बांका जिला: BJP बनाने लगी पैठ, RJD के सामने साख बचाने की चुनौती

बांका जिले में कभी कांग्रेस का वर्चस्व हुआ करता था. लेकिन आरजेडी के उदय के साथ ही कांग्रेस का पतन शुरू हो गया जो अब तक जारी है. बीजेपी ने यहां अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है. बांका जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं. ये हैं- अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया और बेलहर.

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बांका जिला में कई ऐतिहासिक स्थल हैं बांका जिला में कई ऐतिहासिक स्थल हैं

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:47 AM IST
  • बांका सीट से 2015 में बीजेपी ने दर्ज की थी जीत
  • बांका जिला में हैं कुल पांच विधानसभा सीटें
  • जिले में मंदर पर्वत है ऐतिहासिक, बोली जाती है अंगिका

बिहार में चुनावी मुनादी होने वाली है. सभी सियासी दल जनता को फिर से सब्जबाग दिखाने लगे हैं. सत्तारूढ़ जेडीयू-बीजेपी चुनावी वादों को नई चाशनी में डुबोकर लोगों के बीच फिर से पहुंच रहे हैं और अगले पांच साल फिर से सेवा करने का अवसर देने की बात कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर आरजेडी नीतीश सरकार की कमियां गिना रही है. राज्य के बांका जिले की बात करें तो कभी कांग्रेस के दबदबे वाले इस जिले में अब आरजेडी और जेडीयू में टक्कर रहती है. झारखंड से सटे इस जिले का अधिकतर इलाका पठारी है. 

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राजनीतिक पृष्ठभूमि
बांका जिले में कभी कांग्रेस का वर्चस्व हुआ करता था. लेकिन आरजेडी के उदय के साथ ही कांग्रेस का पतन शुरू हो गया जो अब तक जारी है. बीजेपी ने यहां अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है. बांका जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं. ये हैं- अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया और बेलहर. धोरैया अनुसूचित जाति (एससी) सुरक्षित सीट है जबकि कटोरिया अनुसूचित जनजाति (एसटी) रिजर्व सीट है. बांका जिले में एसटी की आबादी 75 हजार से ज्यादा है. वहीं इस जिले में एक लोकसभा सीट है. 2019 के चुनाव में यहां से जेडीयू के गिरिधारी यादव 477788 वोटों के साथ सबसे ऊपर थे. 

सामाजिक तानाबाना
ऐतिहासिक पहचान की बात करें तो यहां मंदर पर्वत काफी प्रसिद्ध है. स्कंद पुराण के मुताबिक 700 फीट ऊंचे इस  पर्वत का संबंध समुद्र मंथन से है. पर्वत पर ही दो जैन मंदिर हैं, जहां जैन अनुयायी वासुसपूज्य की पूजा करने आते हैं. मकर संक्राति के मौके पर लगने वाला बौंसी मेला दूर-दूर तक जाना जाता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की जनसंख्या 2034763 है. जिले की साक्षरता दर 58.17 फीसदी है. जिले में मुख्य रूप से खेती ही अर्थव्यवस्था का जरिया है. इस इलाके में मुख्यरूप से अंगिका बोली जाती है.  

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बांका संसदीय क्षेत्र 3,020 वर्ग किमी में फैला है. यहां प्रखंड की संख्या 11 और 2 नगर निगम हैं. इस क्षेत्र में 2 हजार गांव आते हैं. साक्षरता 58.17 प्रतिशत और लिंग अनुपात 907 है. बांका जिले को भौगोलिक रूप से भी जान लेते हैं. बिहार के दक्षिण-पूर्व में मौजूद इस जिले की पूर्वी और दक्षिण सीमाएं झारखण्ड के गोड्डा और देवघर जिले से मिलती हैं. जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 305621 हेक्टेयर है. 21 फरवरी 1991 को अस्तित्व में आया ये जिला पहले भागलपुर का ही हिस्सा था. जिले का 60 फीसदी हिस्सा पठारी इलाके में आता है.

2015 का जनादेश
बांका विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी राम नारायण मंडल ने 52379 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. वहीं आरजेडी प्रत्याशी जफरुल 48649 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे. वहीं अमरपुर से जेडीयू के जनार्दन मांझी 73707 वोटों के साथ विजयी हुए थे. दूसरे नंबर पर 61934 वोटों के साथ बीजेपी प्रत्याशी मृणाल रहे. धोरैया सीट से जेडीयू के मनीष कुमार 68858 वोटों के साथ सबसे आगे रहे. दूसरे नंबर पर 44704 वोटों के साथ बीएलएसपी के भूदेव रहे. कटोरिया सीट से आरजेडी की स्वीटी सीमा 54760 वोटों के साथ विजयी हुई थीं. बीजेपी की निक्की हेमब्रम 44423 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे. बेलहर सीट से जेडीयू प्रत्याशी गिरिधारी 70348 वोटों के साथ पहले और बीजेपी के मनोज 54157 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे.
 

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