इस फिल्म को लेकर पागलपन ऐसा कि पुलिस ने की भीड़ कंट्रोल, जानिए आलम आरा के बारे में खास बातें

ये फिल्म मुंबई के मेजेस्टिक सिनेमा में रिलीज़ हुई थी. उस दौर में सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखना बहुत सामान्य बात नहीं थी लेकिन इस फिल्म को देखने के लिए इतनी पब्लिक इकट्ठा हो गई थी कि पुलिस को आकर भीड़ को कंट्रोल करना पड़ा था.

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आलम आरा आलम आरा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 11:26 PM IST

भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' 88 साल पहले आज ही के दिन रिलीज़ हुई थी. राजा हरीशचंद्र ने साल 1913 में फिल्म 'दादा साहेब फाल्के' के साथ ही भारत में सिनेमा की शुरुआत की थी और साल 1931 में फिल्म आलम आरा के साथ पहली बोलती फिल्म देश में रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म को अर्देशीर ईरानी ने डायरेक्ट किया था.

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जानिए इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें

ये फिल्म ना केवल भारत की पहली बोलती फिल्म थी बल्कि इस फिल्म के साथ ही भारत को पहला प्लेबैक सिंगर भी मिला था जिनका नाम वजीर मोहम्मद खान था. उन्होंने इस फिल्म में एक्टिंग भी की थी. इस फिल्म का पहला गाना 'दे दे खुदा के नाम पे' हिट साबित हुआ था और इसे भारतीय सिनेमा का पहला सॉन्ग माना जाता है. इस फिल्म में 8 गाने थे.

ये फिल्म मुंबई के मेजेस्टिक सिनेमा में रिलीज़ हुई थी. उस दौर में सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखना बहुत सामान्य बात नहीं थी लेकिन इस फिल्म को देखने के लिए इतनी पब्लिक इकट्ठा हो गई थी कि पुलिस को आकर भीड़ को कंट्रोल करना पड़ा था. ये फिल्म सिनेमाघरों में 8 हफ्तों तक टिकी रही थी.

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भारत में थियेटर के जनक कहलाने वाले पृथ्वीराज कपूर, आलम आरा में काम करने से पहले  9 फिल्मों में काम कर चुके थे. पृथ्वीराज कपूर रणबीर कपूर के परदादा हैं.

ये फिल्म एक पारसी प्ले पर आधारित थी. इसे जोसेफ डेविड ने लिखा था. इसके अलावा ये कुछ हद तक 1929 में आई अमेरिकन मोशन पिक्चर 'शोबोट' से भी प्रभावित थी.इस फिल्म में कुल 78 एक्टर्स थे जिन्होंने पहली बार फिल्म के लिए अपनी आवाज़ को रिकॉर्ड कराया था.

 मार्च 14, 2011 यानि आलम आरा की 80वीं सालगिरह पर गूगल ने इस फिल्म के लिए एक खास डूडल डेडिकेट किया था. इसके चार सालों बाद एक कैलेंडर को भी रिलीज किया गया था जिसमें देश की कई मायनों में पहली फिल्मों की तस्वीरें शामिल थी. इस लिस्ट में आलम आरा का नाम भी शामिल था.

अर्देशीर ईरानी द्वारा निर्देशित ये फिल्म भले ही भारत के सिनेमाई इतिहास में मील के पत्थर के तौर पर देखी जाती हो लेकिन आज इस फिल्म की एक भी कॉपी मौजूद नहीं है. नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया के पास इस फिल्म का एक भी प्रिंट मौजूद नहीं है.

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