कोर्ट ने नकारी थी 'द कश्मीर फाइल्स' और पाक एक्टर्स पर बैन की मांग... 'सरदारजी 3' के पास भी मौका

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सरदारजी 3' में हानिया आमिर की कास्टिंग तो भारत-पाक के मौजूदा तनाव से पहले ही हो चुकी थी. मगर अब जनता का गुस्सा इस फिल्म पर भी उतर रहा है. हालांकि, मेकर्स के सामने एक रास्ता खुला है जो फिल्म को रिलीज दिला सकता है.

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सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 28 जून 2025,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सरदारजी 3' पर जारी विवाद हर दिन बढ़ता चला जा रहा है. फिल्म में पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर के होने के कारण तो दिलजीत को विवाद झेलना ही पड़ा. मगर अब भारत में 'सरदारजी' की रिलीज भी अटक गई है. देश में जारी विरोध के चलते मेकर्स को ये फैसला लेना पड़ा कि फिल्म को फिलहाल ओवरसीज मार्किट में ही रिलीज कर दिया जाए क्योंकि आखिर इसपर खर्च भी हुआ है. 

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पहलगाम हमले और फिर इसके जवाब में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्ते, बहुत तनावपूर्ण बने हुए हैं. ऐसे में देश की जनता पाकिस्तानी कलाकारों से भी बहुत खफा है क्योंकि उन्हें भारत में लोकप्रियता तो बहुत मिलती है. मगर भारत में हुए पहलगाम हमले पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी. जबकि यही कलाकार भारत की तरफ से इस हमले के जवाब में हुए ऑपरेशन सिंदूर के विरोध में खड़े नजर आए. यही वजह है कि पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर भारतीय जनता में गुस्सा है. 

दिलजीत दोसांझ, हानिया आमिर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

2016 में हुए उरी हमले के बाद पहली बार फिल्म संगठनों ने पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाया था, जो 2019 के पुलवामा अटैक के बाद और कड़ा किया गया. लेकिन पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की विदेश में शूट हुई फिल्मों में फिर भी पाकिस्तानी कलाकार नजर आते रहे.

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दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सरदारजी 3' में हानिया आमिर की कास्टिंग तो भारत-पाक के मौजूदा तनाव से पहले ही हो चुकी थी. मगर अब जनता का गुस्सा इस फिल्म पर भी उतर रहा है और चूंकि देश के बड़े सेलेब्रिटी बन चुके दिलजीत फिल्म के हीरो हैं, तो उन्हें भी जनता से विरोध झेलना पड़ रहा है. हालांकि, 'सरदारजी 3' के मेकर्स के पास अभी भी एक रास्ता खुला है जो उनकी फिल्म को रिलीज दिला सकता है और लगातार इसके विरोध में उतर रहे संगठनों को थोड़ा शांत करवा सकता है. 

'सरदारजी 3' के काम आ सकता है कानूनी रास्ता 
जैसा कि हमने ऊपर बताया, पाकिस्तानी आर्टिस्ट्स के काम करने पर पहली बार बैन 2016 में लगा था. इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने एक रिजोल्यूशन में पाक एक्टर्स के भारत में काम करने पर बैन लगाया था. जबकि 2019 में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयीज (FWICE) और ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) भी इस बैन के पक्ष में उतर आए थे. ये सभी संगठन फिल्मों से जुड़े लोगों के संगठन हैं, कोई सरकारी या कानूनी संस्था नहीं. टेक्निकली देखा जाए तो इनका बनाया कोई नियम उन लोगों पर ही लागू होता है जो इन संगठनों के सदस्य हैं. 

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पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन को लेकर कोर्ट कह चुका है ये बात 
2023 में खुद को सिने वर्कर बताने वाले एक व्यक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन की मांग की थी. इंडिया टुडे की एक पुरानी रिपोर्ट बताती है कि इस याचिका में कोर्ट से भारत सरकार को ये निर्देश देने की मांग की गई थी कि वो भारतीय नागरिकों, कंपनियों, व्यवसायों और संगठनों के पाकिस्तानी कलाकारों के साथ किसी भी तरह का काम करने पर पूरी तरह बैन लगाए. 

लेकिन कोर्ट ने ये कहते हुए याचिका अस्वीकार कर दी थी कि याचिकाकर्ता की मांग सांस्कृतिक सद्भाव, शांति और एकता को बिगाड़ने वाला कदम है और इसमें कोई मेरिट नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि, 'ये समझना बहुत आवश्यक है कि देशभक्त होने के लिए किसी को विदेशियों, खासकर पड़ोसी देश के लोगों के विरोध की जरूरत नहीं है.' 

इस याचिका के सन्दर्भ में बॉम्बे हाईकोर्ट का ये स्टैंड अपने आप में ये बताने के लिए काफी है कि बैन की मांगों पर कानून की क्या राय है. ये याचिका स्पष्ट रूप से पाकिस्तानी कलाकारों पर पूर्ण बैन के लिए थी जिसे कोर्ट ने नकार दिया. मगर पाक कलाकारों के मुद्दे के अलावा भी, कानून का रवैया फिल्मों पर बैन लगाने के खिलाफ ही रहा है. 

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जब कोर्ट ने फिल्मों पर बैन को बताया गलत 
2022 में बॉम्बे हाई कोर्ट में विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' पर बैन लगाने की एक याचिका आई थी. बैन के समर्थन में ये तर्क दिया गया था कि फिल्म सामाजिक सद्भाव बिगाड़ सकती है. मगर कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया. 

अदा शर्मा स्टारर फिल्म 'द केरल स्टोरी' को लेकर भी काफी विवाद हुआ था और पश्चिम बंगाल सरकार ने ये फिल्म बैन कर दी थी. जबकि तमिलनाडु में एक मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने फिल्म दिखाने से इनकार कर दिया था. मगर सुप्रीम कोर्ट ने जहां पश्चिम बंगाल सरकार के लगाए बैन को स्टे कर दिया था. वहीं, तमिलनाडु प्रशासन को आदेश दिया था कि वो सुरक्षित तरीके से फिल्म की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करवाए. 

हाल ही में कमल हासन के एक बयान पर विवाद छिड़ने के बाद, कर्नाटक सरकार ने, राज्य में उनकी फिल्म 'ठग लाइफ' की रिलीज रोक दी थी. जब मेकर्स ने ये मामला कर्नाटक हाईकोर्ट में उठाया और पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की तो कोर्ट ने इशारा किया कि कमल हासन को अपने बयान के लिए माफी मांग लेनी चाहिए थी. लेकिन जब मेकर्स सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो कोर्ट ने सीधा कहा कि इस तरह के बैन कानून के खिलाफ हैं और कोई भी फिल्म जिसे सेंसर सर्टिफिकेट मिल चुका है वो रिलीज होनी ही चाहिए. 

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दिलजीत की फिल्म के लिए भी खुला है कोर्ट का रास्ता 
'सरदारजी 3' के बारे में ये भी स्पष्ट नहीं है कि इस फिल्म को CBFC ने सेंसर सर्टिफिकेट दिया है या नहीं. हाल ही में दिलजीत दोसांझ की फिल्म रिलीज होने का विरोध कर रहे एक संगठन ने सेंसर बोर्ड को लेटर लिखते हुए, इसका सेंसर सर्टिफिकेट रोकने की मांग भी की थी. सवाल ये है कि 'सरदारजी 3' के मेकर्स ने फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी है या नहीं. अगर सेंसर के पास फिल्म भेजी जा चुकी है और रिजेक्ट हुई है तो कानून में इसके लिए भी उपाय है और मेकर्स सीधा हाई कोर्ट जा सकते हैं. 

अगर फिल्म भेजी गई है तो बोर्ड को भी एक तयशुदा समय में सर्टिफिकेट जारी करना होता है. अगर ऐसा नहीं होता तो इसके खिलाफ भी कानूनी रास्ता खुला है. सेंसर बोर्ड की तरफ से सर्टिफिकेट जारी करने में कोई टालमटोल होने पर भी कानून का सहारा लिया जा सकता है जैसा कंगना रनौत ने अपनी फिल्म 'इमरजेंसी' की रिलीज के वक्त किया था. यानी कानूनी रास्ते खुले तो जरूर हैं, अब ये 'सरदारजी 3' के मेकर्स के ऊपर है कि वो इस रास्ते पर चलना चाहते हैं या नहीं. 

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