जयंत की दोस्ती बीजेपी के लिए नई टेंशन, पश्चिमी यूपी में कट सकता है कई विधायकों का पत्ता

आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी के एनडीए के साथ आने से सियासी कुनबा जरूर बढ़ गया है, लेकिन बीजेपी के विधायकों की टेंशन बढ़ गई है. आरएलडी 2027 में पश्चिमी यूपी में उन तमाम सीटों पर नजर लगाए हुए हैं, जिस पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे संतुलन बनाएगी?

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जयंत चौधरी से दोस्ती बीजेपी विधायकों को महंगी न पड़ जाए (Photo-ITG) जयंत चौधरी से दोस्ती बीजेपी विधायकों को महंगी न पड़ जाए (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की 'सियासी प्रयोगशाला' पश्चिमी यूपी बना रहा है. आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी को साथ लेकर बीजेपी ने पश्चिमी यूपी की सियासत में अपने एनडीए का कुनबा बढ़ा लिया है, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग से टिकट वितरण तक की चुनौती खड़ी हो गई है. 

आरएलडी से गठबंधन के चलते पश्चिमी यूपी में बीजेपी के कई मौजूदा विधायकों की सीट पर संकट गहरा गया है. जयंत चौधरी से दोस्ती बनाए रखने के लिए बीजेपी को अपने एक दर्जन से ज्यादा सेंटिग विधायकों की सीट देनी पड़ सकती है? 

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2022 में जयंत चौधरी ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे और आरएलडी 8 सीटें जीती थी. इसके बाद एक सीट उपचुनाव में जीती है, जिसे मिलाकर आरएलडी के पास 9 विधायक हैं. इस तरह आरएलडी अपनी जीती हुई सीटों के साथ-साथ उन सीटो पर भी नजर गढ़ाए हुए हैं, जिस पर बीजेपी का कब्जा है. ऐसे में आरएलडी को साथ बनाए रखने के लिए बीजेपी को ही त्याग करना होगा? 

बीजेपी के लिए जयंत से सीट शेयरिंग का पेच
उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी अब बीजेपी के साथ हैं. 2027 का चुनाव बीजेपी के साथ ही मिलकर लड़ने का प्लान बनाया है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सुलझाना आसान नहीं है. 2022 में सपा के साथ रहते हुए आरएलडी ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें ज्यादतर सीटें पश्चिमी यूपी की रही हैं. आरएलडी ने भले ही अब गठबंधन का साथी बदल लिया हो, लेकिन सीट शेयरिंग में बहुत ज्यादा समझौता करने के मूड में नहीं है. 

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आरएलडी के एक बड़े नेता ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में हम भले ही 2 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हो गए गए थे, लेकिन 2027 चुनाव में 35 सीट से कम पर पार्टी समझौता नहीं करेगी. इसके लिए आरएलडी की तरफ से 2002 में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाले फार्मूले की याद दिला रही है. 2002 में आरएलडी ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, उस समय आरएलडी ने 38 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. इसमें आरएलडी 14 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. यही वजह है कि आरएलडी एक बार फिर से उतनी ही सीटें मांग रही हैं. 

पिछले ढाई दशक में यूपी की सियासत बहुत बदल गई है, जिसके चलते आरएलडी को उसके इच्छा के मुताबिक बीजेपी सीटें छोड़ेगी, यह मुश्किल है. आरएलडी को सीटें देने का मतलब है कि फिर बीजेपी के दूसरे सहयोगी भी ज्यादा सीटों की डिमांड रखेंगे. इस लिहाज से बीजेपी 2027 में आरएलडी को बहुत ज्यादा से ज्यादा 15 से 18 सीटें ही दे सकती है, लेकिन इस पर जयंत चौधरी रजामंद होंगे? 

जयंत की दोस्ती में बीजेपी विधायकों पर खतरा
जयंत चौधरी के साथ दोस्ती को बनाए रखने में बीजेपी के कई विधायकों की सीटों पर संकट गहरा सकता है. 2022 में आरएलडी ने शामली जिले में शामली और थाना भवन, मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना, पुरकाजी और मीरापुर, बागपत की छपरौली, हाथरस की सादाबाद और मेरठ की सिवालखास सहित आठ सीटों पर जीती थी. इसके बाद आरएलडी ने मुजफ्फरनगर की खतौली सीट जीती थी.

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आरएलडी अपनी कब्जे वाली 9 सीटों पर चुनाव लड़ने के साथ-साथ बागपत, गाजियाबाद, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर, अमरोहा, हाथरस नोएडा और आगरा जिले की सीटों पर चुनाव लड़ने की प्लानिंग कर रखी है. आरएलडी के चलते बीजेपी के कई मौजूदा विधायकों की सीट पर खतरा मंडरा सकता है. 

यूपी विधानसभा चुनाव के करीब एक साल पहले आरएलडी ने अपनी पसंद की सीटों की फेहरिस्त बनाकर दावा ठोकना शुरू कर दिया है. आरएलडी के संभावित कैंडिडेटों ने तो बाकायदा सीट अपने कोटे में मानकर प्रचार भी करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते बीजेपी के कई नेता और विधायक कशमकश की स्थिति में नजर आ रहे. ऐसे में बीजेपी के लिए आरएलडी के लिए अपने मौजूदा विधायकों की सीटें छोड़नी पड़ सकती है. 

बीजेपी कई विधायकों की सीट पर संकट गहराया
पश्चिमी यूपी की सियासत को देखते हुए, आरएलडी एक अहम फैक्टर है. केसी त्यागी के आरएलडी में आने के बाद किठौर, हस्तिनापुर और मुरादनगर के अलावा बागपत की तीनों अन्य सीटों पर बीजेपी के लिए सियासी संकट गहरा गया है. गाजियाबाद की लोनी सीट पर बीजेपी के नंद किशोर विधायक हैं, जिसे आरएलडी 2027 में बीजेपी से लेना चाहेगी. 2022 में आरएलडी बहुत मामूली वोटों से लोनी सीट हारी थी, जिसके चलते उसकी नजर लगी हुई है. 

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मोदीनगर की सीट पर भी आरएलडी की नजर है, जहां से बीजेपी की विधायक डा. मंजू शिवाच है. 2012 से 2017 तक आरएलडी से विधायक रहे सुदेश शर्मा मुरादनगर की सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में डॉ. मंजू शिवाच के लिए टिकट बचाना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा हस्तिनापुर और सरधना की सीट पर भी जयंत चौधरी की नजर है, जिसके चलते बीजेपी के नेता कशमकश की स्थिति हैं. 

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