10 लाख में खरीदा, 15 लाख में बेचा... NEET पेपर लीक के इन 7 किरदारों का 'मनी-ट्रेल' देखकर घूम जाएगा सिर!

नीट 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है जिसमें अब तक मनीषा मंढारे, पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे सहित सात आरोपी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क महाराष्ट्र से लेकर हरियाणा और राजस्थान तक फैला था, जहां पेपर को ₹10 लाख से ₹15 लाख तक की कीमत पर बेचने का खुलासा हुआ. आइए समझें कैसे चला मनी-ट्रेल...

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NEET परीक्षा प्रणाली को दीमक की तरह चाटने वाले इन 7 चेहरों की क्या है इनसाइड स्टोरी NEET परीक्षा प्रणाली को दीमक की तरह चाटने वाले इन 7 चेहरों की क्या है इनसाइड स्टोरी

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

नीट (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह की थ्योरी वायरल हो रही हैं. कोई इसे कोचिंग माफिया का खेल बता रहा है, तो कोई इसे सिस्टम की मिलीभगत. लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रिमांड कॉपी और प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के आधिकारिक दस्तावेजों ने इस परीक्षा प्रणाली को हैक करने वाले सिंडिकेट का जो सच उजागर किया है, वह किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है.

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जांच में सामने आए सातों नाम मनीषा मंढारे, पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल का पुणे से लेकर हरियाणा और राजस्थान तक क्या कनेक्शन था, आइए सीबीआई की जांच के हवाले से इसका सटीक फैक्ट-चेक करते हैं.

कौन था इस लीक का मुख्य सोर्स

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि पेपर बनाने वाले पैनल ने इसे लीक किया, लेकिन सीबीआई की थ्योरी कुछ और कहती है. इस थ्योरी के अनुसार मनीषा गुरनाथ मंढारे (बॉटनी प्रोफेसर, पुणे) वो नाम है जिसे सीबीआई ने 15 मई को मथुरा के एक होटल से गिरफ्तार किया. मनीषा मंढारे को एनटीए (NTA) ने नीट-2026 के प्रश्नपत्रों को क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद (Translate) करने के लिए एक्सपर्ट पैनल में रखा था. इसी दौरान उन्हें बॉटनी और जूलॉजी के फाइनल पेपर का पूरा एक्सेस मिल गया. उन्होंने देश के भविष्य का सौदा करते हुए इस सीक्रेट कंटेंट को लीक कर दिया.

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दूसरा नाम आया पीवी कुलकर्णी का, जो रिटायर्ड केमिस्ट्री टीचर हैं. कुलकर्णी लातूर के रहने वाले हैं. मंढारे ने पेपर लीक करने के बाद कुलकर्णी से संपर्क किया. कुलकर्णी ने अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में पुणे स्थित अपने घर पर चुनिंदा छात्रों को बुलाया और उन्हें केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्न और उनके सही उत्तर हाथ से लिखकर रटवाए.

ब्यूटी पार्लर की आड़ में हुई ₹10 लाख की डील

इतने बड़े पेपर को बाजार में बेचने के लिए छात्रों और अमीर पैरेंट्स की जरूरत थी, जिसके लिए एक अनोखा सिंडिकेट बनाया गया. अब नाम आया मनीषा संजय वाघमारे का जो पुणे में ब्यूटिशियन है. मनीषा पुणे के सुखसागर नगर में ब्यूटी पार्लर चलाती हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2 साल पहले वे अपनी बेटी का नीट क्लियर कराने के लिए खुद पेपर लीक माफिया के जाल में फंसकर लाखों रुपये गंवा चुकी थीं. इसके बाद वे खुद इस नेटवर्क की एजेंट बन गईं. उन्होंने अपने पार्लर के कस्टमर बेस और सोशल सर्कल का इस्तेमाल कर ऐसे पैरेंट्स ढूंढे जो ₹10 लाख प्रति छात्र देने को तैयार थे.

इस तरह मनीषा वाघमारे ने छात्रों को जोड़ने के लिए अपने पुराने दोस्त और आयुर्वेद डॉक्टर धनंजय लोखंडे को अपने साथ मिलाया. 

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पुणे से नासिक और हरियाणा: कैसे आगे बढ़ा 'मनी-ट्रेल'?

सीबीआई की जांच के मुताबिक, यह पेपर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम के कूटबद्ध (इनक्र‍िप्टेड) नेटवर्क के जरिए उत्तर भारत तक फैल गया. वो कैसे हुआ, ये भी समझ‍िए. 
अब स्टोरी में एंट्री हुई नास‍िक के शुभम खैरनार की. धनंजय लोखंडे ने यह लीक पेपर नासिक में करियर काउंसलिंग का बिजनेस चलाने वाले शुभम खैरनार को दिया. शुभम ने इस पेपर को ₹10 लाख में खरीदा था.

यहां से शुभम खैरनार ने टेलीग्राम नेटवर्क का इस्तेमाल करके ये पेपर हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले यश यादव को ₹15 लाख में बेच दिया. ये पांच लाख रुपये का सीधा मुनाफा था. 

दो भाईयों ने खरीदा पेपर 

इसमें अब आगे राजस्थान के मांगीलाल और दिनेश बिवाल का नाम जुड़ा. ऐसा हुआ कि हरियाणा से यह पेपर राजस्थान के जालौर पहुंचा, जहां मांगीलाल और दिनेश बिवाल नाम के दो भाइयों ने इसे खरीदा. दिनेश बिवाल ने खुद अपने बेटे के लिए यह पेपर भारी कीमत चुकाकर लिया था.

सीकर से हुआ भंडाफोड़

इस पूरे अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब राजस्थान के सीकर में एक हॉस्टल मालिक के बेटे के पास यह पर्चा पहुंचा. हॉस्टल मालिक की मुस्तैदी और पुलिस कंप्लेंट के परिणाम स्वरूप आज सीबीआई इस पूरे नेटवर्क को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है. 17 मई को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्य आरोपी मनीषा मंढारे को 14 दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है.

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लेकिन इस पूरे खुलासे के बाद देश के 22 लाख छात्रों का गुस्सा जायज है. जब छात्र एग्जाम सेंटर जाते हैं, तो उनके जूते-कपड़े तक उतरवा लिए जाते हैं, लेकिन एनटीए के अपने ही एक्सपर्ट्स जब लाखों रुपये के लालच में पेपर बेच देते हैं, तो उस लचर प्रणाली की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं होता.

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