Movie Review: बाबूमोशाय बंदूकबाज की कहानी गुल, पर परफॉर्मेंस फुल

'बाबूमोशाय बन्दूकबाज की कहानी काफी कमजोर है.  हालांकि, फर्स्ट हाफ में बांध के रखता है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म अपना असर छोड़ देती है और बहुत ज्यादा लंबी लगने लगती है. इसे और क्रिस्प किया जा सकता था.

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महेन्द्र गुप्ता / आर जे आलोक

  • नई दिल्‍ली,
  • 25 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 3:32 PM IST

फिल्म का नाम : बाबूमोशाय बन्दूकबाज

डायरेक्टर: कुशन नंदीस्टार

कास्ट: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बेग,  दिव्या दत्ता, मुरली शर्मा, जतिन गोस्वामी

अवधि: 2 घंटा 02 मिनट

सर्टिफिकेट: A रेटिंग: 2 स्टार

पिछले दिनों कंट्रोवर्सी में फंसी फिल्म 'बाबूमोशाय बन्दूकबाज' आखिरकार रिलीज हो गई.  कभी इसे सेंसर की तरफ से बहुत सारे कट्स दिए गए तो तो कभी ऑनलाइन लीक हो जाने का खतरा मंडराया. अब फिल्म थिएटर में लग तो चुकी है. जानते हैं कैसी है.

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कहानी

यह कहानी कॉन्ट्रैक्ट किलर बाबू बिहारी (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) की है, जो पैसे लेकर लोगों का मर्डर करता है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बाबू को मोची का काम करने वाली फुलवा (बिदिता बेग) से प्यार हो जाता है और बाबू उसे शर्तों पर घर ले जाता है. फिर कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के दौरान बाबू के सामने बांके (जतिन गोस्वामी) की एंट्री होती है, जो खुद भी एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है.बाबू और बांके के बीच में शर्त लगती है कि कौन पहले अपने कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करके दी हुयी लिस्ट को ख़त्म करेगा. इसी बीच मंत्री सुमित्रा देवी (दिव्या दत्ता) और त्रिलोक (मुरली शर्मा) की भी ख़ास एंट्री होती है , कहानी में कई सारे मोड़ आते हैं और अंततः फिल्म को अंजाम मिलता है.

कमज़ोर कड़ियां

फिल्म की कहानी काफी कमजोर है , हालांकि फर्स्ट हाफ में बांध के रखती है, लेकिन इंटरवल के बाद मामला बिगड़ जाता है. फिल्म बहुत ज्यादा लम्बी लगने लगती है. इसे और क्रिस्प किया जा सकता था.

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21 वीं सदी में भी लम्बे लम्बे चेस सीक्वेंस , कॉन्ट्रैक्ट किलर के हाथों से चली गोली निशाने पर ना लगना इत्यादि बातें पचा पाना बड़ा मुश्किल होता है. ख़ासतौर पर गोली लगने के बाद भी बार-बार इंसान का जीवित रह जाना.

फिल्म के गाने भी रिलीज से पहले बज पैदा नहीं कर पाए हैं, जिन्हें और भी रोचक बनाया जा सकता था. फिल्म की एडिटिंग भी सटीक नहीं है, और कई सारे किरदारों की एंट्री में ही बहुत सारा वक्त बर्बाद होता दिखाया गया है, उस समय को और बेहतर तरीके से एडिट किया जा सकता था. फिल्म का क्लाइमेक्स तो और भी निराश करता है.

फिल्म क्यों देख सकते हैं

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अभिनय और उनके वन लाइनर्स के लिए एक बार जरूर देख सकते हैं. वो आपको हंसाते हैं और सरप्राइज भी करते हैं. दिव्या दत्ता ने भी बहुत ही जबरदस्त काम किया है. जतिन गोस्वामी का काम भी काफी अच्छा है. मुरली शर्मा के साथ- साथ बाकी सह कलाकारों का काम भी बढ़िया है. तो परफॉरमेंस के आधार पर बानी फिल्में अगर आपको पसंद हैं तो एक बार ट्राय कीजियेगा.

बॉक्स ऑफिस

प्रोमोशन को मिलाकर फिल्म का बजट लगभग 14 करोड़ बताया जा रहा है. खबर है कि फिल्म लगभग 1000 स्क्रीन्स में रिलीज की जायेगी. अब यह देखना है कि वीकेंड पर कितनी कमाई कर पाती है.

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