंचकर अन्ना को समर्थन देंगे. हालांकि, वह शनिवार को आने वाले थे, लेकिन उनका कार्यक्रम रद्द हो गया.

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23 मार्च से चल रहा है अन्ना का आंदोलन 23 मार्च से चल रहा है अन्ना का आंदोलन

जावेद अख़्तर / आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है. दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रहे अन्ना हजारे के आंदोलन को धीरे-धीरे समाज के दूसरे प्रतिष्ठित लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. इस बीच आज गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के आंदोलन में हिस्सा लेने की संभावना थी, लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वह नहीं आएंगे.

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हार्दिक पटेल ने बताया है कि अन्ना हजारे किसानों और लोकपाल के लिए जो आवाज उठा रहे हैं, मैं उसका समर्थन करता हूं. हार्दिक ने बताया कि उन्होंने अन्ना हजारे से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. हार्दिक ने कहा कि वह रामलीला मैदान नहीं जा रहे हैं. शनिवार को भी हार्दिक के आने की खबरें थीं, लेकिन वो नहीं आ पाए.

दरअसल, 2011 के आंदोलन से सीख लेते हुए अन्ना हजारे ने  इस बार पहले ही साफ कर दिया है कि जो कि उनके साथ इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे वो कभी राजनीति में नहीं जाएंगे. यही वजह है कि अब तक अन्ना के मंच पर राजनीतिक हस्तियां नजर नहीं आई हैं. हालांकि, अन्ना के आंदोलन को 2011 जैसा जन समर्थन मिलता भी दिखाई नहीं दे रहा है. लेकिन देश भर से जुटे हजारों किसान अपनी मांगों पर जोर देने के लिए रामलीला मैदान में नजर आ रहे हैं. 'वाटरमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर राजेंद्र सिंह शनिवार को हजारे से मिलने पहुंचे थे.

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वहीं, हजारे के सहयोगियों ने दावा किया कि भूख हड़ताल के कारण अन्ना हजारे का वजन घट गया है. हजारे किसानों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं और इसके लिए देश के विभिन्न किसान संगठन एकजुट हुए हैं. साथ ही लोकपाल लागू करना भी अन्ना की प्रमुख मांगों है.

-किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्‍यादा दाम मिले.

-खेती पर निर्भर 60 साल से ऊपर उम्र वाले किसानों को प्रतिमाह 5 हजार रुपए पेंशन.

-कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा तथा सम्पूर्ण स्वायत्तता मिले.

-लोकपाल विधेयक पारित हो और लोकपाल कानून तुरंत लागू किया जाए.

-लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 44 और धारा 63 का संशोधन तुरंत रद्द हो.

-हर राज्य में सक्षम लोकायुक्त नियुक्‍त किया जाए.

-चुनाव सुधार के लिए सही निर्णय लिया जाए.

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