देशभर के लाखों छात्रों को सेवाएं प्रदान करने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर हुए कथित साइबर हमलों के मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. सीबीएसई की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, सीबीएसई की शिकायत पर आईटी एक्ट की धारा 66 तथा धारा 43(एफ) के तहत मामला दर्ज किया गया है. दिल्ली पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर हमलों के पीछे कौन लोग या संगठन शामिल थे.
सीबीएसई ने बुधवार को दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट को औपचारिक शिकायत सौंपी थी. शिकायत में बोर्ड ने बताया कि उसके पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर पिछले तीन दिनों के दौरान कई समन्वित और सुनियोजित साइबर हमले किए गए. बोर्ड के अनुसार यह पोर्टल 2 जून 2026 को शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन, पुनर्मूल्यांकन और अन्य पोस्ट-रिजल्ट सेवाएं उपलब्ध कराना है. इस पोर्टल का उपयोग देशभर के लाखों छात्र करते हैं. ऐसे में इसकी सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित कर सकती थी.
सीबीएसई ने अपनी शिकायत में बताया कि पिछले तीन दिनों के दौरान पोर्टल पर बार-बार साइबर हमले किए गए. इन हमलों में देश और विदेश के विभिन्न आईपी एड्रेस से बड़ी मात्रा में संदिग्ध और दुर्भावनापूर्ण इंटरनेट ट्रैफिक भेजा गया. बोर्ड का मानना है कि हमलावरों का उद्देश्य पोर्टल की कार्यप्रणाली को बाधित करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच रोकना और अनधिकृत तरीके से सूचनाएं प्राप्त करने का प्रयास करना था. बोर्ड ने यह भी कहा कि इन हमलों का स्वरूप अत्यंत संगठित और समन्वित था. यही वजह रही कि मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई से विस्तृत जांच की मांग की गई है.
साइबर सुरक्षा टीमों ने समय रहते नाकाम किए हमलावरों के मंसूबे
हालांकि सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि सभी साइबर हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया. बोर्ड के अनुसार उसकी साइबर सुरक्षा टीमों ने चौबीसों घंटे निगरानी रखी और हर संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया दी. इसी वजह से किसी भी हमले को सिस्टम में सेंध लगाने का मौका नहीं मिला. सीबीएसई ने कहा है कि अब तक की जांच और तकनीकी विश्लेषण में किसी भी प्रकार के डेटा लीक, डेटा ब्रीच या अनधिकृत पहुंच के संकेत नहीं मिले हैं. बोर्ड के डेटाबेस और सभी महत्वपूर्ण प्रणालियां पूरी तरह सुरक्षित हैं. किसी छात्र या अन्य उपयोगकर्ता की जानकारी के साथ किसी प्रकार का समझौता होने की पुष्टि नहीं हुई है.
बोर्ड ने बताया कि इन साइबर हमलों से निपटने में कई प्रमुख संस्थानों और एजेंसियों का सहयोग मिला. साइबर सुरक्षा प्रबंधन में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), सीईआरटी-इन तथा अन्य केंद्रीय सरकारी एजेंसियों ने तकनीकी सहायता प्रदान की. सीबीएसई का कहना है कि पोर्टल पर लगातार निगरानी रखी गई और सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया गया, जिससे हमलावर अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके. बोर्ड ने यह भी कहा कि छात्रों और अभिभावकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सेवाएं सुरक्षित हैं और डेटा पूरी तरह संरक्षित है.
विदेशी आईपी एड्रेस से भी पोर्टल पर हमला करने की कोशिश
इस मामले के सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा और सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. चूंकि यह पोर्टल लाखों छात्रों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर हुआ कोई भी सफल हमला व्यापक असर डाल सकता था. फिलहाल दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसियां साइबर हमलों की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस, तकनीकी तरीकों और हमले के पीछे मौजूद संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं. आने वाले दिनों में जांच से इस पूरे मामले की और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है.
अरविंद ओझा