1 करोड़ पार! देश की शिक्षा व्यवस्था में पहली बार बना ये महा-रिकॉर्ड

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में 7 जुलाई को एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया, जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था. केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने जैसे ही 'UDISE+ 2025-26' की ताजा रिपोर्ट जारी की, वैसे ही साफ हो गया कि भारत के स्कूल अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड के साथ ही देश में पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले बच्चों को लेकर भी एक बेहद सुखद खबर सामने आई है. आइए जानते हैं क्या है शिक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट में...

Advertisement
घट गया स्कूल छोड़ने का ट्रेंड, जानिए दिल्ली से आई ये बड़ी रिपोर्ट घट गया स्कूल छोड़ने का ट्रेंड, जानिए दिल्ली से आई ये बड़ी रिपोर्ट

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई द‍िल्ली ,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:17 AM IST

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने एक बेहद सकारात्मक और बड़ी रिपोर्ट जारी की है. आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस 'UDISE+ 2025-26' की इस ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्कूलों में विभिन्न स्तरों पर पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले (Dropout) छात्रों की संख्या में भारी और लगातार गिरावट दर्ज की गई है.

इसके साथ ही, देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब देश भर के स्कूलों में कुल शिक्षकों की संख्या 1.02 करोड़ के पार पहुंच गई है. शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2022-23, 2023-24 और 2024-25) की तुलना में अकादमिक वर्ष 2025-26 में ड्रॉपआउट रेट में उल्लेखनीय कमी आई है. आइए जानते हैं आंकड़े.. 

Advertisement

प्रिपरेटरी लेवल- यहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का ग्राफ साल 2024-25 के 2.3 प्रतिशत से घटकर अब 1.8 प्रतिशत पर आ गया है.
माध्यमिक स्तर- सबसे बड़ा सुधार यहां देखा गया है, जहां ड्रॉपआउट रेट 8.2 प्रतिशत से घटकर सीधे 7.0 प्रतिशत पर आ गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट दर्शाती है कि स्कूल अब बच्चों के लिए अधिक सुलभ, मददगार और उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील बन रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे अब स्कूल में दाखिला लेने के बाद लंबे समय तक अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं.  इसमें मिडिल लेवल बच्चों के स्कूल में टिके रहने की दर (Retention Rate) 82.8% से बढ़कर 83.7% हो गई है. वहीं माध्यमिक स्तर में बहुत बड़ा उछाल आया है. यह दर पिछले साल के 47.2% से बढ़कर इस साल 51.9% पर पहुंच गई है.

Advertisement

सरकार का कहना है कि माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या बढ़ने से बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना आसान हुआ है, जिससे यह सुधार देखने को मिला है. हालांकि, बुनियादी (Foundational) और प्रिपरेटरी स्तर पर इसमें मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है.

पहली बार 1 करोड़ के पार हुए शिक्षक 
भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर छूते हुए, देश में स्कूल शिक्षकों की कुल संख्या 1.02 करोड़ से अधिक हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022-23 की तुलना में इस साल शिक्षकों की संख्या में 8.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है. यह कदम देश में छात्र-शिक्षक अनुपात को सुधारने और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने में गेमचेंजर साबित होगा. इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) भी साल 2024-25 के 68.5% से सुधरकर 2025-26 में 71.7% हो गया है.

क्या है UDISE+ रिपोर्ट?
बता दें कि UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) भारत सरकार का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है. इसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है, जो देश भर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र नामांकन और शिक्षकों से जुड़े रियल-टाइम आंकड़े जुटाता है. यह ताजा रिपोर्ट 31 मार्च, 2026 तक स्कूलों द्वारा स्वेच्छा से अपलोड किए गए ऑनलाइन डेटा के आधार पर तैयार की गई है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »