भारत में आने वाली हैं लाखों हेल्थ जॉब्स? PM मोदी ने कहा- युवा केयरटेकर-नर्सिंग असिस्टेंट बनने की तैयारी करें

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य, तीनों क्षेत्रों में एक साथ प्रगति जरूरी है. उनके मुताबिक अगर इन क्षेत्रों को मजबूत किया जाए तो भारत ऐसा कार्यबल तैयार कर सकता है जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी दे सके.

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केयर इकोनॉमी बनेगी जॉब का बड़ा जरिया, पीएम मोदी का युवाओं को संदेश केयर इकोनॉमी बनेगी जॉब का बड़ा जरिया, पीएम मोदी का युवाओं को संदेश

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:32 PM IST

भारत के हेल्थ सेक्टर में आने वाले सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ी सेवाएं (केयर इकोनॉमी) और टेलीमेडिसिन के बढ़ते इस्तेमाल से बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा होने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को युवाओं से कहा कि वे केयरटेकर और नर्सिंग असिस्टेंट जैसे कामों के लिए खुद को तैयार करें क्योंकि भविष्य में इसकी मांग तेजी से बढ़ने वाली है.

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नई दिल्ली में आयोजित चौथे पोस्ट-बजट वेबिनार 'सबका साथ, सबका विकास: लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना' में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में युवाओं को हेल्थकेयर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जुड़े क्षेत्रों के लिए तैयार करना बहुत जरूरी है.

प्रधानमंत्री के मुताबिक जनसंख्या के बदलते ढांचे, नई तकनीक और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के कारण आने वाले समय में हेल्थ सेक्टर में नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है.

केयर इकोनॉमी क्यों बन रही बड़ा मौका

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशक में भारत में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. इससे उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत भी बढ़ेगी. दूसरी ओर दुनिया के कई देशों में पहले से ही प्रशिक्षित केयरगिवर्स की कमी है. ऐसे में भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में भी रोजगार के अवसर खुल सकते हैं.

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उन्होंने कहा कि केयर इकोनॉमी भविष्य में रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकती है और इससे लाखों स्किल्ड नौकरियां पैदा होने की संभावना है. इसके लिए विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं को ऐसे ट्रेनिंग मॉडल तैयार करने होंगे जिससे युवाओं को केयरगिविंग और हेल्थ सेवाओं से जुड़ी स्किल सिखाई जा सके. प्रधानमंत्री के अनुसार इससे न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

टेलीमेडिसिन से बढ़ रही स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच

प्रधानमंत्री ने डिजिटल हेल्थ सेवाओं की अहमियत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन के जरिए दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक भी डॉक्टरों की सलाह पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बहुत से लोग पहले ही टेलीमेडिसिन का फायदा उठा रहे हैं और इन सेवाओं पर उनका भरोसा भी बढ़ रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि अभी लोगों में इसके बारे में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने की जरूरत है.

उनके मुताबिक टेलीमेडिसिन डॉक्टरों और मरीजों के बीच दूरी कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है और आगे भी यह स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा.

स्वास्थ्य ढांचा भी तेजी से बढ़ा

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का काफी विस्तार हुआ है. देश के कई जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, जिससे डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ रही है. उन्होंने सरकार की योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का भी जिक्र किया. इन योजनाओं के जरिए गांवों और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाना और इलाज के साथ-साथ रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है.

आयुर्वेद और योग को मिल रही वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग जैसी भारतीय पद्धतियों को दुनिया भर में तेजी से पहचान मिल रही है. उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ इन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने से भारत स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व मजबूत कर सकता है.

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