Exclusive: 'बीजेपी में रहते मेरी सिंगिंग पर लगा दी गई थी रोक', बाबुल सुप्रियो का बड़ा खुलासा

गायक और नेता बाबुल सुप्रियो ने कहा कि बीजेपी में रहते उनके सिंगिंग करियर पर रोक लग गई थी. उन्होंने बताया कि मंत्री बनने के बाद उन्हें मंच पर गाने और विदेश में परफॉर्म करने से रोका गया. साल 2021 में टीएमसी ज्वाइन करने के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें संगीत जारी रखने की पूरी आजादी दी. अब बाबुल सुप्रियो राज्यसभा की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपने सिंगिंग करियर की नई शुरुआत कर रहे हैं.

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बीजेपी में रहते हुए दब गई थी आवाज, बाबुल सुप्रियो ने बयां किया अपना दर्द (File Photo: PTI) बीजेपी में रहते हुए दब गई थी आवाज, बाबुल सुप्रियो ने बयां किया अपना दर्द (File Photo: PTI)

सना फरज़ीन

  • कोलकाता,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

गायक और राजनेता बाबुल सुप्रियो ने अपनी संगीत यात्रा और राजनीति को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. खास बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि जब वह भारतीय जनता पार्टी में थे, तो उनके गाना गाने और परफॉर्म करने पर एक तरह की पाबंदी लगा दी गई थी. बाबुल के मुताबिक, बीजेपी में रहते हुए उनका सिंगिंग करियर पूरी तरह थम गया था, लेकिन साल 2021 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने के बाद उन्हें फिर से अपनी आवाज को दुनिया तक पहुंचाने की आजादी मिली है.

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बाबुल सुप्रियो ने बताया कि जब उन्होंने 2014 में राजनीति की दुनिया में कदम रखा था, तो उन्हें लगा था कि संगीत और समाजसेवा साथ-साथ चलेंगे. उन्होंने सोचा था कि जैसे लोग उनसे अलग-अलग गानों की फरमाइश करते हैं, वैसे ही राजनीति में लोग उनसे स्कूल, सड़क और पानी जैसे अच्छे कामों की मांग करेंगे. उन्हें लगा था कि दोनों करियर लगभग एक जैसे ही हैं. लेकिन मंत्री बनने के बाद उन्हें अलग अनुभव हुए. उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि उनके बॉस को लगता था कि अगर मंत्रिमंडल का कोई सदस्य स्टेज पर नाच-गा रहा है या विदेश में परफॉर्म कर रहा है, तो इससे सरकार की गरिमा कम हो सकती है.

इमेज के नाम पर दबाया गया मेरा कलाकार- बाबुल सुप्रियो

अपने उस दौर को याद करते हुए बाबुल ने कहा, 'जब सरकार की इमेज का सवाल आया, तो मुझे एक मंत्री के तौर पर उनकी बात माननी पड़ी और मैंने परफॉर्म करना बंद कर दिया. लेकिन उस दौरान बंद दरवाजों के पीछे संगीत के लिए मेरी भूख और मेरा रियाज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया था.' उन्होंने यह भी साफ किया कि वह सत्ता के लिए राजनीति में नहीं आए थे, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी और सुनील दत्त जैसे दिग्गजों से प्रेरित होकर कुछ अच्छा करने आए थे. लेकिन बीजेपी में उनके काम को वह पहचान नहीं मिली जिसके वह हकदार थे, इसलिए उन्होंने वहां से निकलने का फैसला किया.

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बाबुल सुप्रियो ने बताया कि साल 2021 में जब वह ममता बनर्जी के साथ जुड़े, तो हालात पूरी तरह बदल गए. उन्होंने कहा, 'ममता दीदी खुद दिल से एक कलाकार हैं, वह लिखती हैं, गाती हैं और पेंटिंग भी करती हैं. जब मैं टीएमसी में आया, तो उन्होंने मुझसे साफ कहा कि बाबुल, कोई टेंशन मत लो, तुम खुलकर गाओ.' उनसे मिली इसी छूट और प्यार की बदौलत वह आज एक बार फिर अपने पुराने सुपरहिट गाने 'इंतहा हो गई इंतजार की' के नए वर्जन के साथ वापसी कर रहे हैं.

फिलहाल बाबुल सुप्रियो राज्यसभा सांसद के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अब अपने गायकी के करियर के बेस्ट फॉर्म में हैं और आने वाले 10 साल संगीत को पूरी तरह समर्पित करना चाहते हैं. उनका कहना है कि राज्यसभा में होने की वजह से उन्हें रोजमर्रा की राजनीतिक भागदौड़ से थोड़ी राहत मिली है, जिससे वह अब अपनी ड्यूटी और संगीत, दोनों को पूरा समय दे पा रहे हैं.
 

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