घर-घर कौन गिनता है लोगों को? जनगणना के पीछे किसकी ड्यूटी और कितनी मिलती है कमाई!

भारत में अगली जनगणना साल 2027 में होने जा रही है, जिसकी प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है. यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और पहली बार 16 भाषाओं में Self-Enumeration पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन भर सकते हैं. इस बीच लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कौन करता है या ये कौन से मंत्रालय के अंदर आता है? 

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Who conducts census?  (Photo: ITG) Who conducts census? (Photo: ITG)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

देश में जनगणना एक बड़ी सरकारी प्रक्रिया है, जिसके जरिए आबादी, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है. 2026–27 की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और इस बार कई बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं. साल 2027 में पूरी होने वाली जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो गई है. इस बार जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि इसे डिजिटल तरीके से कराने की योजना है.  हालांकि, इसकी प्रक्रिया 2026 से ही शुरू हो चुकी है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहले घरों का सर्वे और फिर जनसंख्या की गिनती की जाएगी. 

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इस बीच लोगों के बीच एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन करता है ये काम, किस मंत्रालय के अंदर ये आते हैं या उनकी सैलरी कितनी होती है? 

कौन करता है जनगणना?

बता दें कि भारत में जनगणना का काम केंद्र सरकार के अधीन होता है. इसे गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Registrar General & Census Commissioner of India) के कार्यालय द्वारा संचालित किया जाता है. जनगणना के लिए अलग से बड़ी संख्या में नए कर्मचारियों की हायरिंग नहीं होती है बल्कि आमतौर पर सरकारी स्कूलों के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारी इस काम में लगाए जाते हैं. 

क्या होती है उनकी जिम्मेदारी?

जनगणना करने वाले कर्मचारी लोगों के घर जा-जाकर जानकारी लेते हैं. इनमें परिवार के सदस्य, शिक्षा, नौकरी और घर की सुविधाएं से जुड़ी जानकारी कलेक्ट करते हैं. 

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मिलती है इतनी सैलरी

वहीं, अगर सैलरी की बात करें, तो जनगणना करने वालों को अलग से स्थायी सैलरी नहीं मिलती, क्योंकि वे पहले से सरकारी कर्मचारी होते हैं. उन्हें काम के बदले मानदेय (Honorarium) दिया जाता है. एन्यूमरेटर को करीब 15 से 30 हजार रुपये दिए जाते हैं. 

क्या है हाल की स्थिति? 

हाल की बात करें, तो साल 2027 में 16वीं जनगणना आयोजित की जा रही है जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यह दो चरणों में होगी- हाउस लिस्टिंग और जनसंख्या गणना होगी. इसके साथ ही इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी. लोग खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे. इसके लिए लाखों कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है और कई राज्यों में हजारों एन्यूमरेटर तैनात किए जा रहे हैं. 

इस साल पूछे जाएंगे 

  • भवन संख्या और जनगणना घर संख्या
  • घर का उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक)
  • घर की स्थिति (पक्का, कच्चा, रहने लायक)
  • दीवार, छत और फर्श में उपयोग की गई चीजें परिवार का नंबर
  • परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
  • परिवार के मुखिया का नाम और लिंग
  • क्या मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति या अन्य वर्ग से है 
  • घर के स्वामित्व की स्थिति (अपना या किराए का)
  • परिवार के पास उपलब्ध कमरों की संख्या
  • परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या 
  • पेयजल का मुख्य स्रोत और उपलब्धता.
  • बिजली का मुख्य स्रोत.
  • शौचालय तक पहुंच और प्रकार. 
  • गंदे पानी के निकास की व्यवस्था.  
  • स्नान की सुविधा. 
  • रसोई घर और LPG/PNG कनेक्शन की उपलब्धता. 
  • खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन (लकड़ी, गैस, आदि). 
  • रेडियो/ट्रांजिस्टर और टेलीविजन की उपलब्धता
  • इंटरनेट तक पहुंच
  • लैपटॉप/कंप्यूटर
  • टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन 
  • वाहनों की संख्या (साइकिल से लेकर कार/जीप तक)
  • परिवार में उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज
  • मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संचार के लिए) 
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