नीट (NEET UG 2026) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बाद सरकार ने री-एग्जाम (21 जून) के लिए जो चक्रव्यूह तैयार किया है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है. अब 22 जून तक के लिए टेलीग्राम सर्विस पर ताला लगा दिया गया है, ताकि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की लीक या धोखाधड़ी की अफवाहों को रोका जा सके.
इतना ही नहीं, इस बार पेपर लीक माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए जमीन से लेकर आसमान तक अभेद्य सुरक्षा का इंतजाम है. शेड्यूल के मुताबिक, भारतीय वायु सेना (IAF) के विमानों के जरिए प्रश्नपत्रों को एयरलिफ्ट करके अलग-अलग शहरों तक पहुंचाया जा रहा है. वहीं, जमीन पर सुरक्षा की कमान CISF, CRPF और स्थानीय पुलिस के हाथों में है, जो टू लेयर सिक्योरिटी में पेपर को ट्रेजरी बैंकों से परीक्षा केंद्रों तक ले जाएंगे.
यह सब देखकर बहुत से लोगों को लग रहा होगा कि क्या किसी पढ़ाई-लिखाई से जुड़े एग्जाम के लिए इतनी बड़ी 'मिलिट्री लेवल' की तैयारी की जरूरत है? लेकिन वैश्विक रिसर्च बताती है कि भारत ऐसा करने वाला अकेला देश नहीं है. दुनिया के कई देशों में जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की बात आती है, तो वहां की सरकारें सचमुच 'युद्ध स्तर' पर उतर आती हैं. आइए जानते हैं दुनिया के उन देशों के बारे में, जहां एग्जाम के दिनों में सेना और इंटरनेट शटडाउन आम बात है.
चीन का 'गाओकाओ', जहां जेलों में छपते हैं पेपर और तैनात होती है SWAT टीम
दुनिया के सबसे कठिन और बड़े एग्जाम्स में से एक चीन का 'गाओकाओ' (Gaokao) है. भारत की नीट परीक्षा में जहां करीब 24 लाख छात्र बैठते हैं, वहीं चीन के इस इम्तिहान में हर साल 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा छात्र अपनी किस्मत आजमाते हैं. गाओकाओ को स्टेट सीक्रेट का दर्जा प्राप्त है. इसके प्रश्नपत्रों को ड्राफ्ट करने वाले प्रोफेसर्स को किसी अज्ञात सैन्य ठिकाने या सीक्रेट लोकेशन पर पूरी तरह आइसोलेट कर दिया जाता है, जहां उनका इंटरनेट और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है.
जेलों में छपाई: सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि गाओकाओ के पेपर बैंकों के कैश से भी ज्यादा कड़ी सुरक्षा में और विशेष रूप से चुनिंदा हाई-सिक्योरिटी जेलों (Prisons) के भीतर छापे जाते हैं.
ड्रोन और फेशियल रिकग्निशन: एग्जाम सेंटर के बाहर चीन की कुख्यात एलीट पुलिस यूनिट 'SWAT' (Special Weapons and Tactics) मुस्तैद रहती है. आसमान में ड्रोन उड़ते हैं जो वायरलेस सिग्नल और किसी भी संदिग्ध फ्रीक्वेंसी को ट्रैक करते हैं ताकि कोई ब्लूटूथ या स्मार्ट ग्लास से चैटिंग न कर सके. वहां चीटिंग करने पर 3 से 7 साल तक की जेल का प्रावधान है.
अल्जीरिया जहां परीक्षा शुरू होते ही होता है पूरे देश का इंटरनेट ठप
अगर आपको लगता है कि भारत में सिर्फ टेलीग्राम बंद होना बड़ी बात है, तो आपको अल्जीरिया का हाल देखना चाहिए. उत्तरी अफ्रीका के इस देश में 'बैकालॉरिएट' (Baccalaureate - हाई स्कूल डिप्लोमा) की परीक्षाओं के दौरान सरकार किसी एक ऐप को नहीं, बल्कि पूरे देश के इंटरनेट को ही कुछ घंटों के लिए पूरी तरह 'ब्लैकआउट' कर देती है.
अल्जीरिया में यह सिलसिला पिछले कई सालों से लगातार चल रहा है. परीक्षा के दिनों में दिन में दो बार, सुबह और दोपहर के वक्त, फेसबुक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसी सभी सोशल मीडिया और मैसेजिंग सर्विसेज को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया जाता है. वहां की सरकार का साफ कहना है कि ऑनलाइन आंसर-की और पेपर सर्कुलेट होने से रोकने के लिए उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.
सीरिया और इराक में भी होता है 'शटडाउन'
यहां सरकारी टेलीकॉम कंपनी बकायदा'शटडाउन शेड्यूल'जारी करती है. मिडिल ईस्ट के इन दोनों देशों में भी राष्ट्रीय परीक्षाओं की साख बचाने के लिए डिजिटल लॉकडाउन का सहारा लिया जाता है. ससीरिया की सरकारी टेलीकॉम कंपनी तो बाकायदा परीक्षा से पहले अपने सोशल मीडिया पेज पर एक आधिकारिक टाइमटेबल जारी करती है. इसमें लिखा होता है कि किस तारीख को, किस विषय की परीक्षा के दौरान, कितने घंटे के लिए देश का इंटरनेट पूरी तरह बंद रहेगा.
वहीं इराक में भी सुबह के वक्त जब छात्र परीक्षा हॉल में होते हैं, तो पूरे देश की कनेक्टिविटी काट दी जाती है. वहां सेना और सुरक्षा बलों की गाड़ियां परीक्षा केंद्रों के बाहर गश्त लगाती हैं ताकि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता से कोई खिलवाड़ न हो सके.
आजतक एजुकेशन डेस्क