बंगाल चुनाव: आखिर टीएमसी नेता के घर कैसे पहुंच गई ईवीएम और वीवीपैट?

बंगाल के हावड़ा इलाके में बीती रात एक ईवीएम तृणमूल कांग्रेस के नेता के घर से मिला, जिसका बाद भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया. शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने एक्शन लिया और अफसर को सस्पेंड कर दिया. टीएमसी नेता के घर ईवीएम मिलने की पूरी स्टोरी क्या है, जानिए...

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टीएमसी नेता के घर मिली थीं ईवीएम (फोटो: ANI) टीएमसी नेता के घर मिली थीं ईवीएम (फोटो: ANI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST
  • बंगाल में आज तीसरे चरण का मतदान
  • टीएमसी नेता के घर ईवीएम मिलने पर बवाल

पश्चिम बंगाल के चुनाव का तीसरा चरण जारी है, पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की कतारें हैं. लेकिन एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है. बंगाल के हावड़ा इलाके में बीती रात एक ईवीएम तृणमूल कांग्रेस के नेता के घर से मिला, जिसका बाद भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया. शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने एक्शन लिया और अफसर को सस्पेंड कर दिया. टीएमसी नेता के घर ईवीएम मिलने की पूरी स्टोरी क्या है, जानिए...

दरअसल, हावड़ा जिले के उलबेरिया इलाके में तृणमूल कांग्रेस के नेता गौतम घोष के घर से ग्रामीणों ने ईवीएम मशीन, 4 वीवीपैट की मशीनों को बरामद किया. ये कांड बंगाल की विधानसभा सीट नंबर 177 के सेक्टर 17 में हुआ है. 

इस मामले में चुनाव आयोग ने शुरुआती जांच की है. आयोग ने जांच में पाया है कि सेक्टर ऑफिसर तपन सरकार रिजर्व ईवीएम और वीवीपैट के साथ अपने सेक्टर में मौजूद थे. वो रात में अपने रिश्तेदार के घर जाकर सोए, तब मशीनें अपने साथ ही ले गए. ये रिश्तेदार कोई और नहीं, टीएमसी के नेता ही थे. 

ईवीएम का टीएमसी नेता के घर पाए जाना, चुनाव आयोग के लिए किरकिरी का विषय बना. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, ये एक बड़ा उल्लंघन है. यही कारण है कि तपन सरकार को सस्पेंड कर दिया गया है, साथ ही मामला दर्ज कर आरोप फ्रेम किए गए हैं. 

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चुनाव आयोग ने इस मामले में सेक्टर ऑफिसर तपन सरकार के साथ-साथ पुलिस की पूरी टुकड़ी को भी सस्पेंड कर दिया है. चुनाव आयोग कई अन्य अफसरों पर भी एक्शन ले सकता है. हालांकि, आयोग का कहना है कि जो ईवीएम मिली हैं, वो रिजर्व की थीं. ऐसे में उनका वोटिंग से कोई लेना-देना नहीं है. 

लेकिन अब चुनाव आयोग के जनरल ऑब्ज़र्वर नीरज पवन की निगरानी में इन मशीनों को सील कर अलग जगह ले जाया गया है. हालांकि, सवाल अब भी खड़े हो रहे हैं कि जब रिजर्व मशीनें आयोग की कस्टडी में रहती हैं, तो अफसर इन्हें टीएमसी नेता के घर तक लेकर कैसे पहुंचे. 

 

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