IIT बॉम्बे से पढ़ाई, 2.9 करोड़ का जॉब ऑफर, लेकिन खोल ली किराने की दुकान

आईआईटी बॉम्बे से डिग्री, 2.9 करोड़ रुपये के नौकरी का ऑफर और कानपुर में किराने की दुकान. विवेक शर्मा की यह कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गई है. इस कहानी ने लोगों के बीच करियर, परिवार की जिम्मेदारियों और सफलता का असली मतलब क्या है, इस पर फिर से बहस छेड़ दी है. 

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परिवार के लिए छोड़ दी 2.9 करोड़ रुपये पैकेज की नौकरी. (Image: X/@VikasAlwys) परिवार के लिए छोड़ दी 2.9 करोड़ रुपये पैकेज की नौकरी. (Image: X/@VikasAlwys)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST

सोचिए आपको अमेरिका में 2.9 करोड़ रुपये सालाना का जॉब का ऑफर आता है और आप इसे ठुकरा कर छोटे से शहर में किराना की दुकान खोल लेते हैं. लोगों को आपका ये फैसला बिल्कुल पसंद नहीं आएगा. ऐसा ही किया है कानपुर के रहने वाले विवेक ने. आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस के गोल्ड मेडलिस्ट विवेक शर्मा को अमेरिका में करीब 2.9 करोड़ रुपये सालाना पैकेज का ऑफर मिला था. लेकिन अपने करियर की शुरुआत से ठीक पहले उन्हें पता चला कि उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा है और उनकी मां कैंसर से जूझ रही हैं.  इसके बाद उन्होंने सैन फ्रांसिस्को जाने के बजाय भारत में ही रहने का फैसला किया है. 

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पोस्ट में इन बातों का जिक्र 

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक, विवेक शर्मा आईआईटी बॉम्बे से बीटेक कम्प्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक स्टार्टअप से 2.40 लाख डॉलर यानी करीब 2.90 करोड़ रुपये का ऑफर आया. इस ऑफर में उन्हें वीजा स्पांसरशिप, रीलोकेशन बेनिफिट और ग्लोबल लेवल पर करियर बनाने का एक मौका था लेकिन परिवार के स्थिति को देखते हुए उन्होंने वहां जाने के अपने फैसले को बदल दिया है. 

परिवार ने किया बलिदान 

खबरों के मुताबिक, विवेक कानपुर के लोअर मीडिल क्लास परिवार से आते हैं. उनके पिता रेलवे क्लर्क के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी मां ट्यूशन पढ़ाकर परिवार की आय में योगदान देती थीं. पोस्ट के अनुसार, उनके माता-पिता ने उनकी शिक्षा के लिए बहुत त्याग किया.  उन्होंने अपनी सारी बचत खर्च कर दी, गहने बेच दिए और हर एक रुपये का पूरा हिसाब रखा ताकि वह आईआईटी बॉम्बे में एडमिशन लेने से पहले कोटा में पढ़ाई कर सकें. उनकी लगन रंग लाई जब विवेक ने कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की और अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए गोल्ड मेडल मिला. 

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क्यों चूर हुआ अमेरिका का सपना 

वायरल पोस्ट के अनुसार, विवेक अमेरिका में नौकरी करने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मां को कैंसर हो गया. परिवार की इस मुश्किल घड़ी में उन्होंने अमेरिका जाने का फैसला टाल दिया. बताया जाता है कि उन्होंने अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए अमेरिकी वीजा इंटरव्यू रद्द कर दिया और 2.9 करोड़ रुपये का नौकरी का ऑफर भी ठुकरा दिया. 

घर के नीचे खोली छोटी सी दुकान 

कई साल बाद, उनकी कहानी इंटरनेट पर लोगों को अपनी ओर खींच रही है. सोशल मीडिया एक्स यूजर विवेक अल्विस ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें दावा किया गया कि शर्मा अब अपने घर के नीचे एक छोटी किराने की दुकान चलाते हैं और साथ ही गरीब बच्चों को कोडिंग सिखाते हैं. इस वायरल पोस्ट ने महत्वाकांक्षा, परिवार और सफलता के वास्तविक अर्थों को एक बार फिर से उजागर किया है.

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