रायपुर मेडिकल कॉलेज में 3 बच्चों की मौत, कर्मचारी ने शराब के नशे में बंद किया प्लांट

रायपुर के  सरकारी अस्पताल डॉक्टर भीम राव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से तीन बच्चों की मौत हो गई. ऐसा एक कर्मचारी द्वारा शराब पी कर ऑक्सीजन प्लांट बंद कर देने के कारण हुआ.  इसके बाद हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट ने उस शराबी कर्मचारी को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया. मेडिकल प्रशासन ने इस घटना के जांच के निर्देश दिए है.

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डॉक्टर भीम राव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज डॉक्टर भीम राव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज

सुनील नामदेव

  • रायपुर,
  • 21 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

रायपुर के  सरकारी अस्पताल डॉक्टर भीम राव आंबेडकर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से तीन बच्चों की मौत हो गई. ऐसा एक कर्मचारी द्वारा शराब पी कर ऑक्सीजन प्लांट बंद कर देने के कारण हुआ.  इसके बाद हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट ने उस शराबी कर्मचारी को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया. मेडिकल प्रशासन ने इस घटना के जांच के निर्देश दिए है.

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ऐसे हुआ था हादसा

बताया जा रहा है कि देर रात शराब के नशे में एक कर्मचारी ने ऑक्सीजन प्लांट का एक वॉल्व बंद कर दिया. इससे चाइल्ड वार्ड के 3 वेंटिलेटर प्रभावित हुए. तीनो नहीं मिलने से दम तोड़ दिया. ऑक्सीजन बंद होने से हुई अफरा तफरी में ड्यूटी डॉक्टर को पता लगा कि कोई व्यक्ति शराब के नशे में ऑक्सीजन प्लांट की ओर देखा गया था. मौके की नजाकत को देखते हुए डॉक्टर उस ओर दौड़े और उन्होंने शराबी को अपने कब्जे में लिया. साथ ही ऑक्सीजन वॉल्व ऑन किया. इस घटना की जांच-पड़ताल खुद मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट डॉक्टर विवेक चौधरी ने की है.

कर्मचारी को किया गया पुलिस के हवाले

मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डाक्टर विवेक चौधरी के मुताबिक जिस व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम दिया उसे पुलिस के हवाले किया गया है. उसकी नौकरी भी खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उधर में गहमागहमी मच गई. बच्चो के परिजनों का रो-रो के बुरा हाल हो गया. सरकार ने घटना के जांच के आदेश दिए है. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए  है.

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गौरतलब है कि हाल ही के दिनों में के बीआरडी कॉलेज में इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों की ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत हो गई थी. 11 अगस्त को करीब 30 बच्चों की मौत की सूचना सामने आई थी, जिसके बाद हर दिन मौत का आंकड़ा बढ़ता गया था और करीब 70 बच्चों की मौत हो गई थी. हालांकि, सरकार ने ये दावा किया था कि ऑक्सीजन की कमी के चलते बच्चों की मौत नहीं हुई.

 

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