हर साल देश के कोने-कोने से लाखों युवा आंखों में सपने, हाथ में एक शानदार डिग्री और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा लेकर नोएडा आते हैं. उनका मकसद साफ होता है एक अच्छी कंपनी में नौकरी के साथ अच्छी सैलरी और एक आलीशान लाइफस्टाइल होना. नोएडा की ऊंची इमारतें और चमकती हुई सड़कें इन सपनों को सच करने का वादा तो करती हैं, लेकिन इसके पीछे की एक कड़वी हकीकत यह भी है कि यहां आकर लोग जितना कमाते नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा उनकी जेब से खर्च हो जाता है.
इस चकाचौंध के पीछे माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाले एक टेक कपल ने अपनी जिंदगी का एक ऐसा सच शेयर किया है, जो आज के हर कॉर्पोरेट एम्प्लोयी की कहानी सा लगता है. उन्होंने बताया कि इस शहर में अपनी मॉडर्न लाइफस्टाइल को बनाए रखने और पारिवारिक जरूरतों के बीच एक सही बैलेंस बिठाने के लिए उन्हें हर महीने करीब 1.6 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं. यह आंकड़ा केवल एक खर्च नहीं, बल्कि उस मिडिल और अपर-मिडिल क्लास की हकीकत है जो कमाने के मामले में तो टॉप पर है, लेकिन बचत के मामले में आज भी संघर्ष कर रहा है.
कैसे करते हैं फाइनेंशियल प्लानिंग?
छवि माहेश्वरी और उनके पति रिपेश यादव दोनों नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. छवि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के पुरकाजी की रहने वाली हैं जबकि रिपेश उत्तराखंड के जसपुर से हैं. कपल ने 2014 से 2018 के बीच एनआईटी उत्तराखंड से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया. छवि ने बताया कि दोनों ने अपने करियर की शुरुआत 2018 में सैमसंग नोएडा से की थी. इसके बाद 2020 में वे गोल्डमैन सैक्स में गए और फिर 2022 में माइक्रोसॉफ्ट जॉइन कर लिया. उन्होंने कहा कि अब तक का उनका सफर नई चीजें सीखने, आगे बढ़ने और अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ खुद को ढालने का अनुभव रहा है.
सैमसंग से माइक्रोसॉफ्ट का सफर
छवि ने कहा कि हम दोनों माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं. हम दोनों ने लगभग जनवरी 2022 में माइक्रोसॉफ्ट ज्वाइन किया था. बता दें कि कपल करीब 8 साल से नोएडा में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम 2018 से नोएडा में हैं और हाल के दिनों में हम सेक्टर 75,सेंट्रल नोएडा में रहते हैं.
नौकरी के नोएडा ही क्यों?
छवि और रिपेश के लिए नोएडा में रहना जारी रखने का फैसला सिर्फ काम से ही जुड़ा नहीं है. नोएडा में रहने का सबसे बड़ा कारण परिवार के करीब होना भी है. मुजफ्फरनगर यहां से लगभग ढाई घंटे और जसपुर लगभग चार घंटे की दूरी पर है. इससे दोनों परिवारों से संपर्क बनाए रखना आसान हो जाता है, जिससे नोएडा में हमें घर जैसा अपनापन महसूस होता है. काम भी एक कारण था, लेकिन परिवार से जुड़ाव ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई.
इस तरह खर्च होते हैं पैसे
छवि ने बताया कि हम एक 2BHK सेमी-फर्निश्ड अपार्टमेंट में रहते हैं और हर महीने 35 हजार रुपये किराया देते हैं. किराए के अलावा अपार्टमेंट से जुड़े खर्च उनके मासिक बजट का एक अहम हिस्सा है. इनमें रख-रखाव से जुड़े पैसे, बिजली, इंटरनेट और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. छवि ने बताया कि वे इन खर्चों पर करीब 20,000 रुपये प्रति माह खर्च करते हैं.
खाना के लिए खर्च होते हैं इतने पैसे
छवि ने बताया कि किराने और घरेलू सामान पर उनका हर महीने का खर्च करीब 20,000 रुपये आता है. बाहर का खाना, ऑर्डर करना, कैफे जाना और घूमने में भी करीब 20 हजार रूपये खर्च हो जाते हैं.
आने-जाने के लिए कंपनी की कैब पर निर्भर
वहीं, कपल ने बताया कि ऑफिस आने जाने के लिए वह काफी हद तक माइक्रोसॉफ्ट के ट्रांसपोर्ट सुविधा पर निर्भर रहते हैं. हालांकि, कभी कभार वह अपनी गाड़ी का भी इस्तेमाल करते हैं, खासकर घूमने-फिरने के लिए. इसपर उनका खर्च करीब 8 से 12 हजार रुपये होता है. हालांकि, पर्सनल चीजों का खर्च करीब 10 से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाते हैं जिसमें एंटरटेनमेंट,पर्सनल प्रोडक्ट समेत अन्य चीजें शामिल हैं.
हर महीने होता है 1.6 लाख रुपये खर्च
जब उनसे नोएडा में रहते हुए महीने भर के कुल खर्च के बारे में पूछा गया तो, छवि ने बताया कि यह आंकड़ा करीब 1.6 लाख रुपये आता है. जब उनसे सेविंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हम खर्च को ट्रैक करने के लिए किसी ऐप का यूज नहीं करते हैं. इसके बजाय हम एक सिंपल प्लानिंग का यूज करते हैं. हम दोनों हर महीने करीब 80 हजार रुपये संयुक्त खाते में जमा करते हैं.
नोएडा है किफायती
छवि का मानना है कि बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों की तुलना में नोएडा अभी भी काफी किफायती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि 2018 के बाद से शहर में महंगाई काफी बढ़ गई है. उनके मुताबिक, लोग अक्सर नोएडा में बसने से पहले कुछ खर्चों का अनुमान कम लगाते हैं. इनमें रहने के लिए शुल्क, लाइफस्टाइल, बाहर खाने-पीने का खर्च और छोटे-मोटे दैनिक खर्चे शामिल हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क