आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हो रही स्कूल में पढ़ाई, रोबोट टीचर 'शालू' ऐसे लेती है क्लास

केंद्रीय विद्यालय, IIT बॉम्बे में एक कंप्यूटर साइंस टीचर, दिनेश कुंवर पटेल ने दुनिया का पहला सामाजिक और शैक्षिक ह्यूमनॉइड रोबोट 'शालू' विकसित किया है. इसे कार्डबोर्ड और बाकी वेस्ट मटेरियल से बनाया गया है. रोबोट टीचर शालू 9 भारतीय और 38 विदेशी भाषाओं समेत 47 भाषाएं बोल सकती है.

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पारस दामा

  • मुंबई,
  • 08 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

इन दिनों मुंबई की एक रोबोट टीचर काफी सुर्खियां बटौर रही है. शालू नाम की यह रोबोट टीचर स्टूडेंट्स को पढ़ा रही है. यह देश की दूसरी ऐसी रोबोट है जो बच्चों को पढ़ाने में सक्षम है. केंद्रीय विद्यालय, IIT बॉम्बे में एक कंप्यूटर साइंस टीचर, दिनेश कुंवर पटेल ने दुनिया का पहला सामाजिक और शैक्षिक ह्यूमनॉइड रोबोट 'शालू' विकसित किया है. इसे कार्डबोर्ड और बाकी वेस्ट मटेरियल से बनाया गया है.

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आज दुनिया भर में अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है. हर साल 8 सितंबर को अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. भारत में भी पिछले कुछ सालों से शिक्षा का महत्व काफी बढ़ा है. भारत शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ रहा है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के सर्वेक्षण के अनुसार, देश की साक्षरता दर 77.7 प्रतिशत है. भारत के छात्र अलग-अलग क्षेत्रों में नाम रोशन कर रहे हैं. 

वहीं भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी अपना वर्चस्व कायम कर रहा है. भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की ओर छात्रों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कई स्तर पर विकसित हो रहा है. इस बीच मुंबई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artifical Intelligence) सिस्टम शुरू किया गया है. लगातार दुनिया में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र अलग अलग और नए अविष्कार हो रहे हैं. ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक उपयोगी अविष्कार में से एक है.

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कैसे पढ़ाती है रोबोट टीचर?
रोबोट टीचर शालू 9 भारतीय और 38 विदेशी भाषाओं समेत 47 भाषाएं बोल सकती है. इस रोबोट को घर में ही बनाया गया है और इस की सब से खास बात यह है कि स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को शालू से पढ़ाई करने में काफी आसानी होती है. बच्चों को अपने सवालों के जवाब भी मिल जाते हैं और मजा भी आता है.

बच्चों को पढ़ाने के लिए इसमें जो सब्जेक्ट और टॉपिक पढ़ना होता है, उसकी फाइल अपलोड कर दी जाती है और उसके जरिए ही शालू बच्चों को पढ़ाती है.

 

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