‘भय OUT भरोसा IN’: नारों, बूथों और भरोसा कार्ड से BJP ने कैसे लिखी बंगाल जीत की स्क्रिप्ट

बंगाल में BJP की जीत के पीछे बूथ स्तर की मजबूत तैयारी, महिलाओं और युवाओं तक सीधा संपर्क और आक्रामक प्रचार अहम रहे. पार्टी ने भरोसा कार्ड, परिवर्तन यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अपना संदेश घर-घर पहुंचाया.

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बंगाल में BJP की जीत के पीछे बूथ रणनीति काम आई (Photo: PTI) बंगाल में BJP की जीत के पीछे बूथ रणनीति काम आई (Photo: PTI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:12 AM IST

BJP की बंगाल रणनीति का सबसे बड़ा आधार बूथ मैनेजमेंट रहा. पार्टी के मुताबिक, राज्य के 70,671 बूथों पर बूथ समितियां बनाई गईं, जबकि बाकी जगहों पर बूथ अध्यक्ष नियुक्त किए गए. इन बूथ समितियों पर करीब 8,76,765 कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई.

पार्टी ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2021 के विधानसभा चुनाव के विश्लेषण के आधार पर 210 फोकस विधानसभा सीटों की पहचान की. इसके साथ ही बूथ स्तर पर भी विश्लेषण कर फोकस बूथ चिह्नित किए गए. यानी BJP ने सिर्फ बड़े मंचों पर प्रचार नहीं किया, बल्कि हर बूथ पर वोटर तक पहुंचने की अलग रणनीति बनाई.

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महिलाओं तक सीधा संपर्क: ड्रॉइंग रूम बैठक और मातृशक्ति कार्ड

महिला वोटर BJP की रणनीति के केंद्र में रहीं. पार्टी ने बूथ स्तर पर महिलाओं की करीब 1,96,000 ड्रॉइंग रूम बैठकें आयोजित कीं. इसके अलावा ‘मातृशक्ति भरोसा कार्ड’ के जरिए महिलाओं तक सीधा संपर्क किया गया. BJP के मुताबिक, महिलाओं के करीब 1.60 करोड़ फॉर्म भरे गए.

युवा भरोसा कार्ड के साथ मिलाकर कुल 2 करोड़ से अधिक भरोसा कार्ड भरे गए. इस अभियान के जरिए पार्टी ने अपने वादों को सिर्फ घोषणापत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें घर-घर संपर्क अभियान में बदल दिया.

युवाओं के लिए फुटबॉल, रोजगार और ‘चाकरी चाई बांग्ला’

युवा वोटरों को साधने के लिए BJP ने खेल और रोजगार दोनों को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया.‘नरेंद्र कप’ फुटबॉल टूर्नामेंट में पुरुष वर्ग की करीब 1,200 टीमों और लगभग 18,000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. महिला वर्ग में भी 253 टीमों ने भाग लिया. इसमें मुख्य रूप से 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को जोड़ा गया.

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इसके साथ ही पार्टी ने ‘चाकरी चाई बांग्ला’ यानी ‘Bengal Wants Jobs’ अभियान चलाया. यह अभियान 220 विधानसभा क्षेत्रों में रोजगार चाहने वाले युवाओं के पंजीकरण के लिए चलाया गया. BJP ने बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा बनाते हुए युवाओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलाव से रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं.

वंदे मातरम, रामनवमी और पोइला बैसाख से सांस्कृतिक कनेक्ट

BJP ने बंगाल में सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी संदेश को भी चुनावी अभियान का अहम हिस्सा बनाया. वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किए गए. इनके तहत पदयात्रा, पुष्पांजलि, तिरंगा वितरण, सामूहिक गायन और दीप प्रज्वलन जैसे कार्यक्रम हुए. पार्टी के मुताबिक, इन आयोजनों में 1 लाख से अधिक लोग शामिल हुए.

इसके अलावा श्रीरामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव और पोइला बैसाख के अवसर पर BJP कार्यकर्ताओं ने 6,250 स्थानों पर धार्मिक और आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुखों से संपर्क किया. इस दौरान 2 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई.

परिवर्तन यात्रा: 217 विधानसभाओं तक बदलाव का संदेश

BJP ने बंगाल में 9 परिवर्तन यात्राएं निकालीं. इन यात्राओं के जरिए कुल 217 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया गया. इन यात्राओं के दौरान 560 बड़े और छोटे कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें पार्टी के मुताबिक 7 लाख से अधिक लोग जुड़े. परिवर्तन यात्रा का संदेश साफ था - बंगाल में सत्ता परिवर्तन की जरूरत है. यह अभियान BJP के बदलाव वाले नैरेटिव का बड़ा चेहरा बना.

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TMC सरकार के खिलाफ चार्जशीट

चुनाव में BJP ने आरोप-पत्र यानी चार्जशीट को भी बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया. प्रदेश स्तर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार की कथित विफलताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चार्जशीट जारी की. इसके अलावा विधानसभा स्तर पर 220 विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग चार्जशीट जारी की गई. इस रणनीति के जरिए BJP ने राज्य सरकार के खिलाफ आरोपों को स्थानीय मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की.

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प्रवासी बंगाली वोटरों और लोकल नेटवर्क पर फोकस

BJP ने बंगाल से बाहर रहने वाले बंगाली प्रवासियों को भी अभियान से जोड़ा. पार्टी के मुताबिक, 21 प्रदेशों से 9,498 बंगाली प्रवासी पश्चिम बंगाल आकर प्रचार अभियान में शामिल हुए.

इसके साथ ही पार्टी ने 19,250 क्लब और NGO के सदस्यों से संपर्क किया. प्रदेश भर में 8,315 शक्ति केंद्रों पर नुक्कड़ सभाएं भी की गईं. इससे BJP ने पारंपरिक पार्टी ढांचे से बाहर जाकर स्थानीय सामाजिक नेटवर्क तक अपनी पहुंच मजबूत की.

प्रधानमंत्री मोदी, शाह और बड़े नेताओं का हाई-वोल्टेज प्रचार

BJP के चुनावी अभियान में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं की बड़ी भूमिका रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में कुल 19 चुनावी सभाएं कीं और 2 रोड शो किए. झारग्राम में उनका झालमुरी खाना, हुगली नदी में नौका विहार और ठनठनिया कालीबाड़ी मंदिर में दर्शन जैसे क्षण BJP ने बंगाल कनेक्ट के रूप में पेश किए. पार्टी के मुताबिक, झारग्राम में झालमुरी वाला मोमेंट 10 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुल 40 सभा और रोड शो किए. इसके अलावा उन्होंने 4 संगठनात्मक बैठकें कीं, जिनमें सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा की गई. गंगासागर में पूजा और कपिल मुनि आश्रम की यात्रा को भी सांस्कृतिक संदेश के रूप में पेश किया गया.

राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित केंद्रीय नेताओं ने 128 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम किए. BJP शासित राज्यों के 9 मुख्यमंत्रियों ने कुल 101 सभाएं कीं. प्रदेश स्तर पर समिक भट्टाचार्य, शुवेंदु अधिकारी, मिथुन चक्रवर्ती, सुकांत मजूमदार और दिलीप घोष सहित 25 नेताओं ने कुल 232 कार्यक्रम किए.

ब्रिगेड चलो रैली: कोलकाता में शक्ति प्रदर्शन

कोलकाता की ‘ब्रिगेड चलो’ जनसभा BJP के अभियान का बड़ा शक्ति प्रदर्शन बनी. पार्टी के मुताबिक, इस रैली में 7.5 लाख लोगों की उपस्थिति रही. यह रैली सिर्फ भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि इसके जरिए BJP ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल की राजधानी में भी उसके पक्ष में मजबूत माहौल बन रहा है.

‘चुप चाप कमल छाप’: कोलकाता की खास रणनीति

कोलकाता प्रेसीडेंसी क्षेत्र में BJP ने वार्ड स्तर पर वार्ड समितियां बनाईं. बूथों पर BJP के पक्ष में मतदान बढ़ाने के लिए पार्टी संगठन के अलावा अलग से चिह्नित स्थानीय लोगों की टीम लगाई गई.

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इसी रणनीति के तहत ‘चुप चाप कमल छाप’ का नारा इस्तेमाल किया गया. इसका मकसद उन मतदाताओं तक पहुंचना था जो खुलकर राजनीतिक रुख जाहिर नहीं कर रहे थे, लेकिन मतदान के दिन BJP के पक्ष में आ सकते थे.

BJP का मुख्य नैरेटिव

BJP ने अपने अभियान में तीन नारों को केंद्रीय संदेश बनाया:

  • ‘बाचते चाई, BJP ताई’
  • ‘पलटानों दरकार, चाई BJP सरकार’
  • ‘भय OUT भरोसा IN’

इन नारों के जरिए BJP ने सुरक्षा, बदलाव और भरोसे का संदेश दिया.

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