लोकसभा चुनाव में फेक न्यूज और फर्जी Like का खेल, जानिए इनकी कीमत

फेसबुक ने फेक अकाउंट की पहचान कर इसे बंद करने का अभियान भी चलाया है. इसके बाद भी यह धंधा जारी है. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने पाया कि यह मापदंड पर्याप्त नहीं हो सकता. ऐसे में इंडिया टुडे की एसआईटी ने कुछ फेक न्यूज इंडस्ट्री का खुलासा किया.

Advertisement
सोशल मीडिया पर ढाई रुपये में एक लाइक सोशल मीडिया पर ढाई रुपये में एक लाइक

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

नॉर्थ मेसिडोनिया के बॉल्कन नेशन में जिस तरह फर्जी खबरें चलाई गईं उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. इसी तरह 2016 में अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव में जिस तरह ट्रंप के पक्ष में अभियान चलाया गया वह आज भी मुद्दा बना हुआ है. भारत में भी कुछ इसी तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से लेकर फर्जी लाइक्स की तमाम शिकायतें आ रही हैं. इसे लेकर इंडिया टुडे ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई जिसमें पता चला कि 1.50 रुपये से लेकर 2.50 रुपये तक में एक लाइक बेचा जा रहा है.

Advertisement

फेसबुक ने ऐसे कई अकाउंट की पहचान कर इसे बंद करने का अभियान भी चलाया है. इसके बाद भी यह धंधा जारी है. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने पाया कि यह मापदंड पर्याप्त नहीं हो सकता. ऐसे में इंडिया टुडे की एसआईटी ने कुछ फेक न्यूज इंडस्ट्री का खुलासा किया है, जो शहरों में बड़े ही शातिराना तरीके से फेक न्यूज फैलाने का काम कर रहे हैं.

इंडिया टुडे की इन्वेस्टिगेशन टीम ने पाया कि ये फेक इंडस्ट्री सारे फोन को एक सेंट्रल टर्मिनल से कनेक्ट कर अलग-अलग क्लाइंट्स के लिए बोगस ऑनलाइन ट्रैफिक का इंतजाम करती हैं. इनके क्लाइंट लिस्ट में बिजनेसमैन से लेकर सियासी नेता तक शामिल होते हैं. भारत में ऐसे कई क्लिक फार्म चलाए जा रहे हैं, जो सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर क्लाइंट्स को काल्पनिक लोकप्रियता दिलाने का काम करते हैं.

Advertisement

क्लिक फार्म 'नेबरहुड'

इंडिया टुडे की इन्वेस्टिगेशन टीम को ऐसा ही एक क्लिक फार्म 'नेबरहुड' रोहिणी दिल्ली में मिला जिसको चंदर ऑपरेट करते हैं. जब उनसे टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी यूनिट ग्राहकों की ऑनलाइन भीड़ बढ़ाती है. चंदर ने अपनी कंपनी के काम को विस्तार में समझाना शुरू किया. बताया कि मान लीजिए अगर किसी उत्पाद बाजार में व्यापार कम हो रहा है, उसकी बिक्री कम है तो हम उस उत्पाद को ज्यादा प्रोमोट करते हैं और उस उत्पाद पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ाने के लिए हम कई तरह के ऑफर का भी इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए अलग से चार्ज करते हैं. 

जब इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने पूछा कि इसके लिए कितना खर्च आएगा, तो उन्होंने बताया कि इसके लिए हम एक पैमाना तय करते हैं. सबसे पहले हम वीडियो की साइज चेक करते हैं, हमारा लाइव कमेंट इस पर तय होता है कि कटेंट कितना बड़ा है. जब चंदर से पूछा गया कि क्या उनके क्लिक फार्म से नकारात्मक अभियान चलाकर विपक्षी पार्टी को खत्म किया जा सकता है, तो चंदर ने कहा बिल्कुल. 

चंदर ने बताया कि सभी फर्जी लाइक्स और कमेंट्स के बारे में क्लाइंट्स को नोटिफाइ भी किया जाता है. चंदर ने अपने सहकर्मी मनीष के साथ एक डेमो दिखाया कि कैसे वो एक विज्ञापन से ऑनलाइन ट्रैफिक को बढ़ाते हैं. उन्होंने बताया कि आप पांच क्लिक कर सकते हैं, बाकी ये आप पर निर्भर करता है कि आप कितना क्लिक चाहते हैं. अगर आप 50 क्लिक चाहते हैं, तो हमारे पास प्रमोट ऐप है, जो इस तरह की सुविधा के लिए होता है. मनीष ने दिखाया कि कैसे क्लाइंट्स की जरूरत के हिसाब से क्लिक भेजा जाता है, साथ ही दिखाया कि कैसे 10 और अधिक जोड़कर क्लिक को बढ़ाया जाता, जो मल्टीपल संख्या में 85-86 क्लिक देखे जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि मांग के अनुसार 1,000 मोबाइलों के सेटअप की व्यवस्था की जा सकती है, इसलिए अगर आप हमें एक लिंक, वीडियो या एक टेक्स्ट देते हैं, तो हमारी टीम इसे तुरंत एक्टिव कर देगी और आपको हिट मिलना शुरू हो जाएगा.

Advertisement

एक अन्य क्लिक फार्म बीपीओ लीवे

एक अन्य क्लिक फार्म पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन में बीपीओ लीवे के नाम से है, जो ऑनलाइन पॉपुलैरिटी को बढ़ाने जैसे कामों का करता है. इसके बिजनेस हेड ज्ञान ने इंडिया टुडे के इन्वेस्टीगेटिव रिपोर्टस को बताया कि उनके ज्यादातर क्लाइंट्स राजनेता हैं. 

उन्होंने ऑफर देते हुए कहा कि अगर आपको 5 लाख लाइक्स चाहिए, तो मैं शाम तक आपको 5 लाख लाइक्स दे सकता हूं. उन्होंने कहा कि मैं यह प्रतिदिन सर्विस के बारे में बता रहा हूं. हालांकि, सबकुछ बजट पर निर्भर करता है.

उसने यह भी कबूल किया कि उसके ग्राहक के तौर पर झारखंड के नेता भी शामिल थे. ज्ञान ने बताया कि यह सबकुछ मोबाइल हैंडसेट से किया जाता है. उन्होंने बताया कि हमारा काम पहले से ही झारखंड में है. यदि आप चाहें तो वहां जाकर खुद भी देख सकते हैं.

ज्ञान ने टेक्निक के बारे में बताया

उन्होंने बताया कि मान लीजिए कि मैंने फेसबुक पर कोई पोस्ट साझा किया और मनोज ने इस पोस्ट को नहीं देखा लेकिन फिर भी उस पोस्ट पर मनोज का लाइक दिख रहा है. ऐसे ही बताया कि मान लो आपने भी वह पोस्ट नहीं देखा फिर भी आपका लाइक उस पोस्ट पर दिखेगा. इसी प्रकार 50 हजार से 1 लाख लोग ऐसे हो सकते हैं जिनके लाइक्स दिखेंगे, लेकिन उन्हें उस पोस्ट के बारे में कुछ पता नहीं होगा.

Advertisement

लीवे बीपीओ के टेक्निकल हेड अमित ने क्लिक फार्म की ऑनलाइन दुनिया से इंडिया टुडे की एसआईटी को रूबरू कराया. उन्होंने बताया कि फोन एक साथ तार से जोड़ देते हैं. 10 या 50 जितने भी मोबाइल हो सभी एक ही पीसी से लिंक्ड कर देते हैं. इस काम में 4-5 लोग होते हैं. सभी फोन के लिए एक अलग SIM होता है, इसका मतलब सभी का एक अपना IP address होगा. 100 फोन मतलब 100 IPs.उन्होंने बताया कि इसमें सभी फेक फॉलोवर्स होते हैं, लेकिन ऐसा करने पर फॉलोवर्स का एक बड़ा तबका दिखाता है.

महाराष्ट्र की डिजिटल मार्केटिंग कंपनी

हाउजत (Howzat) महाराष्ट्र थाने की बड़ी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी है, जिसके डायरेक्टर जैक्सन रॉबिन ने इसके अंतर्गत होने वाले बिजनेस का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि मान लो कि फेसबुक के लिए आप 30 दिनों का ऑफर दे रहे हैं, तो एक लाइक के लिए 1.50 से 2.50 चार्ज होगा. आगे बताया कि लाइक उतने दिन तक आपको मिलता रहेगा, इस बीच बंद नहीं होगा. आगे कहा कि अगर आप 10 लाख रुपये खर्च करते हैं तो आपके पास 5 लाख या 6 लाख लाइक्स आएंगे.  

रॉबिन ने यह भी खुलासा किया कि कैसे वह नकली लाइक के लिए बॉट्स (bots) को आउटसोर्स करेंगे. उन्होंने बताया कि हमें बॉट्स (bots) मिलता है और फिर उस बॉट्स से आपको पोस्ट पर कमेंट्स मिलता है. आगे कहा कि इस तरह मैं आपके लिए वहां वेंडर्स की व्यवस्था कर सकता हूं, जससे कि आपको कोई दिक्कत न हो. उन्होंने बताया कि हम फेसबुक पर एक लाइक के लिए 1.50 से 2.50 रुपये चार्ज करते हैं.

Advertisement

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »