पीएम मोदी आज कुशीनगर को देंगे एयरपोर्ट की सौगात, क्या है बौद्ध धर्म का कनेक्शन?

पूर्वांचल का कुशीनगर भगवान गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है, इसलिए बौद्ध धर्म के लोगों के लिए यह सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है. ऐसे में यूपी चुनाव से ठीक पहले पीएम मोदी की ये सौगात बौद्ध धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण को भी साधने की भी कवायद मानी जा रही है.

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पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 20 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 9:45 AM IST
  • PM मोदी कुशीनगर एयरपोर्ट की सौगात देंगे
  • कुशीनगर से बौद्ध धर्म को साधने का प्लान
  • पूर्वांचल से पीएम मोदी के मिशन-2022 का आगाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बुधवार (आज) को उद्घाटन कर रहे हैं. इस मौके पर कई देशों के राजदूत और श्रीलंका का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा. पूर्वांचल का कुशीनगर भगवान गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है, इसलिए बौद्ध धर्म के लोगों के लिए यह सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है. ऐसे में यूपी चुनाव से ठीक पहले पीएम मोदी की ये सौगात बौद्ध धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण को भी साधने की भी कवायद मानी जा रही है.

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बता दें कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा की रात का सनातन धर्म के साथ ही बौद्ध अनुयायियों में भी खासा महत्व है. इसी पवित्र तिथि पर प्रधानमंत्री मोदी कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ कर रहे हैं. इस दौरान पीएम 3 दिवसीय बौद्ध सम्मेलन की शुरुआत भी कर रहे हैं. साथ ही पीएम मोदी 478.74 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की भी सौगात देंगे, जिसमें 116.21 करोड़ से तैयार 11 परियोजनाओं का लोकार्पण और 362.53 की लागत से मेडिकल कॉलेज सहित तीन परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे. 

बौद्ध सर्किट का केंद्र बिंदु कुशीनगर

कुशीनगर एक बौद्ध तीर्थ केंद्र है जहां भगवान गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था. यह बौद्ध सर्किट का केंद्र बिंदु भी है, जिसमें लुंबिनी, सारनाथ बोधगया, श्रावस्ती, राजगीर, संकिसा और वैशाली जैसे बौद्ध तीर्थस्थल शामिल हैं. कुशीनगर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट उन लोगों के लिए खास सौगात है जो देश-दुनिया से भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पहुंचना चाहते हैं. 

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बौद्ध देशों के साथ-साथ गल्फ देश से सीधी फ्लाइट कुशीनगर से जुड़ेंगी. कुशीनगर में पहली इंटरनेशनल फ्लाइट श्रीलंका से आएगी. पूर्वांचल के लोगों को लिए यह एक बड़ी सौगात मानी जा रही है. एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में 'बुद्ध का महाप्रसाद' के रूप में प्रतिष्ठित 'कालानमक चावल' की ब्रांडिंग का भी बड़ा अवसर होगा. बौद्ध अतिथियों को 'कालानमक चावल' उपहार में दिया जाएगा. माना जा रहा है कि पीएम मोदी इस दौरान बौद्ध धर्म के लोगों को एक बड़ा सियासी संदेश देने की कवायद करते नजर आएंगे. 

यूपी में बौद्ध धर्म की सियासी अहमियत

बता दें कि उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों की संख्या अच्छी खासी है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यूपी में बौद्ध धर्म के लोगों की संख्या 206285 है, जो अब बढ़कर करीब 25 लाख के करीब पहुंच चुकी है. सूबे में दलित और ओबीसी की मौर्य, पाल जैसी जाति के लोगों ने बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म को अपनाया है. यूपी में बौद्ध धर्म के लोग बसपा के कोर वोटबैंक रहे हैं. मायावती ने भले ही बौद्ध धर्म न अपनाया हो, लेकिन डॉ. अंबेडकर के चलते वो हमेंशा से बौद्ध धर्म को अहमियत देती रही हैं. 

योगी सरकार में मंत्री भी मानते हैं बौद्ध धर्म

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बसपा छोड़कर बीजेपी में आए योगी सरकार में कैंबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मोर्य भी बौद्ध धर्म को मानते हैं. कुशीनगर जिले ही वो विधायक हैं. ऐसे में 2022 के चुनाव से ठीक पहले पीएम मोदी ने कुशीनगर में एयरपोर्ट के सौगात के जरिए बसपा के कोर वोटबैंक माने जाने वाले बौद्ध धर्म को साधने का दांव चला है. पूर्वांचल के कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर में बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म के लोग रहते हैं तो पश्चिम यूपी में नोएडा, मेरठ, सहारनपुर जैसे दलित बहुल जिलों में भी बौद्ध धर्म के लोगों की बड़ी संख्या है. 

देश में बौद्धों की जनसंख्या तेजू से बढ़ी है, जिसमें अधिकांश नवबौद्ध यानि हिंदू दलितों से धर्म बदल कर बने है. बौद्ध के सबसे ज्यादा लोग महाराष्ट्र में हैं और उसके बाद दूसरे नंबर पर यूपी नवबौद्ध हैं. पूरे देश में 1991 से 2011 के बीच बौद्धों की आबादी में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यही वजह है कि बीजेपी की नजर हिंदू वोटों के साथ-साथ बौद्ध धर्म के वोटों पर भी है, जो बसपा या फिर दूसरी दलित पार्टियों के साथ हैं. 

पूर्वांचल साधने के सियासी प्लान

वहीं, कुशीनगर के जरिए पूर्वांचल को भी साधने का दांव माना जा रहा है. देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है तो यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी माना जाता है. इसी फॉर्मूले से लगातार दो लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली बीजेपी मिशन-2022 के लिए पूर्वांचल में पैठ बनाने की कोशिश में है. इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले पांच दिन में दो बड़े कार्यक्रम कर पूर्वांचल में चुनावी माहौल बनाने की कवायद करेंगे.

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पूर्वांचल बीजेपी का अभी भी मजबूत गढ़ माना जाता है, जिसकी सबसे बड़ी वजह पीएम नरेंद्र मोदी का वाराणसी का सांसद होना और गोरखपुर से सीएम योगी का होना है. ऐसे में यूपी में चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वांचल में करीब छह जनसभाएं कराने की रूप रेखा खींची गई है. प्रधानमंत्री इस दौरान विकास की सौगात देंगे. साथ ही केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाकर मिशन 2022 को सफल बनाने की अपील करेंगे. 

पूर्वांचल में 164 विधानसभा सीटें आती हैं

पूर्वांचल की जंग फतह करने के बाद ही यूपी की सत्ता पर कोई पार्टी काबिज हो सकती है, क्योंकि सूबे की 33 फीसदी सीटें इसी इलाके की हैं. यूपी के 28 जिले पूर्वांचल में आते हैं, जिनमें कुल 164 विधानसभा सीटें हैं. 2017 के चुनाव में पूर्वांचल की 164 में से बीजेपी ने 115 सीट पर कब्जा जमाया था जबकि सपा ने 17, बसपा ने 14, कांग्रेस को 2 और अन्य को 16 सीटें मिली थी.

हालांकि, पिछले तीन दशक में पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा. वह एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव में एक का साथ छोड़कर दूसरे का साथ पकड़ता रहा है. यही वजह है कि बीजेपी 2022 के चुनाव में अपने गढ़ को मजबूत करने में जुट गई है. 

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