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वो बार डांसर, ज‍िसकी महेश भट्ट ने बदली किस्मत, इन सुपरहिट फिल्मों की है राइटर

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST
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बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्में 'आशिकी 2' और 'मर्डर 2' की सफलता के पीछे जिस लेखिका का दिमाग है, उनकी अपनी असल जिंदगी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है. शगुफ्ता रफीक ने पर्दे पर प्यार, दर्द और धोखे की जो कहानियां बुनीं, वो दरअसल उनके अपने जीवन के कड़वे अनुभवों का ही निचोड़ हैं. जानिए राइटर शगुफ्ता रफीक की जिंदगी के संघर्ष की. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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शगुफ्ता की जिंदगी की शुरुआत ही एक पहेली से हुई. उन्हें कभी पता नहीं चला कि उनके असली माता-पिता कौन थे. उनकी परवरिश गुजरे जमाने की अदाकारा अनवरी बेगम ने की. लोगों के बीच तरह-तरह की बातें थीं—कोई उन्हें अनवरी की नाजायज औलाद कहता, तो कोई कहता कि उन्हें सड़क पर लावारिस पाया गया था.(Photo: Instagram/@writersahiba20)

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खैर, पहचान का यह संकट अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि घर पर गरीबी ने दस्तक दे दी. हालात इतने खराब हो गए कि घर के बर्तन और जेवर तक बिक गए. महज 12 साल की मासूम उम्र में शगुफ्ता को घर चलाने के लिए प्राइवेट पार्टियों में डांस करना पड़ा, जहां वह जमीन पर गिरे नोटों को बटोरती थीं. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियां और भी खराब होती गईं. 17 साल की उम्र में शगुफ्ता ने एक ऐसा फैसला लिया जिसे कोई भी अपनी मर्जी से नहीं चुनता. आर्थिक तंगी से तंग आकर उन्होंने जिस्मफरोशी के पेशे में कदम रखा. उनकी मां इस फैसले के सख्त खिलाफ थीं, लेकिन घर की जरूरतों ने शगुफ्ता को मजबूर कर दिया था. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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वह रात भर काम करके जो पैसे कमातीं, उससे घर का राशन आता और मां के लिए सोने की चूड़ियां खरीदी जातीं. करीब दस साल तक वह इस अंधेरी दुनिया का हिस्सा बनी रहीं, लेकिन उनके भीतर एक कलाकार हमेशा जिंदा रहा जो इस दर्द को कागज पर उतारना चाहता था. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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जिंदगी की जद्दोजहद शगुफ्ता को दुबई ले गई, जहां उन्होंने बार में गाना और नाचना शुरू किया. वहां का माहौल उनके लिए डरावना था, लेकिन वहीं उनकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जिसे वह अपना 'फरिश्ता' मानती हैं. उस व्यक्ति ने न सिर्फ उन्हें सम्मान दिया बल्कि शादी का प्रस्ताव भी रखा. हालांकि उनकी शादी नहीं हो सकी, लेकिन उस इंसान ने शगुफ्ता को सुरक्षा का अहसास कराया और एक बेहतर भविष्य का सपना देखने की ताकत दी. साल 1999 में जब उनकी मां को कैंसर हुआ, तो वह सब कुछ छोड़कर भारत लौट आईं. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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शगुफ्ता के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ साल 2002 में आया जब उनकी मुलाकात दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट से हुई.  महेश भट्ट ने उनके भीतर छिपे दर्द और हुनर को पहचाना.  (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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भट्ट साहब के प्रोत्साहन के बाद 2006 में उन्होंने फिल्म 'कलयुग' के लिए कुछ सीन लिखे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'वो लम्हे', 'आवारापन', 'धोखा', 'राज-2', 'राज-3', 'मर्डर-2', 'जन्नत-2', 'आशिकी-2' इस तरह एक के बाद एक 13-14 फिल्में लिखीं. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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शगुफ्ता रफीक की सबसे बड़ी कामयाबी 'आशिकी 2' रही, जिसने दर्शकों को रूह तक झकझोर दिया. उनके लिखे हर किरदार में वो सच्चाई और दर्द झलकता था, जिसे उन्होंने खुद महसूस किया था.  बॉलीवुड के बाद उन्होंने टीवी की दुनिया में भी अपनी कलम का जादू चलाया.  (Photo: Instagram/@writersahiba20)
 

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खैर, इन सब के बीच शगुफ्ता ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था महेश भट्ट के सुझाव पर ही खुद को प्रॉस्टिट्यूट बताया था. उन्होंने कहा था कि एक बार में सभी का मुंह बंद कर दो. इससे जिंदगी भर की छुट्टी हो जाएगी.  (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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शगुफ्ता रफीक ने कहा, 'महेश भट्ट की वजह से ही मैंने अपने बारे में इंटरव्यू दिया था कि मैं मिस्ट्रेस थी, मैं प्रॉस्टिट्यूट थी, बार डांसर थी, सिंगर थी. मैंने सब कुछ किया है, क्योंकि मेरे घर की हालत ठीक नहीं थी. हालांकि, इनमें से एक भी बात सच नहीं थी लेकिन लोगों का मुंह बंद करना जरूरी था. (Photo: Instagram/@writersahiba20)

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वर्क फ्रंट की बात करें तो इस समय शगुफ्ता रफीक को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है कि वो इस समय किस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ी हुई है.
 

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