बंगाल से तमिलनाडु और असम से केरल तक... किस दल की क्या चुनावी चुनौती? 5 राज्यों का समझें गणित

निर्वाचन आयोग आज शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करेगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी. बंगाल में इस बार ममता की प्रतिष्ठा, तो दक्षिण में क्षेत्रीय दलों और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

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चुनाव आयोग आज 5 राज्यों के चुनावों की तारीख का ऐलान करेगा. (Photo-ITG) चुनाव आयोग आज 5 राज्यों के चुनावों की तारीख का ऐलान करेगा. (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST

देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान आज होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने शाम चार बजे के बीच दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के चुनावी तारीखों का आधिकारिक ऐलान हो जाएगा. इन सभी चुनावी राज्यों में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके साथ ही सरकारें किसी भी नई योजना या लोक-लुभावन घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहना सकेंगी.

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असम विधानसभा में 126 सीटें, केरल में 140, तमिलनाडु में 234, पश्चिम बंगाल में 294 और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा की 30 सीटें है.  इन राज्यों में कहीं सत्ता बचाने की चुनौती है तो कहीं पहली बार इतिहास रचने की कोशिश. 

देश के इन पांच राज्यों के चुनावी नतीजे और राजनीतिक गतिविधियों का सिर्फ इन्हीं सूबे के सियासी नहीं तय होगा बल्कि देश दशा और दिशा भी तय होने वाली है.  पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी अब तक सत्ता में नहीं आ सकी जबकि असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सत्ता में आने को बेताब है. ऐसे में बंगाल से लेकर केरल और तमिलनाडु तक किस तरह की क्यों चुनौती और क्या सियासी गणित है? 

बंगाल में ममता की अग्निपरीक्षा तो बीजेपी की चुनौती कम नहीं
पश्चिम बंगाल की सत्ता पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 सालों से काबिज हैं. 2026 के चुनाव में अगर वो फिर जीतती है तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी. ऐसा करने वाली ममता देश की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी, लेकिन इस चुनाव में उनके सामने बीडेपी मुख्य चुनौती बनी हुई है. ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं और टीएमसी लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. ऐसे में ममता बनर्जी की कोशिश लगातार चौथी जीत के लिए तो बीजेपी हरहाल में जीत के लिए बेताब. 

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बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई, 2026 को खत्म हो रहा है. बंगाल में कुल 294 विधासनभा सीटें है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थी तो बीजेपी को सिर्फ 77 सीटें मिली थी. ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपनी सत्ता को बचाए रखने की परीक्षा है तो लेफ्ट और कांग्रेस को अपने सियासी वजूद को बचाए रखने का चुनाव है. 

बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चुनौती इसीलिए हो गई है कि कांग्रेस और वाम दलों के एकदम पस्त होने से भी बढ़ी है जिनका वोट उसकी तरफ़ आने के ज़्यादा टीएमसी की तरफ़ गया है. पिछले दो चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत सिर्फ डेढ़ फीसदी बढ़ा तो तृणमूल ने तीन फीसदी ज्यादा वोट हासिल किया है. इसके बावजूद ममता बनर्जी के 15 साल तक सत्ता में रहने के चलते सत्ता विरोधी लहर भी है, जिसे बीजेपी खूब भुनाने की कोशिश में है. 


तमिलनाडु में इंडिया और एनडीए गठबंधन की परीक्षा
दक्षिण भारत का तमिलनाडु देश का इकलौता राज्य है. जहां पिछले छह दशकों से कांग्रेस या बीजेपी की सरकार नहीं बनी. यहां की राजनीति पर डीएमके और AIADMK का ही सियासी दबदबा रहा है. इस बार बीजेपी का AIADMK के साथ गठबंधन है तो कांग्रेस और डीएमके साथ हैं. इसके अलावा सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK भी चुनावी मैदान में है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.

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तमिलनाडु का विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 10 मई 2026 को खत्म हो रहा है. राज्य में कुल 234 विधानसभा सीटें है. 2021 में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने 133 सीट पर जीत दर्ज कर सत्ता में लौटी थी. डीएमके के साथ गठबंधन में कांग्रेस भी 18 सीटें जीतने में कामयाब रही. सूबे की सत्ता पर 10 सालों तक काबिज रही AIADMK महज 66 सीटें जीत पाई थी. AIADMK के साथ गठबंधन करने के बाद बीजेपी चार सीटें पाई थी.

2026 के विधानसभा चुनाव में काफी कुछ बदला हुआ है.  स्टालिन के लिए अपनी सरकार को बनाए रखने की अग्निपरीक्षा है तो AIADMK भी अपनी वापसी के लिए बेताब. इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सिर्फ एनडीए और इंडिया ब्लॉक में ही नहीं बल्कि तीसरा फ्रंट भी मैदान में है.  तमिल एक्टर थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम बनाकर डीएमके बनाम AIADMK की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. सुपर स्टार विजय किसका खेल बनाएंगे और किसका बिगाड़ेंगे, ये तय नहीं है, जिसके चलते डीएमके और AIADMK दोनों ही अलर्ट हैं. 

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 केरल: लेफ्ट के सामने आखिरी दुर्ग को बचाए रखने की चुनौती
केरल देश का एकमात्र राज्य है, जहां अभी भी लेफ्ट की सरकार है. यहां पर लंबे समय से सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाममोर्चा ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इतिहास तोड़ा. इस बार केरल में लेफ्ट के लिए अपने सियासी दुर्ग को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ अपने दस साल से सियासी वनवास को खत्म करने का दांव में है. 
कांग्रेस गठबंधन इस बार एंटी-इनकम्बेंसी को मुद्दा बनाकर वापसी की जद्दोजहद कर रहा है. बीजेपी अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है. हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट और दिसंबर 2025 में तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जा जमाकर अपनी ताकत का एहसास कर दिया है, जिसे लेकर यूडीएफ और एलडीएफ दोनों के सामने चुनौती है. 

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 केरल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. केरल में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने वाले वाम मोर्चा के सामने भी यूडीएफ चुनौती है.  केरल में पिनराई विजयन अगर तीसरी बार सफल होते हैं तो रेकॉर्ड बन जाएगा, लेकिन हार जाते हैं तो लेफ्ट का देश से सफाया हो जाएगा.  केरल का चुनाव लेफ्ट के अगुवाई एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के बीच है. 

साल 2021 के चुनाव में एलडीएफ ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी. इस बार कांग्रेस की कोशिश सत्ता में वापसी की है.  प्रियंका गांधी केरल से सांसद हैं तो राहुल गांधी के राइट हैंड माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल भी केरल से आते हैं. इस लिहाज से कांग्रेस सत्ता में आने के लिए बेताब है तो बीजेपी की अपना सियासी जनाधार बढ़ाए रखने में जुटी है.

असम में बीजेपी की हैट्रिक या कांग्रेस की वापसी 
असम में बीजेपी 10 साल से सत्ता में है और तीसरी फिर से आने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है. बीजेपी 2016 से असम की सत्ता में पहली बार आई थी और 2021 में इतिहास रच दिया था. बीजेपी ने केरल की 126 सीटों वाली विधानसभा में 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. यहां बांग्लादेशी घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और असमिया पहचान बड़े मुद्दे हैं. भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 8 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है. कांग्रेस की कोशिश अपने सियासी वनवास को खत्म करने की है.

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असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 20 मई 2026 को खत्म हो रहा है. ऐसे में 2021 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 126 में से 75 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता बरकरार रखी थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की थी. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा है. बीजेपी उन्हें चेहरा बनाकर चुनावी में उतरी है. 

असम में एक तीसरा फ्रंट मुस्लिम सियासत के बदरुद्दीन अजमल का है, लेकिन बीजेपी के सामने 10 साल की सत्ता में रहने को लेकर कुछ नाराजगी है तो कांग्रेस के सामने नेतृत्व को लेकर टेंशन. बीजेपी जिस तरह से हिंदुत्व का दांव खेलकर खेल रही है, उस वजह से कांग्रेस के लिए असम की सत्ता में वापसी करना एक बड़ी चुनौती हो गई है. 

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पुडुचेरी में एनडीए बनाम इंडिया ब्लॉक की फाइट 

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 15 जून, 2026 को खत्म हो रहा है.  पुडुचेरी देश की सबसे कम सीटों वाली विधानसभा है. 2021 में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करके AINRC-BJP गठबंधन ने सरकार बनाई थी.  एन. रंगासामी मुख्यमंत्री बने. यह पहली बार था जब बीजेपी सीधे तौर पर पुडुचेरी में सत्ता का हिस्सा बनी थी. इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन कर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है.

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2021 के पिछले चुनाव में ऑल-इंडिया एनआर कांग्रेस (ANRC) और भाजपा के गठबंधन ने कुल 30 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए सरकार बनाई थी. ANRC ने 10 और भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी इसके उलट कांग्रेस केवल 2 सीटें ही जीत पाई थी, यहां वर्तमान में ANRC संस्थापक एन रंगासामी मुख्यमंत्री हैं. इस बार भी मुकाबला एनडीए बनाम इंडिया ब्लॉक की है. ऐसे में दोनों के सामने चुनौती है, बीजेपी गठबंधन सत्ता को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहा है तो कांग्रेस वापसी के लिए बेताब है.

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