Fanney Khan Review: अनिल-राजकुमार की दमदार एक्टिंग, कमजोर कहानी

थियेटर्स में इस शुक्रवार अनिल कपूर, राजकुमार राव और ऐश्वर्या राय के अभिनय से सजी फिल्म फन्ने खां (Fanney Khan) रिलीज हुई है. जानते हैं ये फिल्म कैसी बनी है?

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फन्ने खां का पोस्टर फन्ने खां का पोस्टर

हंसा कोरंगा / आरजे आलोक

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

फिल्म का नाम: फन्ने खां

डायरेक्टर: अतुल मांजरेकर 

स्टारकास्ट: अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन, राजकुमार राव, दिव्या दत्ता, पीहू संद, करन सिंह छाबरा

अवधि: 2 घंटा 11 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 2.5 स्टार

डायरेक्टर अतुल मांजरेकर ने लगभग 11 साल तक निर्माता निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा को असिस्ट किया है. अब राकेश ने अतुल को फन्ने खां डायरेक्ट करने का मौका दिया, जिसकी स्क्रिप्ट पर काफी समय से काम चल रहा था. बेल्जियम की फिल्म 'एवेरीबडी इज फेमस' से प्रेरित यह हिंदी फिल्म है. जिसमें अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन और राजकुमार दिखेंगे. आखिरकार कैसी बनी है फिल्म, आइए समीक्षा करते हैं..

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कहानी

फिल्म की कहानी टैक्सी ड्राइवर प्रशांत उर्फ़ फन्ने खां (अनिल कपूर) की है. फन्ने को ओर्केस्ट्रा में गाने का बड़ा शौक है. लेकिन घर की जरूरतों की वजह से वो कभी भी बड़ा सिंगर नहीं बन पाता और मिल में काम करने लगता है. उसके घर में उसकी बीवी (दिव्या दत्ता) और बेटी लता (पीहू संद) रहते हैं. फन्ने की चाहत थी की वो मोहम्मद रफी जैसा सिंगर बने. लेकिन ऐसा  हो नहीं पाता है. पर जब उसके घर में बेटी होती है, तो फन्ने एक कसम खाता है कि वो अपनी बेटी को लता मंगेशकर जैसा सिंगर जरूर बनाएगा. यही कारण है कि वो बेटी का नाम लता रखता है. लता को सब उसके मोटापे की वजह से चिढ़ाते हैं. इसी बीच कहानी में ट्विस्ट तब आता है. जब फन्ने, अधीर (राजकुमार राव) मिलकर मशहूर सिंगर बेबी (ऐश्वर्या राय बच्चन) को किडनैप करता है. क्या फन्ने अपना सपना पूरा कर पायेगा? उसे क्या क्या झेलना पड़ता है, ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी. 

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जानिए आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं

अनिल कपूर ने पिता के रूप में बेहतरीन काम किया है. इमोशन के साथ उनकी परिवार और बाकी किरदारों के साथ केमिस्ट्री सटीक जाती है. ऐश्वर्या राय बच्चन का ठीक ठाक रोल है. राजकुमार राव सरप्राइज पैकेज हैं, जो अपनी मौजूदगी बखूबी दर्ज कराते हैं. फिल्म में अनिल की बेटी के रूप में पीहू संद ने बढ़िया अभिनय किया है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बढ़िया है. अच्छी बात ये है कि ज्यादातर रीयल लोकेशंस पर शूटिंग की गयी है. फिल्म का संगीत भी ठीक ठाक है.

कमजोर कड़ियां

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है, जो बहुत ही बढ़िया बनायी जा सकती थी. फिल्म की सोच और वन लाइनर बढ़िया हैं. लेकिन स्क्रीनप्ले कमजोर पड़ गया. अनिल कपूर, राजकुमार राव जैसे बेहतरीन एक्टर्स की मौजूदगी के बावजूद भी फिल्म बहुत औसत दिखाई पड़ती है. खास तौर से क्लाइमेक्स कमजोर है. बाप-बेटी के रिश्ते को भी काफी हल्का दिखाया गया है. जबकि वो इस फिल्म की जान है. एक बहुत अच्छी फिल्म बनायी जा सकती थी, लेकिन वो औसत ही रह गयी.

बॉक्स ऑफिस 

फिल्म का बजट लगभग 30 करोड़ है और इसे लगभग 1000 स्क्रीन्स में रिलीज किया गया है. देखना खास होगा कि अनिल कपूर और ऐश्वर्या राय जैसे सितारे कितने दर्शकों को इस औसत कहानी की ओर खींच पाते हैं. 

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