सेंसर बोर्ड से नाराज पहलाज निहलानी बोले, मैं अनुराग कश्यप की खुशी समझता हूं

पहलाज निहलानी ने सेंसर बोर्ड को एक कंफ्यूज्ड ऑर्गेनाइजेशन बताया है. उन्होंने कहा कि वे पाखंडी नहीं, प्रेक्टकिल इंसान हैं. 

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Anurag kashyap and Pahlaj Nihalani Anurag kashyap and Pahlaj Nihalani

महेन्द्र गुप्ता

  • नई दिल्‍ली,
  • 16 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

हाल ही में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए गए पहलाज निहलानी ने अनुराग कश्यप के बारे में कहा, ' मैं समझ सकता हूं कि सेंसर बोर्ड से मेरे जाने से अनुराग कितने खुश होंगे. उन्होंने खुलेआम मेरे खि‍लाफ कैंपेन चलाया था. उनकी मेरे प्रति घृणा छिपी नहीं है. बता दें कि अनुराग का निहलानी से विवाद तब शुरू हुआ था, जब उनकी फिल्म 'उड़ता पंजाब' को सर्टिफिकेट देने से सेंसर बोर्ड ने इंकार कर दिया था.

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लगातार विवादों को देखते हुए हाल ही में पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाया गया है. उनकी जगह गीतकार प्रसून जोशी को बोर्ड का नया अध्यक्ष बनाया गया है. खुद को हटाए जाने से नाराज निहलानी ने कहा है कि सेंसर बोर्ड एक कंफ्यूज्ड ऑर्गेनाइजेशन है, जिसकी गाइडलाइन यह कतई नहीं कहती कि फिल्म में कट नहीं लगाए जा सकते.

बता दें कि हाल ही में निहलानी ने शाहरुख खान की फिल्म जब हैरी मेट सेजल में से इंटरकोर्स शब्द हटाने का आदेश दिया था. जबकि इसी शब्द को बंगाली फिल्म धनंजय में इस्तेमाल की इजाजत दे दी गई थी.

निहलानी ने कहा, 'मैं पाखंडी नहीं हूं, लेकिन प्रेक्ट‍िकल जरूर हूं. मुझे इंटरकोर्स शब्द से कोई समस्या नहीं थी. इसे बंगाली फिल्म धनंजय में मंजूर किया गया था. लेकिन मैं जानता हूं कि शाहरुख खान के फैन बच्चे भी हैं और उनके पैरेंट्स नहीं चाहेंगे कि वे फिल्म 'जब हैरी मेट सेजल' में इंटरकोर्स शब्द के बारे में पूछे. यह बात स्पष्ट है कि सेंसर बोर्ड की गाइडलाइन में यह कहीं नहीं कहा गया है कि फिल्म में कट नहीं लगाने चाहिए. मुझ पर इस बात के लिए दबाव बनाया गया था कि मैं फिल्म में कट न लगाऊं, सिर्फ इसे सर्टिफिकेट दूं. सीबीएफसी पूरी तरह से भ्रमित संस्था है. हमें प्रोग्रेसिव गाइडलाइन की जरूरत है.'

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