WhatsApp डीपी में डायरेक्टर की फोटो लगाई, अकाउंटेंट को झांसे में लेकर उड़ाए 20 लाख रुपए, 6 गिरफ्तार

भिलाई में कंपनी डायरेक्टर की फर्जी व्हाट्सएप डीपी लगाकर 20 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले राजस्थान के अंतर्राज्यीय गिरोह के 6 आरोपियों को दुर्ग पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने अकाउंटेंट को झांसे में लेकर रकम ट्रांसफर कराई थी. पुलिस ने रायपुर से आरोपियों को पकड़कर 1.20 लाख नगद, मोबाइल, एटीएम कार्ड और बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं.

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रायपुर से दबोचे गए ठग.(Photo: Ramesh Kumar/ITG) रायपुर से दबोचे गए ठग.(Photo: Ramesh Kumar/ITG)

रघुनंदन पंडा

  • दुर्ग,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:42 PM IST

छत्तीसगढ़ के भिलाई में कंपनी डायरेक्टर की फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल के जरिए 20 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले राजस्थान के अंतर्राज्यीय गिरोह का दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने बीकानेर और जोधपुर निवासी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है. आरोपियों के कब्जे से नगदी, मोबाइल, एटीएम कार्ड, बैंक दस्तावेज समेत अन्य सामान जब्त किया गया है.

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मामले में भिलाई के सुंदर नगर में रहने वाले प्रार्थी यश बत्रा ने थाना सुपेला में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से अज्ञात आरोपियों ने कंपनी डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो लगाकर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाई और विश्वास में लेकर एचडीएफसी बैंक खाते में 20 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए.

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कंपनी के तीनों डायरेक्टरों के बीच राशि लेनदेन के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित था. अलग-अलग ब्रांचों की आवश्यकता अनुसार रकम भेजने के लिए ग्रुप में संदेश डाले जाते थे. किसी डायरेक्टर की स्वीकृति मिलने पर अकाउंटेंट राशि ट्रांसफर करता था. आरोपियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए फर्जी डीपी और मैसेज के जरिए ठगी को अंजाम दिया.

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जंगी ऐप और टोकन सिस्टम से करते थे ठगी

दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना सुपेला और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए. जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाकर और खाता धारकों को कमीशन का लालच देकर साइबर ठगी करते थे. इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर नकद निकासी की जाती थी.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप और जंगी ऐप के माध्यम से संपर्क कर “टोकन सिस्टम” से रुपए का लेनदेन करते थे. पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी रायपुर के तनिष्क होटल राठौर चौक में रुके हुए हैं. पुलिस की भनक लगते ही आरोपी लगातार ठिकाने बदलने लगे और रायपुर में किराए के मकान तलाश रहे थे.

तकनीकी निगरानी, संदिग्ध बैंक खातों के विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी पंकज शर्मा सहित कुछ आरोपियों को रायपुर के जय स्तंभ चौक के पास से गिरफ्तार किया. अन्य आरोपियों को बूढ़ा तालाब क्षेत्र के पास किराए के मकानों से पकड़ा गया.

1.20 लाख नगद समेत कई दस्तावेज जब्त

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे राजस्थान से आकर अलग-अलग शहरों में होटल और किराए के मकानों में रहकर साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे. गिरफ्तार आरोपियों में मुरली जनागल, गोपाल सोनी, मोती सिंह, मोतीलाल शर्मा, बनवारी शर्मा और मुख्य आरोपी पंकज शर्मा शामिल हैं.

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दुर्ग पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपए नगद, 6 मोबाइल, 10 डेबिट कार्ड, पेन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम, डिपॉजिट स्लिप और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं.

नगर पुलिस अधीक्षक सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपियों ने यश बत्रा के पिता की फर्जी डीपी लगाकर अकाउंटेंट से संपर्क किया था. पहली बार 20 लाख रुपए ट्रांसफर कराने के बाद आरोपियों ने 48 लाख रुपए की और मांग की, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ. पुलिस ने हेल्पलाइन 1930 की मदद से करीब सवा चार लाख रुपए होल्ड करवाए हैं.

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