गोलमाल, किंग अंकल, 1920 लंदन जैसी फिल्मों का हिस्सा रहीं दिग्गज एक्ट्रेस सुष्मिता मुखर्जी अकेले अपनी जिंदगी बिता रही हैं. वो 61 साल की हैं, दूसरे पति एक्टर-प्रोड्यूसर पति राजा बुंदेला से उन्हें दो बच्चे हैं, बावजूद इसके वो मुंबई में अपने घर में अकेले रहती हैं.
सुष्मिता पहले फिल्म मेकर सुधीर मिश्रा संग रिश्ते में थीं. इन्होंने साल 1978 में शादी की थी, लेकिन फिर 22 साल साथ रहने के बाद दोनों ने अपने रास्ते अलग कर लिए और तलाक हो गया. इतने सालों में इनकी कोई संतान नहीं थी. सुष्मिता 45 साल की थीं जब राजा बुंदेला से 2009 में दूसरी शादी की थी.
न तो सुष्मिता की पति राजा से कोई अनबन हुई है और न ही वो खुद को हमेशा काम में बिजी रखती हैं, फिर क्या वजह है कि सुष्मिता को बड़े से शहर में अकेले दिन बिताने पड़ रहे हैं. इसका जवाब खुद सुष्मिता ने दिया.
अकेलेपन का शिकार हुई सुष्मिता?
एक वीडियो शेयर कर सुष्मिता ने बताया कि बावजूद इसके कि उनके पास पूरा परिवार है, वो अकेली क्यों रहती हैं? एक्ट्रेस ने बताया कि उनकी पैदाइश दिल्ली की है. वो बचपन से जॉइंट फैमिली में रही हैं, लेकिन फिर उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिससे उन्हें गहरा आघात लगा.
सुष्मिता बोलीं- मैं कोई दुखियारी-अकेली बूढ़ी औरत नहीं हूं जिसे परिवार ने अलग-थलग कर दिया हो. वैसे तो मैं अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में बात नहीं करती, लेकिन आज कुछ बाते कह देती हूं.
'बहुत बुरा होने के बाद मुझे मेरे पति मिले. उन्होंने मुझे वो सबकुछ दिया जो मुझे चाहिए था. मुझे शुरू से बच्चे-परिवार चाहिए था. मैं दिल से कामकाजी महिला नहीं हूं. मेरे लिए फैमिली हमेशा से मेरी प्रायोरिटी रही है. अपने दोनों बच्चों को मैंने पाल पोस के बड़ा किया. मैंने पुरजोर कोशिश की कि मैं ससुराल-मायका पक्ष सबको खुश रखूं. जो भी मुझे जानते हैं उन सबको पता है कि ये मेरी लाइफ में सबसे पहले आता है. लेकिन अब बच्चे भी बड़े हो, चले गए अपने-अपने रास्ते, उनकी भी स्टोरी शेयर करूंगी आपसे लेकिन बाद में.'
मध्य प्रदेश में बसाया सुकूनभरा आशियाना
सुष्मिता ने आगे बताया कि- अब मैं और मेरे पति ने तय कर लिया है कि ओरछा, मध्य प्रदेश में जो हमारा घर है, वहां ज्यादा वक्त बिताएंगे. उसमें हमने एक संस्था शुरू की थी, जहां हमने औरतों-बच्चों की भलाई और डेवलप्मेंट के लिए आर्ट एंड क्राफ्ट का काम शुरू किया था. तो उस घर में मेरे पति रहते हैं, जब उन्हें मुंबई में काम होता है तो यहां आ जाते हैं. ऐसा ही मेरे साथ भी है. मेरा भी जब यहां काम नहीं होता तो वहां चली जाती हूं.
सुष्मिता ने बताया कि तो ऐसा नहीं है कि मैं अकेले रहना चाहती हूं, बस जिंदगी के एक पड़ाव पर आप अलग तरह के रास्ते चुन लेते हैं. मेरी सोच है कि जैसे रहना है रहो, बस खुश रहो. परिवार के साथ भी हो और डर के साथ रहो तो क्या फायदा. जब मन हुआ साथ रहो, जब मन हुआ अकेले रहो, लेकिन खुश रहो.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क