आजकल सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाता है कि प्लास्टिक की बोतल में रखा पानी पीने से कैंसर हो सकता है. ऐसे दावों से कई लोग चिंतित हो जाते हैं, लेकिन क्या रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की बोतलें कैंसर का कारण बन सकती हैं. क्या यह सेहत के लिए खतरनाक हैं. इस बारे में कैंसर का इलाज करने वाले डॉक्टर की क्या राय है. यह जानने के लिए हमने उनसे बातचीत की है. लेकिन पहले जान लेते हैं कि प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने में कैंसर होने का रिस्क क्यों बताया जाता है.
ऐसा माना जाता है कि अगर प्लास्टिक की कोई बोतल लंबे समय तक गर्मी में रखी है तो उनमें मौजूद बीपीए केमिकल के निकलने की आशंका बढ़ सकती है. बीते कुछ सालों मं माइक्रोप्लास्टिक भी चिंता का विषय बने हुए हैं. शरीर के कई अंगों से लेकर खून तक में इनकी मौजूदगी मिली है. चूंकि यह बेहद छोटे प्लास्टिक कण पानी में मिल सकते हैं. जिससे इनके शरीर में जाने की आशंका रहती है, चूंकि बीपीए केमिकल को कैंसर कारक माना जाता है. इसी वजह से यह सवाल उठता है कि क्या प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर हो सकता है?
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस बारे में जानने के लिए आजतक. इन ने गाजियाबाद के मैक्स हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. रोहित कपूर से बातचीत की है. डॉ रोहित बताते हैं कि अब तक हुई ज्यादातर रिसर्च प्रयोगशाला और जानवरों पर आधारित रही हैं. इनमें इन रसायनों और माइक्रोप्लास्टिक के कुछ प्रभाव जरूर देखे गए हैं, लेकिन इंसानों में यह साबित नहीं हो पाया है कि प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने और कैंसर होने के बीच सीधा संबंध है. इसलिए इस विषय पर और अधिक शोध की जरूरत हैं. लेकिन फिर भी कोशिश करें कि प्लास्टिक की बोतल में पानी न पीएं और अगर पीना पड़ रहा है तो कुछ बातों का ध्यान रखें.
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प्लास्टिक की बोतल में पानी पी रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
प्लास्टिक की बोतलों को धूप या गर्म कार में लंबे समय तक न छोड़ें. अगर बोतल पर दरार पड़ गई है, उसका रंग बदल गया है या वह बहुत पुरानी हो चुकी है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल न करें. जहां संभव हो, पानी पीने के लिए स्टेनलेस स्टील या कांच की बोतलों का इस्तेमाल करें.
डॉ रोहित कहते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक और प्लास्टिक से जुड़े केमिकल पर रिसर्च अभी जारी है, लेकिन सावधानी बरतना फिर भी जरूरी है. इसलिए प्लास्टिक की बोतल में अगर पानी मजबूरी में पीना भी पड़ रहा है तो उसको एक दो बार से ज्यादा यूज न करें.
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