नक्सल इलाके में ड्यूटी के दौरान पुलिस कैंप में जवान ने खुद को मारी गोली, हुई मौत

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सल प्रभावित इलाके के एक पुलिस कैंप में ड्यूटी के दौरान कांस्टेबल पिंगल जुरी ने खुद को गोली मार ली. गंभीर रूप से घायल जवान की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई. शुरुआती जांच में स्वास्थ्य कारणों से आत्महत्या की आशंका जताई गई है, हालांकि पुलिस विस्तृत जांच कर रही है. पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, बीते सात सालों में राज्य में करीब 190 सुरक्षा कर्मियों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं.

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पुलिसकर्मी ने दी जान. (Photo: Representational ) पुलिसकर्मी ने दी जान. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • नारायणपुर,
  • 25 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक दुखद घटना सामने आई है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान एक पुलिस जवान ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली, जिससे उसकी मौत हो गई. पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को इस घटना की पुष्टि की है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना गुरुवार सुबह कोडनार पुलिस कैंप में हुई, जो कोहकामेटा क्षेत्र में स्थित है. मृतक जवान की पहचान कांस्टेबल पिंगल जुरी के रूप में हुई है. वह उस समय ड्यूटी पर तैनात था, जब उसने अपनी सर्विस राइफल से सिर में गोली मार ली. गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया.

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ड्यूटी के दौरान सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली

घटना के तुरंत बाद साथियों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है. जांच में स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को कारण माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक वजहों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है.

पुलिस ने बताया कि जवान के पारिवारिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की भी जांच की जा रही है. साथी कर्मियों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाए गए हैं. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किन परिस्थितियों में जवान ने यह कठोर कदम उठाया.

अस्पताल ले जाते समय जवान की मौत

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गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में तैनात सुरक्षा बलों पर मानसिक और शारीरिक दबाव अधिक रहता है. लंबे समय तक दुर्गम इलाकों में तैनाती, सीमित संसाधन और लगातार ऑपरेशनों के चलते जवानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, बीते सात सालों में राज्य में करीब 190 सुरक्षा कर्मियों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं. इनमें पारिवारिक तनाव, निजी समस्याएं, शराब की लत और गंभीर बीमारियों जैसे कारण बताए गए हैं. इन मृतकों में छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के साथ-साथ सीआरपीएफ सहित अन्य अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल हैं, जो नक्सल विरोधी अभियानों में बड़े पैमाने पर तैनात रहते हैं.

 

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