मैडॉक फिल्म्स हमेशा से ही नई और अनोखी कहानी बड़े पर्दे पर लाने के लिए जाना जाता है. उनकी अब एक नई फिल्म 'ईठा' रिलीज होने जा रही है, जिसमें स्त्री एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर नजर आएंगी. इसे छावा बनाने वाले लक्ष्मण उतेकर ने डायरेक्ट किया है. दो दिन पहले फिल्म का रौंगटे खड़े कर देने वाला टीजर जारी हुआ था, जिसे जनता ने काफी पसंद किया.
श्रद्धा ने किया हैरान
ईठा में श्रद्धा की छोटी सी झलक ने लोगों को ये कहने पर मजबूर कर डाला है कि उन्हें अपने काम के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना चाहिए. हालांकि ऐसा होगा या नहीं, ये तो वक्त बताएगा. मगर उससे पहले जिनकी कहानी एक्ट्रेस अपनी फिल्म के जरिए दिखाने वाली हैं, उनके बारे में जान लेते हैं.
श्रद्धा कपूर फिल्म ईठा में महाराष्ट्र की तमाशा क्वीन विठाबाई नारायणगांवकर का रोल निभा रही हैं. ये वो शख्सियत हैं जिन्होंने अपनी कला को हमेशा खुद से आगे रखने का प्रण लिया. टीजर में जो शॉट आप देखते हैं कि कैसे प्रेग्नेंट ईठा परफॉर्मेंस से ठीक पहले अपने बच्चे को जन्म देती है, वैसा हकीकत में भी हुआ था. विठाबाई ने सचमुच अपने बच्चे की डिलीवरी के बाद स्टेज पर जाकर परफॉर्म करने का फैसला लिया था, जो उनकी अपने कला के प्रति कमिटमेंट को दर्शाता है.
तमाशा परिवार में ही हुआ था जन्म
विठाबाई का जन्म 1 जुलाई 1935 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में हुआ था. उनके परिवार में नाच-गाना जीवन जीने का हिस्सा रहा. उनके दादा नारायण खुदे ने एक ऐसी तमाशा मंडली बनाई थी, जो जगह-जगह जाकर परफॉर्म करती थी. इसे विठाबाई के पिता और परिवार के दूसरे लोग चलाया करते थे. विठाबाई को शुरू से लावणी, गवलन और बाकी लोक प्रदर्शन कलाओं की सीख दिलाई गई थी.
विठाबाई ने अपने परिवार द्वारा स्थापित की गई मंडली में शामिल होकर ही नाच-गाना सीखा. वो उनके साथ गांव-गांव घूमती थीं, और छोटी उम्र से ही परफॉर्म किया करती थीं. विठाबाई जिस तरह नाचती थीं, उसने उन्हें महाराष्ट्र में नाम दिलाया. उनका टैलेंट सबसे पहली बार मराठी प्ले राइटर मामा वारेकर ने पहचाना. वो उनकी स्टेज प्रेजेंस से बड़े खुश हुए थे, जिसके बाद उन्होंने विठाबाई के पास अपनी मंडली में शामिल होने का प्रस्ताव रखा.
मामा वारेकर की मंडली में विठाबाई ने बहुत कुछ सीखा और आगे चलकर उनकी परफॉर्मेंस में और भी निखार आया. एक वक्त के बाद विठाबाई के नाम से तमाशे चलने लगे. सिर्फ उन्हें परफॉर्म करते देखने के लिए लोग भीड़ लगाकर पहुंच जाते थे. महाराष्ट्र में विठाबाई तमाशा क्वीन बन चुकी थीं.
एक घटना ने बना डाला लेजेंड
विठाबाई ने अपनी जिंदगी में नाचने के अलावा किसी और दूसरी चीज को महत्व नहीं दिया. जब वो प्रेग्नेंट थीं, तब भी स्टेज पर आकर परफॉर्म किया करती थीं. जिस दिन उन्होंने अपने बच्चे को जन्म दिया, तब उन्होंने अपना अम्बिलिकल कॉर्ड एक पत्थर से काटा और अगले ही पल वो स्टेज पर आ गईं. जब जनता को मालूम हुआ कि उन्होंने बच्चे को जन्म दिया, तब सभी ने उनसे रिक्वेस्ट की कि वो आराम करें, तब जाकर विठाबाई के पैर थे और वो लोगों की नजरों में लेजेंड बन गईं.
विठाबाई की पॉपुलैरिटी सिर्फ तमाशा-थिएटर तक सीमित नहीं थी. उन्हें फिल्मों के भी ऑफर मिलते थे. थिएटर डायरेक्टर शांतनु घुले जिन्होंने उनकी जिंदगी पर एक मराठी प्ले तैयार किया था, उनका दावा था कि विठाबाई को कई फिल्मों के ऑफर मिले मगर उन्होंने सभी ठुकरा दिए. उनका मानना था कि अगर वो फिल्मों के लिए थिएटर छोड़ देंगी, तो जो मंडली सभी का परिवार चला रही है वो बंद पड़ जाएगी. कई लोगों ने उन्हें 'तमाशा सरदारनी' की उपाधी भी दी थी.
मुश्किल रही पर्सनल जिंदगी और अंतिम दिन
विठाबाई ने जो नाम-शौहरत और प्यार स्टेज पर पाया, वो उन्हें शादीशुदा जिंदगी में नहीं मिला. उनकी शादी मारुती सावंत से हुई थी, जिन्होंने उन्हें सिर्फ पैसों का जरिया बनाया हुआ था. वो विठाबाई की सारी कमाई हड़प लेते थे और उन्हें खूब मारते-पीटते भी थे.
विठाबाई की मौत भी दर्दनाक थी. वो अंतिम समय में आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं, जिसकी वजह से जब वो बीमार हुईं, तब उनके पास इलाज के भी पैसे नहीं रहे. उनकी मौत 15 जनवरी 2002 में पैरेलिटिक अटैक के कारण हुई. कहा जाता है कि उनके परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो उनका पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए अस्पताल का बिल भर सकें ताकि बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाए. तभी विठाबाई के चाहने वालों ने उनके परिवार की मदद की.
अब उनकी जिंदगी पर बन रही फिल्म ईठा लोगों को विठाबाई नारायणगांवकर का साहस और पॉपुलैरिटी की झलक दिखाएगी. ये फिल्म 28 अगस्त को थिएटर्स में रिलीज होगी.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क