न तोप-गोले न बॉर्डर क्रास करने की जरूरत... बदलती दुनिया में युद्धों की तस्वीर कैसे बदल रहे हैं ड्रोन

ड्रोन ने युद्ध की प्रकृति को बदल दिया है. ये बिना सैनिकों को खतरे में डाले सीमाओं के पार हमले कर सकते हैं. ड्रोन से संबंधित डेटा और विश्लेषण करने वाली वेबसाइट dronewars.net के अनुसार, तुर्की ने 2021 के बाद से कम से कम 28 देशों को सशस्त्र MALE ड्रोन की आपूर्ति की है, जो चीन (14), अमेरिका (6) और ईरान (3) की संयुक्त आपूर्ति से अधिक है.

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ड्रोन के कारण युद्धों का चेहरा बदल रहा है ड्रोन के कारण युद्धों का चेहरा बदल रहा है

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2025,
  • अपडेटेड 10:42 PM IST

हर रोज बदलती जा रही है दुनिया में ग्लोबल वॉर के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं. अब बिना सैनिकों को सीमा पार भेजे, 48 देश सशस्त्र ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं. ये ड्रोन निगरानी करने, लंबे समय तक उड़ान भरने और सटीक हमले करने में सक्षम हैं. मध्यम ऊंचाई, लंबी अवधि (MALE) वाले ड्रोन, जैसे अमेरिका का MQ-9 रीपर और तुर्की का बायकार टीबी2, अब वैश्विक युद्ध का केंद्र बन गए हैं. तुर्की ने इस क्षेत्र में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा सशस्त्र ड्रोन निर्यातक बनने का गौरव हासिल किया है.

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क्यों है यह महत्वपूर्ण?
ड्रोन ने युद्ध की प्रकृति को बदल दिया है. ये बिना सैनिकों को खतरे में डाले सीमाओं के पार हमले कर सकते हैं. ड्रोन से संबंधित डेटा और विश्लेषण करने वाली वेबसाइट dronewars.net के अनुसार, तुर्की ने 2021 के बाद से कम से कम 28 देशों को सशस्त्र MALE ड्रोन की आपूर्ति की है, जो चीन (14), अमेरिका (6) और ईरान (3) की संयुक्त आपूर्ति से अधिक है. तुर्की का बायकार टीबी2 ड्रोन अब यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और मध्य एशिया में संचालित हो रहा है. यह वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव का संकेत है, जहां पारंपरिक पश्चिमी प्रभुत्व कम हो रहा है और नए क्षेत्रीय शक्तियां युद्ध के तरीकों को आकार दे रही हैं.

MALE ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है. ये ड्रोन 24 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सकते हैं और सटीक हमले कर सकते हैं. बायकार टीबी2, विंग लूंग और MQ-9 रीपर जैसे ड्रोन अब केवल बड़े देशों तक सीमित नहीं हैं. मार्च 2025 तक, 48 देशों ने सशस्त्र MALE ड्रोन हासिल कर लिए. जहां अमेरिका (2001) और इज़राइल (2004) जैसे शुरुआती देशों ने अपने सिस्टम विकसित किए, वहीं अधिकांश देश आयात पर निर्भर हैं.

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2021 के बाद तुर्की ने केन्या, बांग्लादेश और कोसोवो जैसे पहली बार ड्रोन संचालित करने वाले देशों सहित 28 देशों को ड्रोन की आपूर्ति की. चीन ने मुख्य रूप से अफ्रीका और मध्य पूर्व के 14 देशों को ड्रोन निर्यात किए. केवल कुछ देश- जैसे ईरान, इज़राइल, चीन, तुर्की और अमेरिका ने स्वदेशी MALE ड्रोन विकसित किए हैं. बाकी देश पूरी तरह से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर हैं. यूक्रेन, मोरक्को और इथियोपिया जैसे कई देश विभिन्न स्रोतों से ड्रोन का उपयोग करते हैं, जो मिश्रित इन्वेंट्री की ओर बदलाव को दर्शाता है.

तुर्की की बढ़ती ताकत
तुर्की न केवल ड्रोन आपूर्तिकर्ता के रूप में, बल्कि सैन्य नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी बन गया है. 2025 की शुरुआत में, तुर्की के टीबी3 ड्रोन ने देश के पहले विमानवाहक पोत टीसीजी अनादोलु से सफलतापूर्वक उड़ान भरी और उतरा. नाटो तुर्की को एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार मानता है, खासकर रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच. सशस्त्र ड्रोन का प्रसार न केवल हार्डवेयर में वृद्धि दर्शाता है, बल्कि सैन्य रणनीति में भी बदलाव को रेखांकित करता है, जहां ड्रोन आधुनिक युद्ध के अभिन्न अंग बन गए हैं.

 

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