'बिहार कांग्रेस को टूटने से बचाने के लिए पकड़ सकता हूं विधायकों के पैर'

बिहार में महागठबंधन के बिखरने के बाद से ही यह खबर आने लगी थी कि अब बिहार कांग्रेस में भी टूट हो सकती है. कांग्रेस के कुल 27 विधायकों में से 18 टूट के लिए तैयार हैं. बिहार कांग्रेस की इन खबरों से कांग्रेस आलाकमान के कान भी खड़े हो गए.

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राहुल गांधी राहुल गांधी

सुजीत झा

  • पटना,
  • 27 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

बिहार कांग्रेस टूट को लेकर इतनी भयभीत है कि वो विधायकों का पैर पकडने के लिए भी तैयार है. पटना में बिहार कांग्रेस के अस्थायी अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा कि जितने लोग आज कांग्रेस में है, उनसे अपील करूंगा कि वो पार्टी में ही रहें. उन्होंने कहा कि इसके लिए अगर जरूरत पड़ेगी और उनके पैर भी पकड़ना पड़ेगा, तो मैं वो भी करूंगा.

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बिहार में महागठबंधन के बिखरने के बाद से ही यह खबर आने लगी थी कि अब बिहार कांग्रेस में भी टूट हो सकती है. कांग्रेस के कुल 27 विधायकों में से 18 टूट के लिए तैयार हैं. बिहार कांग्रेस की इन खबरों से कांग्रेस आलाकमान के कान भी खड़े हो गए. कुछ विधायकों ने टूट की पूरी जानकारी आलाकमान तक पहुंचाई. बताया गया कि टूट के अगुवा और कोई नहीं कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक चौधरी हैं. मामले की जानकारी के बाद आलाकामन ने इसकी टोह लेनी शुरू की. इसके बाद से अशोक चौधरी आलाकमान के गुड बुक से बैड बुक में चले गए.

वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया. दो दिनों में कुल 27 में से 20 विधायक राहुल गांधी से मिलने दिल्ली पहुंचे. सबसे वन-टू-वन बातचीत हुई. इस बीच कुछ बातें छनकर सामने आईं. आलाकमान ने यह तय कर लिया कि अशोक चौधरी को अध्यक्ष पद से हटाना है, लेकिन अगला अध्यक्ष कौन बनेगा....इसको लेकर उहापोह की स्थिति थी. इस स्थिति को टालने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष कादरी को अस्थायी अध्यक्ष बना दिया है.

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कादरी कितने दिन अध्यक्ष रहेंगे, यह कहना मुश्किल है. यह भी हो सकता है कि वो इस पद पर दो या चार दिन ही रहें. माना जा रहा है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता अखिलेश सिंह को अगला अध्यक्ष बनाया जा सकता है. कि एक खास व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है. अशोक चौधरी शुरू से ही अखिलेश सिंह के विरोध में रहे हैं.

हांलाकि यह जानता है कि अखिलेश सिंह के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस में टूट की आशंका यकीन में बदल सकती है. लिहाजा वो कुछ और नाम पर विचार कर सकता है. अगर कांग्रेस 2019 को ध्यान में रखकर रणनीति बनाती है, तो बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सीनियर बना सकती है या फिर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष को मौका दे सकती है.

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