लालू के बेटे तेजप्रताप ने आखिर क्यों कर दी बगावत ? चुनाव में भारी न पड़ जाएं पारिवारिक झगड़े

लालू यादव के बडे़ बेटे तेजप्रताप यादव के तेवर कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. तेजप्रताप यादव इसलिए खफा हैं क्योंकि बड़े बेटे होने के बावजूद न तो घर में और न ही पार्टी में उनकी सुनी जाती हैं. समय-समय पर तेजप्रताप यादव का दर्द जुबां पर आ ही जाता हैं. तेजप्रताप को इस बात का दुख है कि कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता. इ

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तेजप्रताप यादव तेजप्रताप यादव

सुजीत झा

  • पटना,
  • 02 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST

लालू यादव के बडे़ बेटे तेजप्रताप यादव के तेवर कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. तेजप्रताप यादव इसलिए खफा हैं क्योंकि बड़े बेटे होने के बावजूद न तो घर में और न ही पार्टी में उनकी सुनी जाती हैं. समय-समय पर तेजप्रताप यादव का दर्द जुबां पर आ ही जाता हैं. तेजप्रताप को इस बात का दुख है कि कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता. इसकी शुरूआत साल 2015 महागठबंधन की सरकार में तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री बनाने और उसके बाद पार्टी की कमान उन्हें सौपने के साथ शुरू हुई थी.

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तेजप्रताप अपना बगावती तेवर इसलिए भी दिखा रहे हैं ताकि लोग उन्हें गंभीरता से लें. तेजप्रताप के इस बागावती तेवर से परिवार पर तो संकट है ही लेकिन इससे महागठबंधन के नेता भी हिल गए हैं. उनका मानना है कि चुनाव के वक्त इस तरह के परिवारिक झगड़े का असर कहीं वोट बैंक पर न पड़ जाए.

हालांकि तेजप्रताप ने जिन मुद्दों को उठाया है उसके पीछे की कहानी जो भी हो लेकिन उन्होंने शिवहर लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार को लेकर गंभीर सवाल उठाए. एलजेपी से वैशाली से सांसद रामा सिंह को आरजेडी टिकट दे रही है. जबकि तेजप्रताप अंगेश सिंह को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं. सांसद रामा सिंह का अपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वो हमेशा एलजेपी में रहे हैं और आरजेडी की खिलाफत करते रहे हैं. ऐसे में तेजप्रताप का मानना है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता को टिकट मिलना चाहिए न कि बाहर से आए उम्मीदवारों को.

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तेजप्रताप को जहानाबाद सीट से सुरेन्द्र यादव को आरजेडी का उम्मीदवार बनाने पर भी आपत्ति है. उनका कहना है कि सुरेन्द्र यादव लगातार तीन चुनावों से हार रहे हैं ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाकर पार्टी क्या संदेश देना चाहती है. हांलाकि सुरेन्द्र यादव और तेजप्रताप के बीच तना-तनी कुछ दिन पहले से चल रही है. दोनों का आवास पटना के स्टैंड रोड पर अगल-बगल में ही है. बताया जाता है कि सुरेन्द्र यादव के आवास पर बारात आई थी और गाने बाजे के शोरगुल को लेकर दोनों के समर्थक आपस में भिड़ भी गए थे. उसकी तल्खी आज भी बरकरार है.

तेजप्रताप ने स्पष्ट कहा है कि अपने छोटे भाई को वो अर्जुन मानते हैं और खुद का उनका सारथी कृष्ण लेकिन अर्जुन गलत लोगों के चक्कर में फंस गया है. तेजप्रताप का कहना है कि तेजस्वी के इर्दगर्द के लोग पार्टी को बर्बाद कर देना चाहते हैं ऐसे में मैं चुप बैठकर देख नहीं सकता. इसलिए मैंने लालू राबड़ी मोर्चा बनाया है और इस मोर्चा को पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी का आशीर्वाद प्राप्त है.

तेजप्रताप अपने ससुर चंद्रिका राय को सारण से टिकट देने पर भी नाराज हैं. वो चाहते हैं कि इस पारिवारिक सीट पर कोई परिवार का लडे़. उन्होंने राबड़ी देवी से अपील भी की है कि वो सारण से चुनाव लडे़ं, अगर वो नहीं लड़ती हैं तो तेजप्रताप खुद अपने ससुर के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लडे़ंगे. तेजप्रताप की शादी चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या से हुए अभी एक साल भी नहीं गुजरे कि मामला तलाक तक जा पहुंचा. तलाक की अर्जी देने के बाद से तेजप्रताप कभी अपने घर 10 सर्कुलर रोड नहीं गए.

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हांलाकि तेजप्रताप यादव के इस बगावती तेवर का असर आरजेडी पर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि तेजप्रताप के साथ न तो कोई आरजेडी का विधायक साथ है, ना ही कोई सांसद. आरजेडी का मतलब है लालू यादव. लालू यादव अभी जेल में हैं पर यह तय है कि जब तक उनकी तरफ से कोई संदेश नहीं आता, तब तक पार्टी तेजस्वी यादव को ही नेता मानती रहेगी. राजद के इस आपसी लड़ाई में विरोधियों को निशाना साधने का भरपूर मौका मिल  रहा है.

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