ममता Vs शुवेंदु... नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में ‘महामुकाबला 2.0’, दांव पर सियासी भविष्य

भवानीपुर सीट 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है, जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधकारी आमने-सामने हैं. इस मुकाबले में जीत सिर्फ सीट नहीं बल्कि बंगाल की सियासत की दिशा तय कर सकती है. आखिरी बार हुए मुकाबले में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता को हरा दिया था.

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नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर - बंगाल में सत्ता की लड़ाई का सबसे बड़ा मैदान तैयार (Photo: PTI) नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर - बंगाल में सत्ता की लड़ाई का सबसे बड़ा मैदान तैयार (Photo: PTI)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:48 AM IST

2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे चर्चित मुकाबला होगा भवानीपुर में. जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना होगा विपक्ष और बीजेपी शुभेंदु अधिकारी से. यह सिर्फ एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं यह पूरे बंगाल की सत्ता की लड़ाई है. 

2021 में ममता ने अपनी सुरक्षित सीट भवानीपुर छोड़कर शुभेंदु के गढ़ नंदीग्राम में उन्हें चुनौती दी थी और हार गई थीं. हालांकि बाद में भवानीपुर से भारी अंतर से जीतकर मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन नंदीग्राम की वह हार आज भी उनके लिए एक चुभन है. इस बार ममता उसी शुभेंदु को अपने घर में हराकर वह हिसाब चुकता करना चाहती हैं.

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BJP को दिख रही है उम्मीद

भवानीपुर में मिली-जुली आबादी है. बंगाली, गुजराती, सिख, मुसलमान सब यहां रहते हैं. 2021 में TMC ने यहां करीब 59,000 वोटों की बड़ी बढ़त बनाई थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर सिर्फ 8,200 वोट रह गई. 

BJP के लिए यही घटता अंतर उम्मीद की किरण है. वार्ड 63, 70, 71, 72 और 74 में BJP मजबूत है. खासकर गैर-बंगाली व्यापारी वर्ग उनके साथ है. वहीं वार्ड 73, 77 और 82 में TMC का दबदबा है जहां अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका में हैं.

"बाहरी" बनाम "हारी हुई" - दोनों तरफ से वार

शुभेंदु ममता को "नंदीग्राम में हारी हुई उम्मीदवार" कहते हैं. TMC का पलटवार है कि शुभेंदु दक्षिण कोलकाता की शहरी जिंदगी से अनजान "बाहरी" हैं.

जनता क्या सोचती है?

भवानीपुर के लोगों से बात करने पर मिली-जुली राय सामने आई. मुस्लिम दुकानदार बरकत कहते हैं, "दीदी ने आम आदमी के लिए काम किया है, हमारी कम्युनिटी उनके साथ है."

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वोटर तन्मय का कहना है, "ममता का पूरा ध्यान इस इलाके पर है, शुभेंदु बाहरी हैं. लेकिन सच बात यह है कि जो भी जीते, विकास चाहिए."

गृहिणी अनुरंजिता अग्रवाल बोलीं, "महंगाई, गैस की किल्लत, टूटी सड़कें. हमें ऐसी सरकार चाहिए जो रसोई की चिंता करे, सिर्फ रैलियों की नहीं."

यह भी पढ़ें: भवानीपुर में ममता बनर्जी को सीधी चुनौती… नंदीग्राम के हीरो शुभेंदु अधिकारी को उतार BJP ने खेला बड़ा दांव

दोनों पक्षों का दावा

TMC के वरिष्ठ नेता शोवनदेव चट्टोपाध्याय, जिन्होंने 2011 में ममता के लिए यह सीट छोड़ी थी बोले, "ममता भवानीपुर की बेटी हैं. शुभेंदु को हम अच्छी तरह जानते हैं और जब दुश्मन को जानते हो तो आधा काम हो जाता है."

BJP नेता अग्निमित्र पॉल ने जवाब दिया, "ममता का वक्त खत्म हो चुका है. न पानी, न नौकरी, न सुरक्षा. इस बार जनता जवाब देगी."

असली मुद्दा क्या है?

भवानीपुर के लोग अब फ्री की योजनाओं से आगे जाकर रोजगार और इंडस्ट्री की मांग कर रहे हैं. जनता का साफ संदेश है, "फ्री की चीजें देने की राजनीति" नहीं, "नौकरी की राजनीति" चाहिए.

ममता के लिए यह जीत नंदीग्राम का दाग धोने का मौका है. शुभेंदु के लिए यह साबित करने का वक्त है कि BJP शहरी कोलकाता में भी TMC को चुनौती दे सकती है. भवानीपुर का यह मुकाबला तय करेगा बंगाल का अगला सियासी भविष्य क्या होगा.

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