National Doctors Day 2021: जानिए- क्यों मनाते हैं डॉक्टर्स डे, ये है खास वजह

केंद्र सरकार ने 1991 में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाने की शुरुआत की थी. इस खास दिन देश के एक महान चिकित्सक की पुण्यतिथि‍ के तौर पर भी मनाया जाता है. जानिए इसको मनाने का खास कारण...

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

aajtak.in

  • नई द‍िल्ली ,
  • 01 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

भारत में एक जुलाई के दिन नेशनल डॉक्टर डे मनाया जाता है. यह खास दिन समाज में डॉक्टरों के महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए है. अपने देश में डॉक्टर को इंसान के रूप में भगवान की तरह देखा जाता है.  डॉक्टर्स डे देश के डॉक्टरों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है.

डॉक्टर्स डे यानी कि एक जुलाई को देश के महान डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय की पुण्यत‍िथ‍ि भी होती है. इस दिन को उनकी याद के तौर पर भी मनाया जाता है. इसी खास दिन को केंद्र सरकार ने 1991 में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाने की शुरुआत की थी. डॉ. बिधानचंद्र रॉय देश के महान चिकित्सक होने के साथ साथ पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रहे हैं. डॉ बिधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना के खजांची में हुआ था. वे अपने विद्यार्थी जीवन में मेधावी छात्र थे और इसी कारण उन्होंने अन्य छात्रों के मुकाबले अपनी शिक्षा जल्दी पूरी कर ली. रॉय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में और उच्च शिक्षा इंग्लैंड से पूरी की. 

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गांधी के कहने पर राजनीति में आए

विधानचंद्र रॉय डॉक्टर के साथ-साथ समाजसेवी, आंदोलनकारी और राजनेता भी थे. वो बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने. बिधानचंद्र रॉय ने डॉक्टर के रूप में करियर की शुरुआत सियालदाह से की साथ ही वे सरकारी अस्पताल में  डॉक्टर की जिम्मेदारी भी निभाई. आजादी की लड़ाई के दौरान वो असहयोग आंदोलन का हिस्सा भी रहे. शुरुआत में उन्हें लोग महात्मा गांधी, नेहरू के डॉक्टर के रूप में जानते थे. महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. 

जो कमाते...सब दान कर देते थे

बिधानचंद्र रॉय का समाज के प्रति योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता. वो जो भी कमाते थे, सब कुछ दान कर देते थे. आज भी वो डॉक्टरी पेशे में आने वाले लोगों के लिए एक आदर्श के तौर पर हैं. आजादी के आंदोलन के समय उन्होंने घायलों और पीड़ितों की निस्वार्थ भाव से सेवा की. अगर हाल के दिनों की बात करें तो कोरोना काल में डॉक्टर्स ने बहुत बड़ा रोल निभाया. कई घंटे पीपीई क‍िट में रहकर उन्होंने कोरोना मरीजों को ठीक किया. इस महामारी में देश में सैकड़ों डॉक्टरों की मौत भी हुई. 

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