कहा जाता है कि फिलमेकर एस.एस. राजामौली के साथ जो एक बार काम कर ले, उसकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर थोड़ी स्ट्रगल करनी शुरू कर देती है. इसे ज्यादातर 'Rajamouli curse' कहकर बुलाया जाता है. साल 2022 में RRR के बाद राम चरण का भी कुछ ऐसा ही हाल नजर आया है. उनकी दो फिल्में आचार्य और गेम चेंजर को एक बुरा दौर देखना पड़ा. तेलुगू इंडस्ट्री के मेगा पावर स्टार कहलाए जाने वाले सुपरस्टार अचानक थोड़े स्ट्रगल करने लगे. लेकिन उनकी पावर आखिर कितने दिन तक छिपी रहती.
राम चरण ने जब नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्ममेकर बुची बाबू सन के साथ अपनी फिल्म पेद्दी अनाउंस की, तो उनके फैंस को उम्मीद मिली. इस फिल्म के लिए एक्टर ने कमर-तोड़ मेहनत भी की, जो फिल्म के टीजर-ट्रेलर से साफ झलक रही थी. अब लंबे इंतजार के बाद फिल्म पेद्दी थिएटर्स में लग चुकी है. राम चरण की वो मेहनत किस तरह बड़े पर्दे पर रंग लाई है? ये हम आपको आगे बताते हैं.
कौन है पेद्दी?
फिल्म की कहानी इंडिया के 2016 ओलंपिक गेम्स में सिर्फ 2 मेडल जीतने की निराशा से शुरू होती है. स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री अपने खिलाड़ियों के बुरे प्रदर्शन से नाखुश है. ऐसे में एक ऑफिसर अचानक आंध्र प्रदेश के गांव विजयनगर पहुंच जाता है, जहां उसे पहली बार पेद्दी नाम के शख्स का पता चलता है. चाहे वो क्रिकेट हो, पहलवानी या एथलेटिक्स, हर खेल में पेद्दी ही सुपरस्टार है. वो विजयनगर के स्पोर्ट्स कल्चर में एक बड़ा नाम है. अब एक अच्छे खिलाड़ी की खोज में निकला ऑफिसर, पेद्दी से मिलने की चाह रखता है. वो उसे ढूंढने की कोशिश में लग जाता है, और एक अनजान शख्स के साथ पेद्दी की खोज में निकल पड़ता है. पेद्दी विजयनगर के पास स्थित पहाड़ी गांव से आता है, जहां दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले लोग रहते हैं. सरकार ने इस गांव के लोगों को अपना नागरिक नहीं समझा हुआ है, इसी वजह से यहां ना सड़क है, ना रेलवे स्टेशन और ना ही आम जनता के लिए कोई सुख-सुविधा.
ऐसे में पेद्दी समेत सभी गांव वाले विजयनगर जाकर काम करने पर मजबूर हैं. पेद्दी वहां क्रिकेट का सुपरस्टार है. मगर निचले वर्ग का होने के कारण उसे भेदभाव का सामना करना पड़ता है. वो हर खेल में बादशाह है, लेकिन उसके सामने अपनी पहचान की चुनौती सबसे बड़ी होती है. ऐसे में अपनी और गांव वालों की पहचान पाने वो हर कोशिश में जुट जाता है. उसे सिस्टम के साथ-साथ अपने गांव वालों से भी लड़ना पड़ता है. इस बीच अपनों का साथ छूट जाता है, लेकिन पेद्दी अपने मकसद से पीछे नहीं हटता. उसका सिर्फ एक मंत्र है, 'एक ही जिंदगी है, जो करना है इसी में करना है.' अब क्या पेद्दी खेल को अपनी ढाल बनाकर गांव वालों को पहचान दिला पाएगा? यही इस फिल्म का बेसिक प्लॉट है.
मासी मोमेंट्स से भरपूर फिल्म, करेगी इमोशनल
इस फिल्म में जिस तरह स्पोर्ट्स और ड्रामा का मिश्रण किया गया है, वो तारीफ के काबिल है. राम चरण ने जिस तरह हर खेल में जान फूंकी है, उसे देखकर मजा आता है. फिर चाहे वो गली क्रिकेट मैच हो, या अखाड़े में उतना पहलवान. एक्टर का हर एक अंदाज निराला है. उन्होंने पूरी फिल्म को अपने मजबूत कंधों पर उठाया रखा, जिसमें वो सफल भी हुए. एक लंबे वक्त के बाद, राम चरण की ऐसी परफॉरमेंस और मेहनत देखने मिली जिसमें वो फुल नंबर से पास हुए. उनके इमोशनल सीन्स भी जितने थे, वो दमदार थे. उन्होंने पूरी कोशिश की कि वो अपने काम से आपको सिर्फ उनपर ध्यान देने पर मजबूर करें.
सीट से बांधती है फिल्म, लंबा है रन-टाइम
डायरेक्टर बुची बाबू सन ने अपनी फिल्म की कहानी काफी लंबी रखी है, जिसे उन्होंने इस एक पूरी एक फिल्म में दिखाने की कोशिश की. 3 घंटे 9 मिनट लंबी इस फिल्म में कुछ सीन्स ऐसे लगे जरूर कि अगर ना होते, तब भी फिल्म की कहानी पर कोई खास असर नहीं पड़ता. हालांकि स्पोर्ट्स का रोमांच, हैरान करने वाले ट्विस्ट और सस्पेंस आपकी दिलचस्पी इस फिल्म में अंत तक बनाए रखती है. ये फिल्म एक मकसद से शुरू होती है, जिसे अंत में पूरा होता देखकर आपकी आंखों में चमक और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान ठहर जाती है. वहीं पेद्दी फिल्म के गाने उतने खास नहीं, जिसे याद रखा जा सके. लेकिन ए.आर.रहमान आपको निराश करके थिएटर से बाहर भेजें, ऐसा बहुत कम होता है. इस फिल्म में बैकग्राउंड स्कोर काफी दमदार है.
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:
जाह्नवी करती हैं निराश, दिव्येंदु का तगड़ा डेब्यू
इस फिल्म से मिर्जापुर वाले दिव्येंदु शर्मा ने अपना तेलुगू डेब्यू किया है, जो उनके रोल के मुताबिक काफी शानदार था. उनका रोल कुछ-कुछ मिर्जापुर वाले मुन्ना भइया जैसी याद दिलाता जरूर है, लेकिन अंत में वो भी सुधर जाते हैं. बोमन ईरानी फिल्म में एक स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के अधिकारी बने हैं, जिसमें उनका काम लिमिटेड जरूर है मगर असर जरूर डालता है. मगर फिल्म में सबसे ज्यादा निराशाजनक काम जाह्नवी कपूर का है. उनका राम चरण संग रोमांटिक ट्रैक जबरदस्ती वाला फील देता है. एक्ट्रेस को फिल्म में किसी आई-कैंडी की तरह इस्तेमाल किया गया है, जिसमें वो बिल्कुल खरी नहीं उतरतीं.
बाकी फिल्म में जगपति बाबू और शिवराजकुमार जैसे साउथ के मंझे हुए कलाकार हैं, जिनका काम एक अलग छाप छोड़कर जाता है. पेद्दी में एनिमल वाले उपेंद्र लिमये भी हैं, जिनका अच्छा-खासा रोल शामिल है. इसके अलावा अगर आपने अल्लू अर्जुन वाली पुष्पा 2 देखी है, तो उसके लगभग सभी एक्टर्स इस फिल्म में भी शामिल हैं. उसकी सबसे बड़ी वजह शायद ये भी है क्योंकि इसे पुष्पा फिल्म बनाने वाले सुकुमार ने प्रोड्यूस किया है.
कुल मिलाकर अगर कहा जाए, तो राम चरण की पेद्दी- मासी मोमेंट्स, इमोशनल स्टोरी और स्पोर्ट्स के मजेदार रोमांच से भरपूर एक दमदार फिल्म है. अगर आप एक मसाला फिल्म देखने का मन बना रहे हैं, तो इस फिल्म को एक मौका जरूर दे सकते हैं.
पर्व जैन