NEET UG विवाद: अब सलाखों के पीछे नीट घोटाले के मास्टरमाइंड! अब 15 जून को अगली पेशी

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में रोज नई याचिकाएं दाखिल हो रही हैं और परीक्षा के पूरे पैटर्न (जैसे पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) को बदलने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर पेपर लीक करने वाले इस सिंडिकेट के किरदारों पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है. अब देखना यह होगा कि 15 जून की पेशी से पहले सीबीआई की चार्जशीट में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं.

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राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला: खत्म हुई CBI रिमांड, डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस शाह समेत तीनों आरोपी भेजे गए जेल राउज एवेन्यू कोर्ट का बड़ा फैसला: खत्म हुई CBI रिमांड, डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस शाह समेत तीनों आरोपी भेजे गए जेल

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में इस वक्त की एक बहुत बड़ी और अहम खबर देश की राजधानी से आ रही है. देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस कथित घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कस्टडी खत्म होने के बाद, आज सभी मुख्य आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत यानी जेल भेज दिया है.

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कोर्ट ने नहीं दी राहत, अब सलाखों के पीछे कटेंगी रातें

जिन तीन मुख्य आरोपियों की सीबीआई रिमांड आज खत्म हुई थी, उनमें डॉ. मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद कुमार शाह और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं. सीबीआई ने इन तीनों को अपनी हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद विशेष अदालत के समक्ष पेश किया था. अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दलील दी कि मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए इन आरोपियों का जेल में रहना जरूरी है, जिसके बाद कोर्ट ने जांच एजेंसी की मांग को स्वीकार करते हुए तीनों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश सुना दिया.

15 जून को होगी अगली सुनवाई 
अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब इन तीनों आरोपियों को 15 जून 2026 तक जेल में ही वक्त गुजारना होगा. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर 15 जून को इन्हें दोबारा अदालत के सामने पेश किया जाए.

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यह खबर इस पूरे नीट विवाद में एक बड़ा पड़ाव है. एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में रोज नई याचिकाएं दाखिल हो रही हैं और परीक्षा के पूरे पैटर्न (जैसे पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) को बदलने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर पेपर लीक करने वाले इस सिंडिकेट के किरदारों पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है. अब देखना यह होगा कि 15 जून की पेशी से पहले सीबीआई की चार्जशीट में और कौन-कौन से बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आते हैं.

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