केजरीवाल सरकार देगी स्कूली बच्चों को 'सीड मनी', आज से लागू हुआ प्लान

इस करिकुलम का एक महत्वपूर्ण कॉम्पोनेन्ट है, सीड मनी प्रोजेक्ट जिसके तहत बच्चों को हजार रुपए दिए जाते हैं ताकि वे अपने अनुसार बिजनेस शुरू करें. खिचड़ीपुर के एक स्कूल हमने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था.

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दिल्ली श‍िक्षामंत्री मनीष सिसोदिया दिल्ली श‍िक्षामंत्री मनीष सिसोदिया

पंकज जैन

  • नई द‍िल्ली ,
  • 07 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST

दिल्ली सरकार के स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं-12वीं के छात्रों को बिजनेस के गुर सिखाने के मकसद से एक अनोखी पहल लांच की शुरुआत की गई है. सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम के तहत बिज़नेस ब्लास्टरर्स प्रोग्राम को लांच किया है. 

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम को इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे हर छात्र अपने नॉलेज को वास्तविक जीवन में उपयोग कर सके. उन्होंने बताया कि ईएमसी की इकाइयों में छात्रों के लिए एंटरप्रेन्योर्स की सफलता की कहानियों को साझा करने के साथ-साथ उन्हें बहुत सी एक्टिविटीज़ भी करने को दी जाती है. इसमें एक माइक्रो-रिसर्च प्रोजेक्ट भी शामिल है. इसके अंतर्गत बच्चे 5 एंटरप्रेन्योर और 5 नौकरी करने वाले आम लोगों से उनके पेशे से संबंधित प्रश्न पूछते है ताकि बच्चे ये समझ बना सकें कि किस पेशे के क्या लाभ और क्या नुकसान है. 

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बिजनेस ब्लास्टरर्स प्रोग्राम के तहत बच्चों को 2-2 हज़ार रुपयों की सीड मनी दी जाएगी. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बच्चों को निवेश करने, उनके अंदर से बिजनेस शुरू करने का डर निकालने और प्रॉफिट कमाने के लिए तैयार करना है और सबसे महत्वपूर्ण बात कि यदि वे प्रॉफिट नहीं भी कमाते है तो वे अपने फेलियर का सामना करना सीखें. 

सिसोदिया ने कहा कि वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली के स्कूल से पढ़ कर निकलने वाले बच्चे नौकरी पाने की लाइन में लगने के बजाय नौकरी देने वालों की श्रेणी में खड़े होंगे. तब जाकर देश 5 ट्रि‍लियन डॉलर इकॉनमी का सपना भी पूरा होगा और देश से बेरोजगारी की समस्या भी खत्म होगी. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं है। हम नाम बदलने में विश्वास नहीं करते बल्कि तस्वीर बदलने में विश्वास रखते हैं.  

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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत युवाओं का देश है लेकिन पढ़े-लिखे बेरोजगारों का देश है. ईएमसी ये तस्वीर बदलेगी और भारत को पढ़े-लिखे सक्षम युवाओं का देश बनाएगी. उन्होंने कहा कि वो दिन दूर नहीं है जब दिल्ली के स्कूलों से निकलने वाला एक-एक बच्चा जॉब मांगेगा नहीं बल्कि जॉब क्रिएट करेगा और यदि वो नौकरी भी करेगा तो वो किसी नौकरी के लिए लाइन में नहीं लगेगा बल्कि नौकरी उनके पीछे भागेगी. 

बेरोजगारी का ज़िक्र करते हुए सिसोदिया ने कहा कि आज भारत में लगभग 25 करोड़ लोग बेघर है पर लाखों सिविल इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं. 18 करोड़ लोग आज भी मुल्क में भूखे सोते हैं और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से निकले बच्चे कह रहे हैं कि हमारे पास काम नहीं है. हम हर साल हजारों केमेस्ट्री पीएचडी पैदा कर रहे है फिर भी देश में दवाइयों की कमी है. यह विडंबना है और सवाल एजुकेशन सिस्टम पर है. एजुकेशन सिस्टम में सबसे बड़ी कमी यही है कि हम अपने बच्चों को नॉलेज तो दे रहे हैं लेकिन एंटरप्रेन्योर माइंडसेट नहीं दिया. 

आगे सिसोदिया ने कहा कि हमारे इन टैलेंटस को विदेशी कंपनियां लेकर चली गई और इससे उस देश के अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ.  आज भारत के हर एक घर में ये सपना देखा जाता है कि कोई जुगाड़ हो जाए तो अमेरिका या यूरोप के किसी देश की कंपनी में नौकरी मिल जाएगी. हम इसके खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे अपने टैलेंट और एंट्रेप्रेंयूरिअल माइंडसेट के साथ भारत में भी ऐसी कंपनी खड़ी कर दें कि अमेरिका और यूरोप के बच्चे भी भारत की इन कम्पनियों में नौकरी करने का सपना देखे. 

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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश में नौकरियां वर्ल्ड बैंक, नीति आयोग की रिपोर्ट और नेताओं के आश्वासन से पैदा नहीं होंगी बल्कि बिजनेस ब्लास्टर और ईएमसी जैसे प्रोग्राम से निकलेगी. इन कार्यक्रमों द्वारा हमारे स्कूलों-कॉलेजों से जॉब सीकर्स की फौज नहीं बल्कि देश के युवाओं को जॉब देने वाले एंत्रप्रेन्योर निकलेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे देश में एक बुनियादी खामी ये है कि जिन इंडस्ट्री पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी है वे बहुत समय पहले ही यूरोपीय और अमेरिकी देशों में शुरू हो चुकी थी. 

हमारे देश में फ्लिपकार्ट की शुरुआत तब हुई जब पूरे विश्व में अमेज़न अपनी पकड़ बना चुका था. हम क्यों नहीं फेसबुक या ट्विटर जैसी कंपनी के बारे में सोच पांए? क्योंकि हमने अपने बच्चों को एंतरप्रेन्योर बनना नहीं सिखाया. मनीष सिसोदिया ने कहा कि, 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी का सपना किसी पीएम या सीएम के कहने से पूरा नहीं होगा बल्कि ईएमसी जैसे प्रोग्राम को अपनाने से होगा और आज इसकी बुनियाद रखने का दिन है. अगर दिल्ली के 1 हजार प्रिंसिपल और 1 हजार ईएमसी कोऑर्डिनेटर अगर चाह लें तो ये काम हो जाएगा और 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के सपने की बुनियाद हमारे स्कूलों में रखी जाएगी. 

आपको बता दें कि आने वाले दिनों में जोनल और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ईएमसी के अंतर्गत बिज़नेस ब्लास्टरर्स प्रोजेक्ट से 100 टॉप प्रोजेक्ट्स के साथ ईएमसी कार्निवाल का आयोजन किया जाएगा. इसे प्रसिद्ध सफल एंटरप्रेन्योर और विश्वविद्यालयों द्वारा बच्चों के मूल्यांकित किया जाएगा. इनमे टॉप 10 प्रोजेक्ट्स में शामिल बच्चों को एनएसयूटी और डीटीयू में बीबीए कोर्स में सीधे दाखिला दिया जाएगा. 

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इसमें 9 प्रोजेक्ट थे. 2 बच्चों ने हैंडीक्राफ्ट बनाने के काम में 2 हजार के इन्वेस्टमेंट को बढाकर  9580 का प्रॉफिट कमाया है. रिफर्बिस्ड मोबाइल फोन के काम में, प्रिंटिंग के काम में, हैंडीक्राफ्ट ज्वेलरी के काम में बच्चों ने प्रॉफिट कमाया. इस प्रयोग में केवल 6 हफ्तों में यह साबित हुआ है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे सफल बिजनेसमैन बन सकते हैं. बेरोजगारी का समाधान ढूंढना है, तो इसे आगे बढ़ाना होगा. कल से यह प्रोजेक्ट पूरी दिल्ली में लागू हो जाएगा और सीड मनी को अब 1 हजार से बढ़ाकर 2 हजार किया जा रहा है.


 

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