बिहार: दरभंगा में उड़ रही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां, ऐसा है राहत कैंपों का हाल

पुलिस मौके पर मौजूद होती है लेकिन मजदूरों की ज्यादा भीड़ के सामने वह भी मजबूर नजर आती है. लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर बस में चढ़ना तो दूर एक-दूसरे से रगड़ खाते नजर आते हैं. इतना ही नहीं, दरभंगा के MLSM कॉलेज के अंदर भी साफ देखा जा सकता है कि प्रवासी लोगों की भीड़ कितनी ज्यादा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रह्लाद कुमार

  • दरभंगा,
  • 28 मई 2020,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST
  • दरभंगा में सोशल डिस्टेंसिंग का उड़ रहा मजाक
  • तेजी से बढ़ रही है कोरोना मरीजों की तादाद

प्रवासी मजदूरों के लगातार बिहार आने से कोरोना मरीजों की तादाद भी तेजी से बढ़ती जा रही है. इसके बावजूद इन मजदूरों के बीच बिहार के दरभंगा में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. जबकि सभी जगह पुलिस और प्रशासन के लोग मौजूद हैं.  दरभंगा रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाले सभी प्रवासी मजदूरों को पहले पास में बनाए गए राहत कैंप में लाया जाता है, जहां प्रवासी मजदूर के खाने-पीने का इंतजाम है. इसके बाद इन मजदूरों को बसों के माध्यम से दरभंगा के अलग-अलग प्रखंडों में भेजा जाता है लेकिन बस में चढ़ते समय ये सभी मजदूर पुलिस प्रशासन के सामने सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं.

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पुलिस मौके पर मौजूद होती है लेकिन मजदूरों की ज्यादा भीड़ के सामने वह भी मजबूर नजर आती है. लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर बस में चढ़ना तो दूर एक-दूसरे से रगड़ खाते नजर आते हैं. इतना ही नहीं, दरभंगा के MLSM कॉलेज के अंदर भी साफ देखा जा सकता है कि प्रवासी लोगों की भीड़ कितनी ज्यादा है. लोग एक-दूसरे के काफी पास रहते हैं. ऐसे में कोरोना से बचाव का एक मात्र उपाय सोशल डिस्टेंसिंग सिर्फ बनावटी नजर आता है. इस पर अमल होता तो नहीं दिखाई देता. 


प्रवासी लोगों की हरकत और सरकारी व्यवस्था पर वार्ड नंबर 13 की पार्षद निशा कुमारी खुद परेशान हैं. उनकी मानें तो यहां कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होता है, जिससे मोहल्ले के लोगों में डर का माहौल है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बस से मजदूरों को लाया और भेजा जाता है उसे भी सैनिटाइज नहीं किया जाता है. सैनिटाइजेशन के नाम पर एक दो बसों को दिखाने के लिए सैनिटाइज किया जाता है.

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उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जितनी यहां बसें लगी होती हैं सभी का इस्तेमाल भी नहीं होता बल्कि मात्र 10% बसों का इस्तेमाल किया जाता है और सिर्फ बिल बनाने और गड़बड़ झाला के लिए यह बसें लगाकर रखी जाती हैं. बता दें कि बिहार में कोरोना पोजेटिव का आंकड़ा 3 हजार पार कर चुका है.

 

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