जानिए क्यों यहां की बुजुर्ग महिलाएं सीख रही हैं पढ़ना-लिखना

बिहार के खगड़िया जिले के रौन गांव की बुजुर्ग महिलाएं आज कल पढ़ना-लिखना सीख रही हैं. उनके इस कदम के पीछे का कारण जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

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बिहार के खगड़िया जिले के रौन गांव की बुजुर्ग महिलाएं आज कल पढ़ना-लिखना सीख रही हैं बिहार के खगड़िया जिले के रौन गांव की बुजुर्ग महिलाएं आज कल पढ़ना-लिखना सीख रही हैं

स्नेहा

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

बिहार के खगड़ियां के एक गांव में इन दिनों लोगों पर पढ़ाई का जुनून सवार है. गांव की बुजुर्ग महिलाएं स्कूल जा रही हैं. खास बात ये है कि इन महिलाओँ को पढाने वाली टीचर छोटी उम्र की गांव की बच्चियां हैं. जानिए गांव में कैसे हुआ ये चमत्कार...

ताउम्र घर का काम संभालने वाली इन ने चंद दिनों में ही ये साबित कर दिया है कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती है. इनकी हाथों ने अभी-अभी कलम पकड़ना सीखा है, पढ़ना सीखा है. ये महिलाएं खगड़िया जिले के रौन गांव की रहनेवाली हैं. यहां महिलाएं हिंदी, इंग्लिश और उर्दू पढ़ना और लिखना सीख रही हैं.

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इनके मुताबिक शिक्षा के आभाव के चलते गांव में मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ इन्हें ना मिलकर बिचौलियों को मिल रहा है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि इन बुजुर्ग महिलाओं को पढ़ाने वाली टीचर छोटी उम्र की लड़कियां है. जूनियर टीचर्स में से एक लड़की तो खुद तीसरी क्लास में पढ़ती है, लेकिन इसे उम्मीद है कि रौन गांव की एक दिन जरुर साक्षर होगी.

इस गांव में महिलाओं के पढ़ने का अंदाज काफी जुदा है. टोली बनाकर बैठी ये महिलाएं मिलकर जुलकर पढ़ना, लिखना सीख रही है. पढ़ाई के साथ घर के काम को भी संभाल रही है, ये साबित कर रही हैं कि महिला चाहे तो किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है.

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