अब बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम होगा 'मां वाग्देवी भोजपाल व‍िश्व‍विद्यालय', प्रस्ताव पास

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश की सबसे पुरानी सरकारी यूनिवर्सिटी बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी होने वाला है. यूनिवर्सिटी कार्यपरिषद ने इसका एक प्रस्ताव पारित कर दिया है, लेकिन इसे लेकर अब विरोध के सुर भी उठने लगे हैं.

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जानिए क्याे बदला गया यून‍िवर्स‍िटी का नाम जानिए क्याे बदला गया यून‍िवर्स‍िटी का नाम

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

मध्य प्रदेश की सबसे पुरानी सरकारी यूनिवर्सिटी, बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार विवाद इसके नाम को लेकर उठा है. दरअसल, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर माँ वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है, जिसे अब शासन के पास भेजा जाएगा.

अंतिम निर्णय के लिए राजभवन भेजा गया प्रस्ताव
यूनिवर्सिटी के कुलसचिव समर बहादुर सिंह ने आजतक से बात करते हुए बताया कि अंतिम निर्णय के लिए यह प्रस्ताव राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल के पास भेजा जा रहा है, क्योंकि नाम बदलने के लिए जो नोटिफिकेशन है वो शासन स्तर से ही जारी होगा. कार्यपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी गई, जिसके बाद इसे आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए राजभवन भेजा जा रहा है.

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विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि भोपाल का प्राचीन नाम भोजपाल रहा है और इसका सीधा संबंध परमार वंश के प्रतापी शासक राजा भोज से है. नाम परिवर्तन के प्रस्ताव में राजा भोज के शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है. प्रस्ताव के अनुसार, राजा भोज ने अपने शासनकाल में ज्ञान और विद्या के प्रसार को विशेष महत्व दिया था तथा भोजपाल क्षेत्र को सांस्कृतिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

प्रस्ताव में मौलाना बरकतउल्लाह के योगदान का जिक्र
वहीं प्रस्ताव में मौलाना बरकतउल्लाह को लेकर लिखा गया है कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाल में पैदा हुए तथा यहीं पढ़ाई की थी, परंतु उनका लगभग पूरा जीवन विदेशों में बीता. वे उर्दू, पर्शियन तथा अंग्रेज़ी एवं इस्लाम के विद्वान थे. भारत की स्वतंत्रता के लिए गदर पार्टी में भी उन्होंने काम किया. सोवियत संघ में उन्होंने आध्यात्मिक समाजवाद नाम से एक नया विचार लागू किया जो कि इस्लाम और मार्क्सवाद का सम्मिश्रण था, क्योंकि रूस का नेतृत्व मज़हब को स्वीकार नहीं करता था.

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प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि किसी भी उच्च शिक्षा के संस्थान के नाम से ही उसके स्थान के गरिमामय इतिहास और संस्कृति से तथा वहां के उन महापुरुषों के नाम से, जिनके कारण सहस्रों वर्षों से उस स्थान की प्रतिष्ठा है, विद्यार्थियों का परिचय होना चाहिए; जिससे कि उस संस्थान से पढ़ते हुए विद्यार्थी उस क्षेत्र की महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का अन्वेषण कर सकें तथा भविष्य में भी ऐसे विद्या संस्थान का विद्यार्थी रहने का गौरव महसूस कर सकें. इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय का नाम बदलने की अनुशंसा की गई है.

स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चेहरों में से एक थे मौलाना बरकतउल्लाह
वर्तमान में विश्वविद्यालय का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर है. भोपाल में जन्मे बरकतउल्लाह ने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया और गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक स्तर पर समर्थन दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. उनका निधन वर्ष 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में हुआ था.

1970 में हुई थी यूनिवर्सिटी की स्थापना
बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी की स्थापना 1970 में भोपाल यूनिवर्सिटी के रूप में हुई थी, लेकिन साल 1988 में मध्य प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानी प्रोफेसर मौलाना बरकतउल्लाह के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय कर दिया गया. इस यूनिवर्सिटी में आर्ट्स, कॉमर्स, लॉ, साइंस, मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग के कोर्स संचालित होते हैं. 

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