आदित्य रॉय कपूर और दिशा पाटनी स्टारर फिल्म मलंग को गोवा सरकार की तीखी आलोचना झेलनी पड़ी है. गोवा के सीएम ने कहा है कि इस फिल्म में गोवा की छवि को गलत ढंग से पेश करने की कोशिश की गई है और आगे से वे फिल्मों को गोवा में शूटिंग करने से पहले उन्हें रिव्यू कराएंगे. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब सरकार या सेंसर के चलते किसी फिल्म को प्रभावित होना पड़ा हो. जानते हैं ऐसी ही फिल्मों के बारे में.
अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित उनकी डेब्यू फिल्म पांच 2003 में रिलीज के लिए तैयार थी लेकिन फिल्म के डार्क कंटेंट और ड्रग्स एब्यूज के चलते इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने रोक दिया था. इसके कुछ समय बाद काफी कट्स के बाद सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को क्लियर किया था लेकिन प्रोड्यूसर की कुछ दिक्कतों के कारण ये फिल्म कभी रिलीज नहीं हो पाई.
आंधी
साल 1975 में बनी संजीव कुमार और सुचित्रा सेन स्टारर फिल्म आंधी के बारे में अफवाह थी कि ये उस दौर में इंदिरा गांधी की जिंदगी पर आधारित थी लेकिन फिल्म में केवल एक्ट्रेस इंदिरा गांधी के हेयरस्टाइल को कॉपी किया गया था. इस फिल्म को उस दौर में इंदिरा गांधी सरकार ने बैन कर दिया था. इसके बाद इमरजेंसी के दौर में भी ये बैन बरकरार रहा. हालांकि इंदिरा गांधी के सत्ता से बाहर होने के बाद 1977 में इस फिल्म को जनता पार्टी ने रिलीज किया था.
ब्लैक फ्राइडे
अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ्राइडे मुंबई बम धमाकों पर आधारित है. इस फिल्म में कई राजनेताओं के नाम लिए गए थे और दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन और याकूब मेमन के रोल निभाते हुए कलाकार दिखे थे. बेहद विवादित होने के चलते इस फिल्म को तीन सालों के लिए बैन कर दिया गया था. ये फिल्म कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीन हुई थी और भारत में भी साल 2005 में रिलीज होने वाली थी. लेकिन मुंबई ब्लास्ट से जुड़े एक शख्स द्वारा पिटीशन डालने के बाद मुंबई हाईकोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी. हालांकि मुंबई बम ब्लास्ट केस में फैसला आने और 20 महीने बैन झेलने के बाद साल 2007 में फिल्म को रिलीज कर दिया गया था.
फायर
शबाना आजमी और नंदिता दास स्टारर ये फिल्म नवंबर 1998 में रिलीज हुई थी. लेस्बियन रिलेशनशिप पर आधारित इस फिल्म की रिलीज के तीसरे हफ्ते में कई शिवसैनिकों और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने देश भर के सिनेमाघरों में तोड़फोड़ की थी और इस फिल्म की स्क्रीनिंग पर आपत्ति जताई थी जिसके बाद दिलीप कुमार और महेश भट्ट जैसे सितारों ने इस फिल्म की स्क्रीनिंग को प्रोटेक्शन देने की मांग की थी. इसके बाद दीपा मेहता ने उनकी फिल्म की स्क्रीनिंग ना होने देने के खिलाफ कैंडल लाइट प्रोटेस्ट भी दिल्ली में किया था. 18 दिसंबर को एक बार फिर फिल्म रिलीज हुई तो बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं ने कानपुर के एक थियेटर में तोड़फोड़ की जबकि पुलिस द्वारा प्रोटेक्शन का आश्वासन दिया गया था. इसके बाद इस फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा कई कट लगाने के बाद 1999 में री-रिलीज किया गया था.
फना
आमिर खान और काजोल स्टारर फिल्म फना को गुजरात सरकार के दबाव के चलते राज्य में बैन कर दिया गया था. दरअसल आमिर ने नर्मदा बचाओ आंदोलन में मेधा पाटकर के साथ हिस्सा लिया था और गुजरात सरकार को लेकर तीखी टिप्पणी भी की थी जिसके बाद सरकार ने भी उनकी फिल्म को बैन किया था. हालांकि ये फिल्म देश के दूसरे राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रही थी.
माई नेम इज खान
शाहरुख खान और काजोल स्टारर फिल्म माई नेम इज खान उस समय विवादों में फंस गई थी जब शाहरुख ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल में खिलाने की पैरवी की थी. उनके इस बयान के बाद शिवसेना ने आपत्ति जताई थी. शाहरुख को अपना बयान वापस लेने के लिए कहा गया था और उनकी फिल्म को भी खतरा बढ़ गया था. हालांकि शाहरुख ने कहा था कि उन्होंने कुछ एंटी नेशनल नहीं कहा है और अगर जरुरत पड़ी तो वे बाल ठाकरे से भी मिलेंगे. इस मामले में मुंबई में कांग्रेस की सरकार ने कई सिनेमाघरों के बाहर पुलिस सुरक्षा भी लगवाई थी और तमाम सुरक्षा के बीच ये फिल्म अपनी तयशुदा डेट पर रिलीज हुई थी.
पद्मावत
रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर स्टारर फिल्म पद्मावत को लेकर काफी विवाद हुआ था. संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित इस फिल्म का पहले नाम पद्मावती था लेकिन बाद में करणी सेना के तीखे विरोध के बाद इस फिल्म का नाम बदलकर पद्मावत किया गया था. करणी सेना ने इसके अलावा हिंसात्मक प्रदर्शन भी किए थे और फिल्म की रिलीज डेट कई बार खिसकी थी. हालांकि फिल्म ने रिलीज होने के बाद जबरदस्त कमाई की थी.
उड़ता पंजाब
पंजाब में नशे जैसे विवादास्पद मुद्दे पर बनी इस फिल्म पर कई विवाद हुए थे. पहली आपत्ति इस फिल्म के नाम को लेकर थी क्योंकि इसमें पंजाब जोड़ा गया था. सेंसर बोर्ड ने ये कहते हुए फिल्म की रिलीज पर बैन लगाया था कि इस फिल्म से पंजाब की इमेज को नुकसान पहुंच सकता है. फिल्म को लेकर पंजाब में सियासत भी काफी गरमा गई थी. इस फिल्म को लेकर अनुराग कश्यप ने सेंसर बोर्ड चीफ पहलाज निहलानी की काफी आलोचना की थी और कुछ समय बाद पहलाज को उनके पद से हटा दिया गया था.
इसके अलावा बैंडिट क्वीन, परजानिया, कामासूत्र जैसी कई फिल्में हैं जिन्हें अलग-अलग वजहों से सेंसर बोर्ड, सरकार या कुछ ग्रुप्स की आलोचना का शिकार होना पड़ा है.