पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आए ज्यादातर एग्जिट पोल बीजेपी को बढ़त मिलने का संकेत दे रहे हैं. बीजेपी ने इस चुनाव के लिए रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही बनानी शुरू कर दी थी. 14 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक प्रतीकात्मक संदेश दिया था कि 'गंगा बिहार से बंगाल की ओर बहती है' इस संदेश को पार्टी के अंदर बंगाल में अपनी ताकत झोंकने के आह्वान के रूप में देखा गया.
इसके बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की विफलताओं को मुद्दा बनाते हुए एक आक्रामक सांगठनिक और राजनीतिक अभियान चलाया.
पहले चरण के मतदान के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि बीजेपी 152 में से 110 सीटों तक जीत सकती है.
सत्ता विरोधी लहर
जमीनी हकीकत बताती है कि टीएमसी सरकार के खिलाफ 15 साल की सत्ता विरोधी लहर का असर दिख रहा है. मतदाताओं के बीच स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों के साथ-साथ 'अल्पसंख्यक तुष्टिकरण' के आरोपों ने भी राजनीतिक हवा को गरमा दिया है. मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाता तृणमूल कांग्रेस के पीछे एकजुट नजर आ रहे हैं, वहीं कई हिंदू बहुल क्षेत्रों में सरकार की कथित नीतियों के खिलाफ नाराजगी देखी गई है. बीजेपी ने डर के माहौल को भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है, जिससे मतदान के पैटर्न पर असर पड़ सकता है.
'बांग्ला अस्मिता' और ममता बनर्जी का प्रभाव
बीजेपी की आक्रामक रणनीति के बावजूद ममता बनर्जी का 'बंगाली पहचान' या 'बांग्ला अस्मिता' वाला कार्ड अब भी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर रहा है. कई मतदाता ममता बनर्जी को राष्ट्रीय राजनीति में सबसे प्रमुख बंगाली चेहरा मानते हैं, जो बीजेपी की पूर्ण लहर को सीमित करने का काम कर सकता है. साल 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं थीं, तब वामपंथ के खिलाफ गुस्सा खुलकर सामने आ रहा था, लेकिन 2026 में मतदाता ज्यादा सतर्क और खामोश नजर आ रहे हैं.
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क्या बंगाल में होगा ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन?
अगर एग्जिट पोल के नतीजे हकीकत में बदलते हैं और बीजेपी सरकार बनाने में सफल होती है, तो यह बंगाल की राजनीति में एक युगांतकारी मोड़ होगा. यह उस राज्य में बीजेपी के दशकों पुराने संघर्ष की परिणति होगी, जहां वह लंबे वक्त से सत्ता पाने के लिए संघर्ष कर रही है. हालांकि, बंगाली पहचान और मौजूदा सरकार के खिलाफ गुस्से के बीच का संतुलन ही यह तय करेगा कि 4 मई को नतीजे किसके पक्ष में झुकेंगे.
पीयूष मिश्रा