कर्नाटक का किंग बनने की चाह में कुमारस्वामी, BJP-कांग्रेस की राह में रोड़े

कुमारस्वामी विधानसभा चुनाव में दो सीटों से मैदान में हैं. इसमें एक रामानगर और दूसरी चन्नपट्टण सीट शामिल है. वर्ष 2013 में उन्हें रामानगर पर 40 हजार वोटों से जीत मिली थी, लेकिन उनकी पत्नी अनीता कुमारस्वामी चन्नपट्टण सीट से हार गई थी.

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कुमारस्वामी और एचडी देवगौड़ा कुमारस्वामी और एचडी देवगौड़ा

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2018,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

एचडी कुमारस्वामी को राजनीति अपने पिता एचडी देवगौड़ा से विरासत में मिली है. जद-एस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कुमारस्वामी एक दशक बाद फिर किंगमेकर बनने के लिए पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं. वे पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं.

कुमारस्वामी इस रणनीति पर काम कर रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी किसी भी सूरत में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में न आ सके. और त्रिशंकु नतीजे आने पर कुमारस्वामी अपनी अहम भूमिका अदा कर सकें.

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पुराने मैसूर क्षेत्र जिसे दक्षिणी कर्नाटक भी कहा जाता है, जेडीएस का सबसे मजबूत क्षेत्र माना जाता है. मैसूर, हासन, मंड्या और तुमकुर जिले सहित बेंगलुरु के सीमावर्ती क्षेत्रों में कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस का प्रभाव क्षेत्र है. उनका सारा दारोमदार इसी क्षेत्र पर निर्भर भी है.

कुमारस्वामी विधानसभा चुनाव में दो सीटों से मैदान में हैं. इसमें एक रामानगर और दूसरी चन्नपट्टण सीट शामिल है. वर्ष 2013 में उन्हें रामानगर पर 40 हजार वोटों से जीत मिली थी, लेकिन उनकी पत्नी अनीता कुमारस्वामी चन्नपट्टण सीट से हार गई थी.

हार्ट ऑपरेशन कराने के महज छह माह बाद ही ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे कुमारस्वामी का एक ही मकसद है, बीजेपी-कांग्रेस को सीधी जीत से रोकना. जेडीएस चाहती है कि अगर विधानसभा त्रिशंकु होगी तो वह कर्नाटक में फिर से किंगमेकर बन जाएगी. बता दें कि कुमारस्वामी पहले बिना बहुमत का आंकड़ा पाए कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को हासिल कर चुके हैं.

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2006 में कांग्रेस के साथ मतभेद के बाद कुमारस्वामी ने गठबंधन तोड़कर बीजेपी से हाथ मिलाया. तय हुआ कि दोनों दल 20-20 माह सरकार चलाएंगे. पहले कुमारस्वामी सीएम की कुर्सी पर बैठे लेकिन अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने बीजेपी को समर्थन देने से इनकार कर दिया और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा.

कुमारस्वामी के दाहिने हाथ माने जाने वाले चेलुवराय स्वामी और जमीर अहमद खान को कुछ माह पहले कांग्रेस ने अपने दल में शामिल कर लिया है. अगर बीजेपी या कांग्रेस में से कोई भी दल पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाता है तो जेडीएस के सामने अस्तित्व का संकट आ जाएगा.

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