गांधी को व्हिस्की पीते नहीं दिखा सकते? सुप्रीम कोर्ट में ऐसे हुई पद्मावत पर बहस

पद्मावत को कई राज्यों में बैन किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है. सेंसर बोर्ड की ओर से फिल्म पास किए जाने के बाद कुछ राज्यों ने इसे बैन किया गया है, इसे चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की बेंच ने असंवैधानिक करार दिया. इस पर सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प बहस हुई.

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पद्मावत पद्मावत

महेन्द्र गुप्ता / अनुषा सोनी

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

पद्मावत को कई राज्यों में बैन किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है. सेंसर बोर्ड की ओर से फिल्म पास किए जाने के बाद कुछ राज्यों ने इसे बैन किया गया है, इसे चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की बेंच ने असंवैधानिक करार दिया.

पद्मावत पर लगे इतिहास से छेड़छाड के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में जमकर बहस हुई. एक ओर एएसजी तुषार मेहता ने राज्यों के बैन को जायज ठहराया, वहीं दूसरी ओर जाने माने वकील हरीश साल्वे ने पद्मावत के पक्ष में दलील दीं. बहस के दौरान गांधी का जिक्र भी आया.

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जब आई गांधी और शराब की बात

राज्यों की तरफ से पेश हुए ASG तुषार मेहता ने कहा, इस फ़िल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है. इस पर हरीश साल्वे ने फिल्म में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को कोर्ट के सामने पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया है 'यह एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है', इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं.

साल्वे ने तो कोर्ट में यहां तक कहा 'एक दिन मैं चाहूंगा कि मैं इस बात पर दलील दूं कि कलाकारों को इतिहास से छेड़छाड़ का अधिकार भी होना चाहिए.' इस पर तुषार मेहता ने कहा 'ऐसा नहीं हो सकता. आप महात्मा गांधी को विस्की पीते नहीं दिखा सकते.' इस पर साल्वे ने कहा, 'लेकिन यह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी.' इस पर कोर्ट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े.

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बता दें कि गुरुवार को चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की बेंच ने पद्मावत पर चार राज्यों के बैन को असंवैधानिक करार देते हुए कहा, क़ानून व्यवस्था बनाना राज्यों की जिम्मेदारी है. यह राज्यों का संवैधानिक दायित्व है. फिल्म पर बैन लगाना, संविधान की आर्टिकल 21 के तहत लोगों को जीवन जीने और स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है. बेंच ने राज्यों के नोटिफिकेशन को गलत बताया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस नोटिफिकेशन से आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले अधिकारों का हनन होता है. राज्यों की यह भी जिम्मेदारी है कि फिल्म देखने जाने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल मिले. इससे पहले अटार्नी जनरल ने राज्यों का पक्ष रखने के लिए सोमवार का वक्त मांगा. लेकिन कोर्ट ने पहले ही फैसला दे दिया.

#पद्मावत पर साल्वे ने पेश की दलील

इससे पहले निर्माताओं का पक्ष रखते हुए साल्वे ने कहा, राज्यों का पाबंदी लगाना सिनेमैटोग्राफी एक्ट के तहत संघीय ढांचे को तबाह करना है. राज्यों को इस तरह का कोई हक नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि लॉ एंड आर्डर की आड़ में राजनीतिक नफा नुकसान का खेल हो रहा है. बता दें कि वायकॉम 18 ने याचिका दायर कर चार राज्यों के बैन का विरोध किया था. उम्मीद है कि प्रतिबंध लगाने वाले चार राज्य सोमवार को अपना पक्ष रखें.

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#24 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म

पद्मावत के निर्माता देशभर के सिनेमाघरों में 24 जनवरी को इसका पेड प्रीव्यू रखेंगे. ‘पद्मावत’ के डिस्ट्रीब्यूटर्स 24 जनवरी की रात 9.30 बजे स्क्रीन होने वाले शोज का भुगतान करके उसकी जगह ‘पद्मावत’ को स्क्रीन करेंगे. फिल्म एक्सपर्ट की राय में ऐसा करने से ‘पद्मावत’ के मेकर्स को फिल्म को लेकर चल रही अफवाह को गलत साबित करने का मौका मिलेगा. साथ ही, फिल्म देखने के बाद लोगों की पॉजिटिव रिस्पोंस फिल्म के लिए फायदेमंद होगा.

देश के चार राज्यों ने लगाया था बैन फिल्म

मंगलवार को हरियाणा सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने का फैसला लिया था. रणवीर, दीपिका, शाहिद कपूर स्टारर इस फिल्म के प्रदर्शन पर हरियाणा से पहले राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सरकारों ने भी बैन लगा दिया था.

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