पद्मावती पर रोक के लिए दिल्ली HC में याचिका, 20 नवंबर को सुनवाई

पद्मावती की रिलीज रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि रानी पद्मिनी से जुड़े तथ्यों के साथ फिल्म में छेड़छाड़ की गई है.

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पद्मावती पोस्टर पद्मावती पोस्टर

महेन्द्र गुप्ता / पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:03 AM IST

अपनी रिलीज से पहले ही कई विवादों में फंस चुकी संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इसमें रानी पद्मिनी से जुड़े तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है, साथ ही उनकी छवि को खराब करने की कोशिश हुई है.

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इस जनहित याचिका में सेंसर बोर्ड को कमेटी बनाकर आपत्तिजनक सीन हटाने का आग्रह किया गया है. यह याचिका अखंड राष्ट्रवादी पार्टी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई गई है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिजली की गलत नजर रानी पद्मिनी पर जब पड़ी तो पद्मिनी ने उस वक्त 16000 अन्य महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था. उनका चरित्र महान था और वह आज भी हमारी आन-बान-शान है.

फिल्म में न सिर्फ इतिहास को मनगढ़ंत तरीके से पेश करने की केस कोशिश की गई है, बल्कि रानी पद्मिनी के चरित्र को भी बदल कर पेश किया गया. इससे उनकी प्रतिष्ठा खराब हुई है और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है.

इस जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई कर सकता है. हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इसी तरह की एक याचिका पर फल में हस्तक्षेप करने से इंकार कर चुका है. ऐसे में सोमवार को होने वाली सुनवाई में तय होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट का इस याचिका पर क्या रुख रहता है.

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बता दें कि फिल्म पद्मावती करणी सेना सहित कई संगठनों के निशाने पर है. फिल्म की रिलीज रोकने को लेकर धमकियां तक दी जा रही हैं. फिल्म पर मौजूदा गतिरोध को लेकर इंडियन फिल्म्स एंड टीवी डायरेक्टर्स असोसिएशन के कन्विनर अशोक पंडित ने 'सांस्कृतिक आतंकवाद' कहा है.

एक इंटरव्यू में अशोक पंडित ने कहा, 'पूरी फिल्म इंडस्ट्री इस वक्त निशाने पर है. हमारे ऊपर हमले हो रहे हैं, हमें मारा जा रहा है, गालियां दी जा रही हैं. हम क्रिएटिव लोगों को धमकियां मिल रही हैं लेकिन ये तो हम तय करेंगे कि हमें क्या बनाना है या नहीं. इस तरह की स्थिति सांस्कृतिक आतंकवाद है'

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